Print Sermon

इन संदेशों की पांडुलिपियां प्रति माह २१५ देशों के १,५००,००० कंम्प्यूटर्स पर इस वेबसाइट पते पर www.sermonsfortheworld.com जाती हैं। सैकड़ों लोग इन्हें यू टयूब विडियो पर देखते हैं। किंतु वे जल्द ही यू टयूब छोड़ देते हैं क्योंकि विडियों संदेश हमारी वेबसाईट पर पर पहुंचाता है। यू टयूब लोगों को हमारी वेबसाईट पर पहुंचाता है। प्रति माह ये संदेश ३५ भाषाओं में अनुवादित होकर १२०,००० प्रति माह हजारों लोगों के कंप्यूटर्स पर पहुंचते हैं। लिये उपलब्ध रहते हैं। पांडुलिपि संदेशों का कॉपीराईट नहीं है। आप उन्हें बिना अनुमति के भी उपयोग में ला सकते हैं। आप यहां क्लिक करके अपना मासिक दान हमें दे सकते हैं ताकि संपूर्ण संसार जिसमें मुस्लिम व हिंदु भी सम्मिलित है उनके मध्य सुसमाचार फैलाने के महान कार्य में सहायता मिल सके।

जब कभी आप डॉ हिमर्स को लिखें तो अवश्य बतायें कि आप किस देश में रहते हैं। अन्यथा वह आप को उत्तर नहीं दे पायेंगे। डॉ हिमर्स का ईमेल है rlhymersjr@sbcglobal.net.




नूह और लूत के दिन

(संदेश #७७ उत्पत्ति की पुस्तक में से)
THE DAYS OF NOAH AND THE DAYS OF LOT
(SERMON #77 ON THE BOOK OF GENESIS)

(Hindi)

द्वारा डॉ.आर.एल.हिमर्स
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

रविवार की सुबह‚ १८मई‚ २०१४ को लॉस एंजीलिस के दि बैपटिस्ट टैबरनेकल में
प्रचार किया गया संदेश
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord’s Day Morning, May 18, 2014

“जैसा नूह के दिनों में हुआ था‚ वैसा ही मनुष्य के पुत्र के दिनों में भी होगा। जिस दिन तक नूह जहाज पर न चढ़ा‚ उस दिन तक लोग खाते–पीते थे‚ और उन में ब्याह–शादी होती थी; तब जल–प्रलय ने आकर उन सब को नाश किया। और जैसा लूत के दिनों में हुआ था। कि लोग खाते–पीते लेन–देन करते‚ पेड़ लगाते और घर बनाते थे। परन्तु जिस दिन लूत सदोम से निकला‚ उस दिन आग और गन्धक आकाश से बरसी और सब को नाश कर दिया। मनुष्य के पुत्र के प्रगट होने के दिन भी ऐसा ही होगा।” (लूका१७:२६–३०)


इस पाठ के विषय में आपको तीन बातें ध्यान देना चाहिये। पहला‚ यीशु ने दो बडी घटनाओं का प्रयोग किया – नूह के दिनों की बाढ‚ सदोम शहर पर आग व गंधक की बारिश। दूसरा‚ पद २७ के अंतिम चार शब्दों पर ध्यान दीजिये‚ “और उनका सब कुछ नष्ट कर दिया।” अब पद २९ के अंतिम चार शब्दों पर ध्यान दीजिये‚ “और उनका सब कुछ नष्ट कर दिया।” अब पद ३० को देखिये‚ “जब मनुष्य के पुत्र का दिन प्रगट होगा तब भी ऐसा आगमन ही होगा।” इस अविश्वासी संसार के साथ मसीह के द्वितीय आगमन पर जो न्याय होगा यह उस की ओर संकेत देता है।

नूह के समय लोग तैयार नहीं थे – इसलिये वे नष्ट हुये। लूत के समय भी लोग तैयार नहीं थे – इसलिये वे सब नष्ट हुये। खाना‚ पीना‚ शादी करना गलत नहीं था‚ किंतु यही सब बातों के लिये वे चिंता करते थे! उन्होंने नूह या लूत की नहीं सुनी‚ और वे सब नष्ट हुये।

