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युघ्द करने वाले पुरूष − चाहिये!

(पिता दिवस का संदेश)
NEEDED – FIGHTING MEN!
(A FATHER’S DAY SERMON)
(Hindi)

द्वारा डॉ.आर.एल.हिमर्स
By Dr. R. L. Hymers, Jr.

रविवार की सुबह‚ १५ जून‚ २०१४ को लॉस एंजीलिस के दि बैपटिस्ट टैबरनेकल
में प्रचार किया गया संदेश
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord’s Day Morning, June 15, 2014

“परन्तु आत्मा स्पष्टता से कहता है, कि आने वाले समयों में कितने लोग भरमाने वाली आत्माओं, और दुष्टात्माओं की शिक्षाओं पर मन लगाकर विश्वास से बहक जाएंगे। यह उन झूठे मनुष्यों के कपट के कारण होगा, जिन का विवेक मानों जलते हुए लोहे से दागा गया है।” (१तिमुथयुस ४:१–२)


आज फादर्स डे है। आप आशा कर रहे होंगे कि में फादर्स डे के उपर सदेंश दूंगा कि एक अच्छा पिता कैसे बना जाए। किन्तु में यह महसूस नहीं करता कि में आज इस सुबह इस विषय पर प्रचार करूं। अगर में आपको बताउं कि कैसे अच्छे पिता बना जाये तो आपको इस सदेंश में से कुछ ज्यादा नहीं मिलेगा। अधिकतर फार्दस डे के सदेंश केवल थोड़ी सी नैतिक बातों से भरे होते होते है। मि.डेविड मुर्रो ने एक पुस्तक लिखी जिसका शीषर्क है, क्यो पुरूष चर्च जाना पसंद नही करते (डेविड मुर्रो, थॉमस नेल्सन पब्लिशर्स, २००४)। मेरे विचार से हर प्रचारक को इसे पढ़ना चाहिए। डा . मुर्रो के विचार से पुरूषो को यह पसंद नहीं आता कि कोई उन्हें अच्छा बनने − के विषय में संदेश सुनाए। उनकी माएं उन्हें पूरे बचपन भर − यहीं बोलती आयीं। और उन्होंने भी इस बात को नज़रअदांज करना सीख लिया है। मैं ये यह नहीं कहता कि उनकी माएं गलत थी। यह तो स्वाभाविक है कि माएं इस तरीके से लड़को को सिखाती हैं। किंतु एक बड़ा आदमी इस तरीके से नहीं सीखता है। एक आदमी दूसरे आदमी के उदाहरण से सीख सकता है। अगर पुरूष मसीह का अनुसरण करना सीख लेंगे, तो वे जीवन मे बहुत सी गलतियां करने से बचेंगे। इसलिए मैं चाहता हूँ पूरूषो का जीवन बचे और वे मसीह का अनुसरण करे। मि मुर्रो के अनुसार पुरूष चुनौती का सामना करना चाहता है, वह चाहता है कि सेना मे उसका चयन हो, वह परमेश्वर के लिए क्रुस के सैनिक के समान युध्द में भाग लेना चाहता है! मैं सोचता हूं मि. मुर्रो बिल्कुल सही बोल रहे थे। हमारे चर्च मे इससे बढकर कोई आवश्यता नहीं होगी। हम एक युद्ध में है - और हमें युद्ध करने वाले पुरूष चाहिए - लोग जो परमेश्वर से लड़ने से डरे नहीं और इस शैतान - नियंत्रित देश में सत्य के लिए सामने आये!

दुर्भाग्य से चर्च के लोग यह भी नहीं जानते कि हम एक युद्ध में है! वे यह भी नहीं जानते कि शत्रु कौन है? पास्टर्स ही उन्हें नहीं बताते! मैं आज सुबह आपको बताऊंगा! तो चलिए! इस पाठयांश को फिर से पढ़े,

“परन्तु आत्मा स्पष्टता से कहता है‚ कि आने वाले समयों में कितने लोग भरमाने वाली आत्माओं‚ और दुष्टात्माओं की शिक्षाओं पर मन लगाकर विश्वास से बहक जाएंगे। यह उन झूठे मनुष्यों के कपट के कारण होगा‚ जिन का विवेक मानों जलते हुए लोहे से दागा गया है।” (१तिमुथयुस ४:१–२)

प्रेरित पौलुस इसमें “बाद में आने वाले समय” का वर्णन करता है। मेरा मानना है कि यह “अंतिम दिनो” के लिये जिसका वर्णन २ तिमुथयुस ३%१ में है कहा गया है। मैं लगभग ५५ वर्षो से उपर बाईबल का अघ्ययन कर रहा हूँ, और मैं सहमत हूँ कि हम अभी - उस काल में रह रहे हैं। हम उन ''बाद के दिनो” में अभी रह रहे हैं। हम मसीही के द्धितीय आगमन और इस संसार के “अंत के युगो” में रह रहे है। हम उस समय में रह रहे है जब सर्वत्र नरक ही दिखाई देता है। शैतान और उसकी सेना हमारी गलियों में मार्च कर रही है, हमारे जीवन जीने के तरीके को नष्ट कर रही है।

यहां तक कि अमेरिका के राष्ट्रपति भी समझते हैं कि कुछ गलत हैं। हमारे यहां पिछले बुधवार एक गोली चलने की दुर्घटना हुई। लगभग १५ वर्षिय स्कूली बालक ओरेगॉन में स्कूल पहुचकर अंधाधुघ गोली चलाना आरंभ कर देता है। उसने एक अन्य लड़के को मार डाला, इसके पहले कि उसने स्वयं को गोली मार ली।

अब तो हर हफते में एक बार ऐसी घटना होनी लगी है। हमारे यहां बंदूक से हिंसा में तेजी से बढ़ रही है....अमेरिका में ऐसे दिवाने लोगो के उपर नियंत्रण नहीं रहा....हम भीड़ पर गोली चलाकर ढेरो लोगो को मौत के धाट उतार देते है। (यह बड़ गया है) दूसरे स्थानो की तुलना में। (बराक ओबामा, दि लॉस एंजलिस टाईम्स‚ बुधवार, जून ११‚ २०१४)

बेशक ओबामा का जवाब था कि बंदूको से छुटकारा पाया जायें। कितुं मैं इससे असहमत हूं। हमारे देश में वे बंदूको से छुटकारा पा लेंगे‚ किन्तुं हिंसा इसी तरह चलती रहेगी। कुछ सप्ताह पहले एक लड़के ने शिकारी चाकू लिया‚ और उसके स्कूल २० छात्रों को चाकू मार दिया। अगर वे शिकारी चाकूओं से भी छुटकारा पा लेंगे‚ तो वे एक दूसरे को चट्टान के टुकडे़ और टूटी बोतलों से मारेंगे या किसी को आग में जला देंगे। जैसे उन्होंने कुछ समय पहले लॉस एंजलिस में किया था। कैन ने अपने भाई हाबिल को हजारो वर्ष पूर्व बंदूक की खोज होने से पूर्व मार डाला था!

मेरे विचार से मुददा बदूंको से भी उपर उठकर है। मै पूरी रीति से मानता हूं कि इस हिंसा और पागलपन के पीछे शैतान और उसकी दुष्टसेना है। हमारे पास से परमेश्वर की सुरक्षा खत्म हो जाती है और हिंसा आरंभ हो जाती है। हमने परमेश्वर का बचाव खोना आरंभ कर दिया जब सुप्रीम कोर्ट ने न्यूयार्क के छात्रों को आदेश दिया कि वे स्कूल में एक साधारण सी प्रार्थना भी नहीं कर सकते। १९६२‚ में कोर्ट ने छात्रों को यह कहकर करने से रोक कि यह प्रार्थना कहना अवैधानिक है‚

परमपिता परमेश्वर‚ हम आप पर हमारी निर्भरता स्वीकार करते हैं‚ निवेदन करते है अपनी आशीषें हमें दीजिए‚ हमारे माता–पिता‚ व शिक्षको और देश पर दीजियें।

तब १९६३ में को कोर्ट ने किंडरगार्डन के बच्चों को दोपहर के भोजन की इस प्रार्थना को करने से रोका‚

हम सुन्दर फूलों के लिए आपको धन्यवाद देते हैं;
हम जो भोजन खाते हैं उसके लिए धन्यवाद देते हैं;
चिडि़या जो गीत गाती है उसके लिए धन्यवाद देते हैं;
सब बातों के लिए आपको धन्यवाद देते हैं।