अब हम इन दो प्रकार के समूह के लोगों को देखेंगे और पायेंगे कि क्यों वे न्याय के लिये तैयार नहीं थे। किंतु मुझे सर्वप्रथम यह सिखाना चाहिये कि परमेश्वर‚ नाराजगी व न्याय का परमेश्वर है। मैं जानता कि आज भी लोग यह विश्वास नहीं करते हैं। वे अक्सर कहते हैं‚ “मैं तो यह नहीं मानता कि हमारा परमेश्वर न्याय करने वाला परमेश्वर है ।” पर इससे कोई फर्क नहीं पडता कि वे क्या विश्वास करते हैं। परमेश्वर हमारी कल्पनाओं का उत्पाद नहीं है। परमेश्वर हमसे बाहर मौजूद सत्ता है। आप उसे मानो या न मानो वह तो अस्तित्व में है। इसलिये इससे कोई फर्क नहीं पडता “कि आप उसे न्याय करने वाला परमेश्वर” नहीं मानते है। चूंकि ईश्वर का अस्तित्व इस बात पर निर्भर नहीं करता है कि आप जो विश्वास करते हैं‚ आप जो सोचते हैं उससे उसमें कुछ परिवर्तित होता है! मान लीजिये कि आपने कहा‚ “मैं सनफ्रांसिस्को शहर में विश्वास नहीं करता” क्या आपके ऐसे कहने से सनफ्रांसिस्को शहर गायब जायेगा? मान लीजिये कि आपने कहा‚ “मैं सनफ्रांसिस्को शहर की र्टोली कार में विश्वास नहीं करता” तो आपके ऐसा कहने से क्या शहर से सारी कार बाहर चली जायेंगी? बेशक नहीं! और ऐसा ही परमेश्वर के साथ है। अगर आप कहते हैं कि‚ “मैं न्याय करने वाले परमेश्वर पर विश्वास नहीं करता हूं‚“ तो इससे कुछ भी नहीं बदलता। चाहे आप विश्वास रखो या न रखो‚ परमेश्वर आपके मस्तिष्क के दायरे से बाहर भी मौजूद है – चाहे आप विश्वास करो या न करो।

देखा जाये‚ नूह के समय में भी लोगों ने आपके समान ही सोचा होगा। उनके विचार में ईश्वर का कुछ अस्तित्व तो था – किंतु, आपके समान ही‚ उन्होंने भी सोचा कि वह न्याय का परमेश्वर नहीं है! और‚ आपके जैसे ही‚ वे सब गलत थे – बिल्कुल गलत! इसलिये परमेश्वर ने उन पर महाप्रलय भेजी‚ “और वे सब नष्ट हो गये” (लूका१७:२७)

ऐसा ही सदोम शहर में भी हुआ। सदोम के लोगों ने सोचा परमेश्वर उनका न्याय कभी नहीं करेगा। नूह के दिनों में लोगों ने प्रचार पर भी ध्यान देना बंद कर दिया। न ही सदोम के लोग लूत की चेतावनियों पर ध्यान देते थे। उसका स्वयं का जवाईं सोचा करता था कि वह केवल “मजाक” कर रहा है‚ इसलिये वह भी उन चेतावनियों की उपेक्षा कर देता था। किंतु ये सब लोग गलत सोचते थे। न्याय आया “और वे सब नष्ट हो गये” (लूका १७:२९)

यीशु ने पद तीस में यह चेतावनी देते‚ हुये अंत किया‚

“मनुष्य के पुत्र के प्रगट होने के दिन भी ऐसा ही होगा।“ (लूका १७:३०)

मेरा मानना है कि आज भी हम उसी समय में रह रहे हैं। कोई नहीं जानता उस घडी को जब इस पापी पीढी पर परमेश्वर का दंड आ पडेगा। किंतु जो चिंन्ह घटित हो रहे हैं वे सब इस बात के लिये आगाह करते हैं कि हम युग के समाप्त होने के बिल्कुल करीब हैं। बाईबल कहती है‚ “अपने परमेश्वर के साम्हने आने के लिये तैयार हो जा।” (आमोस ४:१२) डॉ.एड हिंडसन लिबर्टी यूनिवर्सिटी‚ कहते हैं‚