इस कविता में परमेश्वर शब्द भी नहीं आया था, किंतु कोर्ट ने कहा कि इसमें परमेश्वर के प्रति भाव उत्पन्न होता है! हमारे न्यायधीश असहमत होकर बोले, ''इस तरह कोर्ट न केवल प्रार्थना बोलने पर रोक लगाती है, पर ये बच्चें क्या सोच रहे हैं, इस पर भी रोक लगाती है....इससे संस्थापकों को आश्चर्य तो होगा।'' उसी साल‚ १९६३ में कोर्ट ने यह भी आदेश निकाला कि ऐच्छिक रूप से बाईबल पढ़ना भी नियम के विरूध है। कोर्ट एक मनोवैज्ञानिक पर भरोसा करके यह आदेश निकालती है कि स्कूल में बाईबल का पढा़ जाना‚ “(बच्चो) के लिए मनोवैज्ञानिक रूप में हानिकारक होगा।” पर सोचिए! इस तथाकथित मनोवैज्ञानिक का कथन था कि बाईबल “मनोवैज्ञानिक रूप से हानिकारक” है व बच्चो पर गलत प्रभाव छोड़ती है! यह सारे आदेश १९६२ व ६३ में निकले। उस ठंड में परमेश्वर ने अपनी सुरक्षा देश पर से हटा ली और राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी का डलास‚ टेक्सास में भेजा उड़ा दिया गया। अमेरिका सदा से हिंसा के द्वारा तार तार होता रहा है! प्रत्येक राष्ट्रपति का न्याय इसी तरह किया जाता रहा। केवल रोनाल्ड रेगन को छोड़कर‚ हर राष्ट्रपति ने अपना कार्यालय शर्म व असफलता में ही छोडा हैं।

प्रत्येक जन जानता है कि हमारा देश जैसा पहले हुआ करता था वैसा नहीं रहा। हमारे चर्चेस वैसे नहीं रहें। अधिकतर लोग यह मानना हि नहीं चाहते कि इन सब का मूल कारण शैतान है डॉ. मेरिल एफ. अंगर‚ जो डलास थियोलॉजिकल सेमिनरी के लंबे समय तक प्राध्यापक रहे‚ उन्होंने कहा था‚

बीसवी सदी के व्यावसायिक चर्च चौंकाने वाली सीमा तक शैतानी शक्तियों के अस्तित्व को नकार रहे हैं। अविश्वास की यह दशा चर्चेस के निम्न आत्मिक जीवन व सामर्थ को दर्शाती है....धर्मशास्त्र में प्रगट इस संसार के सरदार शैतान ने उनकी आंखों को अंधा कर दिया है (मेरिल एफ. अंगर‚ पी.एच.डी.‚ बिबलीकल डेमनोलॉजी‚ क्रीजेल पब्लिकेशंस‚ १९९४‚ पेज २०१) ।

डॉ. मार्टिन ल्यॉड जोंस कई वर्षो तक इंग्लैंड‚ लंदन के वेस्टमिंस्टर चैपल के पास्टर रहे। वह बींसवी सदी के बड़े उत्तम सुसमाचार प्रचारक कहलाये। डॉ.ल्यॉड–जोंस ने कहा था‚

शैतानी गतिविधियां बढ़ रही है। कारण क्या है? मेरे हिसाब से प्रारंभिक तौर पर गिरता हुआ आत्मिक स्तर‚ सर्वत्र देश में ईश्वर विहिनता....जैसे जैसे ईश्वर विहिनता बढ़ती गई‚ लोंगो के मन से परमेश्वर का संपूर्ण विचार गायब होने लगता है‚ उसकी तुलना में आप उनके विचारों में दुष्टता से भरे कार्यो को करने की इच्छा साक्षात देखोगे। (डी.मार्टिन ल्यॉड-जोंस‚ एम.डी.‚ हीलिंग एंड स्किप्चर्स‚ आँलिवर–वेलसन बुक्स‚ १९८८‚ पेज १५९–६०)