         मसीही जनसंख्या जो पहले सभ्यता पर राज्य करती थी वह अब बिखर चुकी है और शायद ही पुर्नसंगठित होगी। हम वैसे ही समाजवाद‚संबंधवाद और रहस्यवाद के रेत के ढहने वाले टीलों में खो चुके हैं....
         अब अंतिम समय के लिये अंतिम चिन्हों के लिये मंच तैयार है। परिवर्तन और विकास तेजी से हो रहे हैं और उतनी ही तेजी से हम भी इस संसार में बडी त्रासदियों की तरफ आगे बढ रहे हैं। घटनाओं का क्रम “बडी घटना” के होने का संकेत देता है (एड हिंडसन.पी.एच.डी‚फाईनल साईंस‚ हार्वेस्ट हाउस पब्लिशर्स‚ १९९६‚ पेज ६५‚ ७)

क्या आप परमेश्वर से मिलने के लिये तैयार हैं? क्या आप इस अंतिम युग में मसीह के आगमन के लिये तैयार हैं? चेलों ने यीशु से पूछा‚ “इस संसार के अंत के और आपके आने के क्या चिन्ह होंगे?” (मत्ती २४:३) यीशु ने उन्हें डांटा नहीं। बदले में उसने उन्हें कई चिंन्हो का वर्णन किया जो प्रथ्वी पर रहने वालों को अंत समय में दिखाई देंगे। मुझे यह निश्चय है कि हम इस समय उसी युग में रह रहे हैं – अभी इसी समय। यीशु ने कहा था कि यह समय बिल्कुल नूह के दिनों के समान होगा‚ जैसे महाप्रलय आने के पहले था – और लूत के समय था‚ जब परमेश्वर ने उनके उपर खतरनाक न्याय उंडेल दिया। डॉ.एम.आर.देहान ने कहा था‚

         मसीह के आगमन से संबंधित चिंन्हों की उपेक्षा करने में बहाने बनाने से कुछ नहीं होगा। बाईबल खोलकर हम तीस मिनिटों में यीशु द्वारा बताये गये वर्णन पांच अध्यायों में जो “नूह और लूत के दिनों” के विषय में कहते हैं पढ सकते हैं। वे बडी संपन्नता के दिन थे। यीशु ने कहा था कि वे खा–पी और मौज कर रहे थे.....यह पेटूपन और शराब पीने की दशा को दर्शाता है। अगर उन दिनों का कोई दोहराव है‚ तो वह अभी वर्तमान का युग है; नूह व लूत के दिनों से भी कहीं अधिक बढकर‚ आज के दिनों में “पेटूपन और शराब” अपनी चरम सीमा पर है।
         यीशु नूह व लूत के दिनों की एक और बात का वर्णन करते हैं...और वह है सैक्स की कुरूपता...हम इसे आज के आधुनिक युग से जोडकर देख सकते हैं। एक पीढी में तो हमने परिवार में पवित्र संबंधो को देखा है...किंतु अगली पीढी में‚ अनैतिकता सिर पर चढ कर बोलने लगी‚ तलाक की दर दुगुनी‚ तिगुनी और चौगुनी हो गई...यह अनैतिक अवैध संबंध (सदोम)...में परमेश्वर का दंड लाये...जैसे कि परमेश्वर के पुत्र और मनुष्यों की पुत्रियों ने महाप्रलय के पहले अनुचित सहवास किया था।
          (एम.आर.देहान‚ एम.डी.‚दि डेज आँफ नोहा‚ जोंडरवन पब्लिशिंग हाउस‚१९६३‚ पेज ८०–८२)

मैं आपको याद दिलाना चाहता हूं कि यीशु ने क्या कहा‚

“जैसा नूह के दिनों में हुआ था...जैसा लूत के दिनों में हुआ था... मनुष्य के पुत्र के प्रगट होने के दिन भी ऐसा ही होगा।” (लूका १७‚२७‚२८‚३०)

मसीह ने मसीह को अस्वीकार करने वाली ईश्वर रहित पीढी के बारे में पहले से बता दिया था कि उन पर भयानक दंड पडेगा। मसीह ने कहा‚