डॉ ल्यॉड.जोंस ने यह भी कहा था‚ “शैतान बेहद चालाक है वह लोगो को यह समझाने में सफल हो जाता है कि कोई शैतान नहीं होता है। (इस तरह) चर्च जैसे बेहोशी की हालत में भ्रमित हैं; वह बेसुध सोया हुआ है‚ वह बिल्कुल किसी प्रकार के युद्ध के प्रति जागरूक नहीं हैं” (ल्यॉड जोंस‚ दि क्रिस्चिन वारफेयर‚ दि बैनर आँफ टूथ एंड ट्रस्ट‚ १९७६‚ पेज १०६)

किंतु शैतान द्वारा “भ्रमित नहीं होना न बेहोश” रहना है। हमें जैसा लूथर कहता है‚

...चूंकि यह संसार, शैतान से भरा है‚
   हमें परास्त होने के लिए डराता है,
हम नहीं डरेंगे, क्योंकि परमेश्वर की मर्जी है
   कि उसकी सच्चाई हमें जीत दिलायेगी।
(“ए माईटी फोर्टेस इज अवर गॉड'' मार्टिन लूथर, १४८३–१५४६)

शैतान व उसकी सेना के साथ हमारा संघर्ष, युद्ध है।

१. पहला, पहले जो विश्वास संतो को मिला था यह उसे प्राप्त करने के लिए एक युद्ध है!

प्रेरित यहूदा ने कहा था,

“...कि उस विश्वास के लिये पूरा यत्न करो जो पवित्र लोगों को एक ही बार सौंपा गया था।” (यहूदा ३)

''यत्न करना'' अर्थात “संघर्ष करना” उस युद्ध को लड़ने के लिए (स्ट्रांग १८६४) धर्मशास्त्र में बताये गये मसीही विश्वास को सुरक्षित रखने में व घोषित करने के लिए हमें सदैव संघर्ष करते रहना है। डॉ.ए.किस्वेल ने कहा था, ''यह पद (यत्न) करते रहो एक जोरदार व निश्चित प्रकार की भिड़न्त से जुड़ा हुआ है जिसमें मसीही सिद्धंता की आधुनिक बुनियाद को कायम रखने (के लिए) किए जाने वाले सशक्त संघर्ष का बोध होता है.....” (दि किसवेल स्टडी बाईबल, यहूदा ३ पर व्याख्या)।

डॉ.ए.किस्वेल स्वयं बाईबल के अचूक होने की बात को लेकर लंबे समय तक लड़ते रहे। उनकी एक युगांतरकारी किताब थी, व्हाय आय प्रीच दैट दि बाईबल इच लिटरैली ट: ए फर्वेंट कॉल दैट दि स्किप्चर्स एस दि गॉड बीथ्ड टथ आँफ हैवन (डबल्यू. ए. किस्वेल पीएच.डी, ब्राडमन प्रेस, १९६९) १९७० और १९८० में मेरे चर्च का छोटा सा योगदान ''सदर्न बैपटिस्ट जर्नल” के लिये इसप्रकार था कि हमारा चर्च उस समय डॉ. बिल पॉवेल को 600 डालर प्रतिमाह दिया करता था (जो उस समय छोटी रकम नहीं थी) यह अखबार छ सदर्न बैपटिस्ट सेमनरी में दी जाने वाली झूठी शिक्षा को उजागर करता था। इसे प्रत्येक सदर्न बैपटिस्ट पास्टर के पास भेजा जाता था। डॉ. बिल पॉवेल का अखबार बांटने के लिये मैं व मेरी पत्नी कई सभाओ में भाग लिया करते थे। पिटसबर्ग की सभा में तो ऐसा हुआ कि उदारवादी प्रतिनिधयो ने इस अखबार के टुकडे टुकडे कर दिये व मेरी पत्नी के मुंह पर फेंक दिया वास्तव में उन्होंने एक प्रकार से मेरी पत्नी के मुंह पर थूका था। यदयपि उस समय वह गर्भवती भी थी व बच्चे का जन्म नजदीक ही था ! मसीही विश्वास को बनाये रखने के लिये ये हमारा संघर्ष था।