“क्योंकि उस समय ऐसा भारी क्लेश होगा, जैसा जगत के आरम्भ से न अब तक हुआ, और न कभी होगा। और यदि वे दिन घटाए न जाते, तो कोई प्राणी न बचता; परन्तु चुने हुओं के कारण वे दिन घटाए जाएंगे..” (मत्ती २४:२१‚२२)

बाईबल कहती है जब क्लेश के दिन होंगे तब परमेश्वर का न्याय संसार पर सात आपदाओं के रूप में (सात कटोरों) उंडेला जायेगा। यह प्रकाशितवाक्य के सोलहवें अध्याय में बताया गया है (एन ए एस बी)‚

सो पहिले ने जा कर अपना कटोरा पृथ्वी पर उंडेल दिया। और उन मनुष्यों के जिन पर पशु की छाप थी‚ और जो उस की मूरत की पूजा करते थे‚ एक प्रकार का बुरा और दुखदाई फोड़ा निकला। (पद २)

और दूसरे ने अपना कटोरा समुद्र पर उंडेल दिया और वह मरे हुए का सा लोहू बन गया‚ और समुद्र में का हर एक जीवधारी मर गया। (पद ३)

और तीसरे ने अपना कटोरा नदियों‚और पानी के सोतों पर उंडेल दिया‚ और वे लोहू बन गए। (पद ४)

और चौथे ने अपना कटोरा सूर्य पर उंडेल दिया‚ और उसे मनुष्यों को आग से झुलसा देने का अधिकार दिया गया। और मनुष्य बड़ी तपन से झुलस गए। (पद ८‚९) और पांचवें ने अपना कटोरा उस पशु के सिंहासन पर उंडेल दिया और उसके राज्य पर अंधेरा छा गया; और लोग पीड़ा के मारे अपनी जीभ चबाने लगे। (पद १०)

और छठवें ने अपना कटोरा बड़ी नदी फुरात पर उंडेल दिया और उसका पानी सूख गया कि पूर्व दिशा के राजाओं के लिये मार्ग तैयार हो जाए। (पद १२)

और उस बड़े नगर के तीन टुकड़े हो गए, और जाति जाति के नगर गिर पड़े, और बड़ा बाबुल का स्मरण परमेश्वर के यहां हुआ, कि वह अपने क्रोध की जलजलाहट की मदिरा उसे पिलाए। और आकाश से मनुष्यों पर मन मन भर के बड़े ओले गिरे, और इसलिये कि यह विपत्ति बहुत ही भारी थी, लोगों ने ओलों की विपत्ति के कारण परमेश्वर की निन्दा की। (पद १९‚२१)

“क्या लोग प्रायश्चित करेंगे? नहीं! प्रायश्चित करने के लिये बहुत देर हो चुकी होगी!” (प्रकाशितवाक्य १६:१२) बाईबल कहती है‚

“क्योंकि तुम आप ठीक जानते हो कि जैसा रात को चोर आता है वैसा ही प्रभु का दिन आने वाला है। जब लोग कहते होंगे, कि कुशल है और कुछ भय नहीं तो उन पर एकाएक विनाश आ पड़ेगा जिस प्रकार गर्भवती पर पीड़ा और वे किसी रीति से बचेंगे।” (१थिस्सलुनिकियो ५:२–३)

केवल सच्चे मसीही, जिन्होंने वास्तविक मन परिवर्तन का अनुभव किया है, उनके लिये आशा है कि वे इन भयानक घटनाओं के होने के पहले ही उठा लिये जायेंगे। किंतु ''नामधारी'' मसीही पीछे छोड दिये जायेंगे। मसीह उनसे कहेगा, ''मैं तुम्हे नहीं जानता,'' (मत्ती २५:१२)

हम अक्सर इन विषयों पर प्रचार सुना करते हैं। किंतु, अजीब बात यह है कि अभी कुछ सालों से इन विषयों पर चुप्पी है। बिलीग्राहम ने १९६९ में कहा था,