तब से हमने रूकामैनिज्म की शिक्षा का विरोध करना आरंभ कर दिया। शैतानी फिल्म ''दि लास्ट टैंपटेशन आँफ क्राईस्ट'' का भी भारी विरोध किया। हमारे चर्च और हमने मिलकर लॉस एंजिलिस क्षेत्र के तीन गर्भपात क्लिनिक को बंद करवाया।

मैं अब ७३ वर्ष का हूं। परमेश्वर ने मुझे अब एक अंतिम युध्द में शामिल होने के लिये कहा है वह युध्द ''निर्णयवाद'' के विरूद् है – वास्तविक परिवर्तन होना आवश्यक है - चूंकि हमारे चर्चेस मे लाखों अविश्वासी प्रवेश कर चुके हैं हम उस सनातन लहू के महत्व और आवश्यकता को लौटाने की कोशिश कर रहें हैं जिससे पवित्र परमेश्वर के समक्ष पाप साफ होते हैं !

हम जानते है कि इस शिक्षा का मूल शैतान है, क्योंकि पाठयांश कहता है,

“परन्तु आत्मा स्पष्टता से कहता है‚ कि आने वाले समयों में कितने लोग भरमाने वाली आत्माओं‚ और दुष्टात्माओं की शिक्षाओं पर मन लगाकर विश्वास से बहक जाएंगे। यह उन झूठे मनुष्यों के कपट के कारण होगा‚ जिन का विवेक मानों जलते हुए लोहे से दागा गया है।” (१तिमुथयुस ४:१–२)

आज सुबह मैं हर व्यक्ति से यह अपेक्षा रखता हूं कि वह ''उन भरमाने वाली आत्माओं'' – जो स्वयं शैतान – है और मसीही विश्वास को हिलाने का पूरा प्रयास कर रही हैं के विरूद् युध्द में शामिल हो! आप आइये – और हमारी सहायता करें!

आगे बढो, मसीही सैनिको, लडाई के लिये आगे बढो,
   यीशु का क्रूस हमें आगे लिए चलता है:
मसीह जो प्रमुख राजा है शत्रु के विरूद् ले चलता है;
   युध्द में आगे‚ उसके झंडे उंचे है।
आगे बढो, मसीही सैनिको, लडाई के लिये आगे बढो,
   यीशु का क्रूस हमें आगे लिए चलता है ।
(“आगे बढो, मसीही सैनिको” सैबिन बारिंग – गोल्ड, १८३४−१९२४)

२. यह आत्मिक युध्द है − इसे प्रार्थना में जीता जाना चाहिये!

इस पाठयांश को पढ़े, इफिसियो ६:१०−१२ जोर से पढि़ये,

“निदान, प्रभु में और उस की शक्ति के प्रभाव में बलवन्त बनो। परमेश्वर के सारे हथियार बान्ध लो; कि तुम शैतान की युक्तियों के साम्हने खड़े रह सको। क्योंकि हमारा यह मल्लयुद्ध, लोहू और मांस से नहीं, परन्तु प्रधानों से और अधिकारियों से, और इस संसार के अन्धकार के हाकिमों से, और उस दुष्टता की आत्मिक सेनाओं से है जो आकाश में हैं।” (इफिसियो ६:१०−१२)

यह पाठयांश बहुत महान है। यह हमें सिखाता है कि हमारा युध्द ''मांस व लहू'' का नहीं है किंतु “शैतान” व उसकी सेनाओं के विरूद् है। जैसा डॉ. जे. वर्नान मैगी ने कहा,

हम शत्रु को जानते है और वह कहां रहता है यह भी जानते है। शैतान उसकी सेना का प्रमुख है। हमें तो यह पहचानना है कि लडाई किस क्षेत्र में चल रही है। मेरे विचार से चर्च में आत्मिक लडाई के लिये कोई दर्शन नहीं है (जे टी. एच. डी., थ्रू दि बाईबल, थॉमस नेलसन पब्लिशर्स, १९८३, वॉल्यूम ५, पेज २७९−२८०; इफिसियों ६:१२ पर व्याख्या)