बाईबल यह शिक्षा देती है कि युग के अंत में क्लेश, युद्ध, बर्बादी, अराजकता, अनैतिकता इतने दर्जे तक बढ जायेंगे कि ईश्वर को बीच बचाव करना होगा.....न्यूजीलैंड में मानवतावादी संगठन ने हमारे क्रूसेड का विरोध करते हुये, तख्तियां लिये हुये, यह कहते हुये विरोध किया कि (''बिलीग्राहम आपको डराने न पाये'' बिलीग्राहम, ''दि डे टू कम'' दि चैलेंज: सर्मन्स फ्राम मेडीसन स्क्वेयर गार्डन, डबल डे एंड कंपनी, ९६९,पेज १६४)

अपने मरने के थोडे समय पहले ही एक इवेंजलीकल लीडर ने मेरे परिवार व मुझसे कहा कि उस समय बिलीग्राहम का प्रचार बहुत “चौकाने वाला” होता था। हां‚ ऐसा ही था‚ परन्तु आज ऐसे प्रचारक कहां है? अधिकतर प्रचारक तो इतने डरपोक हैं कि वे लोगों से आने वाले दंड व नरक की ज्वाला के दंड के विषय में बात ही नहीं करते एक आदमी ने मुझसे कहा कि मैं एक पुराने फैशन का आदमी हूं‚ जैसे कि कोई डायनासोर‚ जबकि मुझे जोएल आँस्टन के समान‚ नरम संदेश देने वाला होना चाहिये‚ और यहां तक कि और भी प्राचीन‚ मूलभूत प्रचारकों को ऐसे कानों को मधुर लगने वाले संदेश देना चाहिये। मैंने उस व्यक्ति को दूसरा तीमुथियुस ४:२–४ से जवाब दिया

“कि तू वचन को प्रचार कर; समय और असमय तैयार रह‚ सब प्रकार की सहनशीलता‚ और शिक्षा के साथ उलाहना दे‚ और डांट‚ और समझा। क्योंकि ऐसा समय आएगा‚ कि लोग खरा उपदेश न सह सकेंगे पर कानों की खुजली के कारण अपनी अभिलाषाओं के अनुसार अपने लिये बहुतेरे उपदेशक बटोर लेंगे। और अपने कान सत्य से फेरकर कथा–कहानियों पर लगाएंगे।” (२तीमुथियुस ४:२–४)

इसमें जरा भी आश्चर्य नहीं कि हमारे चर्चेस खोये हुये लोगों से भरे हुये हैं! पास्टर्स भी पुराने प्रचारकों के समान नहीं रहे और वे भी इतने प्राचीन धर्म का प्रचार करने से डरते हैं!

मुझको परमेश्वर ने जो काम सौंपा है उसमें बाईबल की एक के बाद एक आयत को समझाना नहीं है। मेरा कार्य है ''वचन प्रचार करना।'' या तो लोग इसे ग्रहण करें अथवा छोड दें! मैंने तो आपको वह वचन दिया है जो बाईबल कहती है!

“जैसा नूह के दिनों में हुआ था...जैसा लूत के दिनों में हुआ था... मनुष्य के पुत्र के प्रगट होने के दिन भी ऐसा ही होगा।” (लूका १७‚२७‚२८‚३०)

अगर यह बात आपके लिये ''चौकाने'' वाली है, तो परमेश्वर आपकी मदद करे! जब न्याय दंड आयेगा तो आप मुसीबत में पड जायेंगे!

अब, आपको करना यह है कि आप आने वाले दंड से बचे? आपको बिल्कुल वही करना है जो लूत और नूह ने किया!

परमेश्वर ने लूत को सदोम से भाग जाने को कहा। परमेश्वर ने कहा, '' तब उसने कहा अपना प्राण ले कर भाग जा पीछे की और न ताकना .......नहीं तो तू भी भस्म हो जाएगा।” (उत्पत्ति १९:१७) अगर आपको बचाये जाने की आशा है, तो आपको सर्वप्रथम यह करना चाहिये। ईश्वर विहीन जीवन से बाहर निकल कर आइये। परमेश्वर कहता है, ''इसलिये प्रभु कहता है, कि उन के बीच में से निकलो और अलग रहो; और अशुद्ध वस्तु को मत छूओ, तो मैं तुम्हें ग्रहण करूंगा।” (२कुरंथियों ६:१७) उनसे दूर रहो जो चर्च नहीं जाते। उनसे दूर रहो जो पाप में ही जीवन व्यतीत कर रहे हैं और ईश्वर का कोई विचार उनके मनों में न हो। यही लूत को करना पडा, और यही आपको करना होगा। इस पापी संसार की संगति से अलग होइये, जब चर्च खुला रहे तब हर बार चर्च में आईये! चर्च में नये मित्रों का घेरा बनाइये!