हम बराक ओबामा के साथ कोई लडाई नही लड रहे है, न ही स्वयं को नुकसान पहुंचाने वाली ''टी पार्टी'' रिपब्लकंस के साथ हमें लडना है। हम सच में सेना के समलैंगिको के साथ भी नहीं लड रहे है और न ही आतंकवादी मुस्लिमों के साथ। राष्ट्रपति जार्ज डब्लू. बुश ने सोचा कि हम इराक को स्वतंत्र करवा लेंगे और हमारी सेनायें वहां लगाने के द्वारा लोकतंत्र स्थापित करेंगे। मैं जानता था कि ये सिद्ध नहीं होगा। अब आतंकवादी मुस्लिम स्वयं लौट कर आ रहे है। आप देखते है कि मि.बुश और मि.ओबामा ये नहीं समझे कि लड़ाई ऐसी लड़ाई नहीं हैं जो सैनिको के दम पर जीती जा सके। यह आत्मिक लड़ाई थी यह आत्मिक लड़ाई है। हजारो लोग मसीही में लौट रहे हैं। हमें शैतानी ताकतो के साथ प्रार्थना द्वारा लड़ना चाहिए! प्रार्थना लड़ाई में हमें जीत दिलवाती है न कि अमेरिकन सेनाये! इफिसियों ६:१८ खोलिए। इसे जोर से पढि़ये,

“और हर समय और हर प्रकार से आत्मा में प्रार्थना, और बिनती करते रहो, और इसी लिये जागते रहो, कि सब पवित्र लोगों के लिये लगातार बिनती किया करो।” (इफिसियों ६:१८)

हम पद ११ व १२ में असली शत्रु को पहचानते है। परमेश्वर का दिया हुआ सुरक्षा कवच पहनने की जरूरत को पद १३–१७ में पढ़ते है। अब पद १८ में शैतान व उसकी सेना से लड़ाई के लिए पढ़ते है। प्रार्थना ही लडाई है !!!

आज सुबह मैं हर व्यक्ति से यह अपेक्षा रखता हूं कि वह पहचान ले कि प्रार्थना पोंगे मनुष्यों के लिए नहीं हैं! प्रेरित पौलुस जिस लड़ाई की बात कर रहा है - वह लड़ाई शैतान और उसकी सेना से है! ''प्रार्थना हमेशा संपूर्ण मन से व धन्यवाद के साथ की जाना चाहिये'' यह संकोची व डरपोक लोगो के लिये नहीं है! नाजुक, निर्बल, असहाय, ढीले ढाले पुरूषों के लिये प्रार्थना नहीं है। ऐसे लोग परिस्थतियो से जल्दी प्रभावित हो जाते हैं। डर भी जाते हैं अगर वे हमारे यहां की एक हफते की प्रार्थना सभा में भाग लें तो उनकी हिम्मत जवाब दे जायेगी। हम पुरनियो का उदाहरण देखते हैं - केवल पुरूष प्रार्थना करते हैं! स्त्रियों उनकी प्रार्थनाओं को ''आमीन'' बोलकर सहयोग करती हैं। पुरूष प्रार्थना करते हैं - जैसे मैंने उत्तरी आयरलैंड में डॉ. पैसले के चर्च में पुरूषों को प्रार्थना करते सुना था। वे पुरूष जानते थे कि अनुग्रह के सिंहासन के सामने कैसे निडरता के साथ आया जाए! हम उसी उदाहरण का अनुसरण करते हैं। हम हमारी प्रार्थनाओे में स्वर्ग के द्वार हिला देते हैं। अगर शैतान से लडाई करने का साहस परमेश्वर की दया से आपके भीतर है तो हमारी प्रार्थना सभा में आइये! आमीन! हम बुधवार रात ७ बजे प्रार्थना करते हैं। हम गुरूवार रात ७ बजे प्रार्थना करते हैं। हम शनिवार रात ६ बजे प्रार्थना करते हैं। क्यों इतनी प्रार्थना करते हैं? अगर हमारे प्रार्थना योध्दा इतनी प्रार्थना न करें तो लॉस एंजीलिस में हमारा चर्च दो माह से ज्यादा चल भी नहीं सकता! आइये और हमारे साथ सम्मिलित होइये!

जैसे शक्तिशाली सेना कलीसिया को हिलाती है;
   हम वहां कदम रखते है जहां संतो ने पग धरा था;
हम बंटे हुए नहीं, मिलकर एक देह हैं,
   आशा शिक्षा, और दया करने में एक।
आगे बढो, मसीही सैनिको, लडाई के लिये आगे बढो,
   यीशु का क्रूस हमें आगे लिए चलता है।

३. तीसरा, आपको लडाई में भाग लेने के लिये नया जन्म प्राप्त होना चाहिये!