किंतु यही सब कुछ नहीं है! आपको वह भी करना होगा जो नूह ने किया था। परमेश्वर ने नूह से कहा,

“ तू अपने ...... सारे घराने समेत जहाज में जा” (उत्पत्ति ७:१)

“तब परमेश्वर ने नूह से कहा, सब प्राणियों के अन्त करने का प्रश्न मेरे साम्हने आ गया है; क्योंकि उनके कारण पृथ्वी उपद्रव से भर गई है, इसलिये मैं उन को पृथ्वी समेत नाश कर डालूंगा।” (उत्पत्ति ६:१३)

“ तू अपने ...... सारे घराने समेत जहाज में जा” (उत्पत्ति ७:१)

यह जहाज एक प्रतीक है, मसीह की, एक तस्वीर है। मसीह के पास आइये। मसीह ने कहा, ''मेरे पास आओ'' (मत्ती ११:२८) नूह इसी तरह पूरे परिवार के साथ भीतर आया - और वह उस भयानक दंड से बच गया। आपको भी संपूर्ण रूप से आना चाहिये - मसीह के पास। मसीह अपने लहू से आपको सब पापों से आपको शुद्ध करेगा, उस लहू से जो उसने क्रूस पर बहाया। विश्वास रखकर संपूर्ण रूप से मसीह के पास आइये! वह मरने वालों में से जीवित उठा था। वह आपको शाश्वत जीवन देगा - और आने वाले गुस्से से बचायेगा।

पाप पीछे छोड दीजिये, जैसे लूत ने किया। मसीह में आइये, जेसे नूह जहाज में सवार हो गया था। परमेश्वर आपकी आत्मा को जाग्रत करे और अपने नजदीक खींच कर लाये!

अगर आप अपने बचाये जाने के बारे में और सच्चे मसीही बनने के विषय में बात करना चाहते हैं, तो अपना स्थान छोडकर आँडिटोरियम के पिछले हिस्से में आ जाईये। डॉ.कैगन आपको दूसरे कमरे में ले जायेंगे जहां हम दुआ कर सकते हैं डॉ.चॉन, आपसे निवेदन है कि आप दुआ करें कि कोई आज सुबह यीशु पर ईमान लाये। आमीन।

(संदेश का अंत)
आप डॉ0हिमर्स के संदेश प्रत्येक सप्ताह इंटरनेट पर पढ़ सकते हैं क्लिक करें
www.realconversion.com अथवा www.rlhsermons.com
क्लिक करें ‘‘हस्तलिखित संदेश पर।

आप डॉ0हिमर्स को अंग्रेजी में ई-मेल भी भेज सकते हैं - rlhymersjr@sbcglobal.net
अथवा आप उन्हें इस पते पर पत्र डाल सकते हैं पी. ओ.बॉक्स 15308,लॉस ऐंजेल्स,केलीफोर्निया 90015
या उन्हें दूरभाष कर सकते हैं (818)352-0452

ये संदेश कॉपी राईट नहीं है। आप उन्हें िबना डॉ0हिमर्स की अनुमति के भी उपयोग में ला सकते
 हैं। यद्यपि, डॉ0हिमर्स के समस्त वीडियो संदेश कॉपीराइट हैं एवं केवल अनुमति लेकर
ही उपयोग में लाये जा सकते हैं।

संदेश के पूर्व धर्मशास्त्र पढा गया मि.ऐबेल प्रुद्योमें: २ पतरस ४:९
संदेश के पूर्व एकल गाना गाया गया। मि.बैंजामिन किन्केड गिफिथ:
“इन समय के समान ”( रूथ केय जोंस‚१९०२–१९७२)