दूसरे विश्व युध्द के समय चर्चिल प्रधानमंत्री थे। वह रेडियों पर बिटेनवासियों से बोल रहे थे, ''मेरे पास आपको देने के लिये रक्त, परिश्रम, आंसू व पसीने के सिवाय कुछ नहीं है।'' लोगों ने उनकी भावना को समझा और हिटलर व नाजियो को खदेड दिया!

मैं आज सुबह आपको यह नहीं कहता कि मेरे पास आपको देने के लिये कुछ नही है मैं आपको एक लंबी, कठिन लडाई इन दुष्टों की सामर्थ के विरूद् सौंपना चाहता हूं। यह आसान नहीं होगा। इसकी कीमत चुकानी होगी। आपको अपने मन को जांचना होगा व पाप से प्रायश्चित करना होगा। आपको चर्च में आना आवश्यक है और हर समय यहां बने रहिये। आपको यीशु को अपना जीवन समर्पित करना भी आवश्यक है‚ उसके पवित्र सनातन लहू में अपने पाप धोने होगे! बाईबल कहती है,

“मसीह यीशु के अच्छे योद्धा की नाईं मेरे साथ दुख उठा।” ( २तीमुथियुस २:३)

तो, अब उठिये! क्रूस उठा लीजिये व मसीह का अनुसरण कीजिये! इस दुष्टता भरे शहर में शैतान से इस बडी लडाई के लिये तैयार होइये!

आगे बढो, ऐ लोगो, इस आनंदित भीड में शामिल होइये,
   हमारी आवाज में अपनी आवाज मिला लीजिये इस विजय के गीत में;
महिमा, सराहना व सम्मान देते हैं मसीह हमारे राजा को;
   अनंत युगो से स्वर्गदूत व मनुष्य यही तो गाते आये हैं।
आगे बढो मसीही सैनिको, लडाई के लिये आगे बढो,
    यीशु का क्रूस हमें आगे लिए चलता है।

मेरे साथ खडे होइये और गाइये! यह कोरस गाइये!

आपको यीशु को अपना जीवन समर्पित करना आवश्यक है‚ उसके पवित्र सनातन लहू में अपने पाप धोने होगे। अगर आप अपने बचाये जाने के बारे में और सच्चे मसीही बनने के विषय में बात करना चाहते हैं, तो अपना स्थान छोडकर आँडिटोरियम के पिछले हिस्से में आ जाईये। डॉ.कैगन आपको दूसरे कमरे में ले जायेंगे जहां हम दुआ कर सकते हैं डॉ.चॉन, आपसे निवेदन है कि आप दुआ करें कि कोई आज सुबह यीशु पर ईमान लाये। आमीन।

(संदेश का अंत)
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संदेश के पूर्व धर्मशास्त्र पढा गया मि.ऐबेल प्रुद्योमें:२ तिमुथयुस ४:१–५


रूपरेखा

युघ्द करने वाले पुरूष – चाहिये

(पिता दिवस का संदेश)

द्वारा डॉ.आर.एल.हिमर्स

“परन्तु आत्मा स्पष्टता से कहता है, कि आने वाले समयों में कितने लोग भरमाने वाली आत्माओं, और दुष्टात्माओं की शिक्षाओं पर मन लगाकर विश्वास से बहक जाएंगे। यह उन झूठे मनुष्यों के कपट के कारण होगा, जिन का विवेक मानों जलते हुए लोहे से दागा गया है।” (१तिमुथयुस ४:१–२)

(१तिमुथयुस ६:१२; २तिमुथयुस ३:१)

१. पहला, पहले जो विश्वास संतो को मिला था उसे प्राप्त करने के लिए एक युद्ध है! यहूदा ३

२. यह आत्मिक युध्द है − इसे प्रार्थना में जीता जाना चाहिये!
इफिसियो ६:१०−१२‚१८

३. तीसरा, आपको लडाई में भाग लेने के लिये नया जन्म प्राप्त होना चाहिये! २ तिमुथयुस २:३