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स्वर्ग की झलक

A GLIMPSE OF HEAVEN
(Hindi)

द्वारा डॉ.आर.एल.हिमर्स
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

रविवार की संध्या‚ २३ फरवरी २०१४ को लॉस एंजीजिस के दि बैपटिस्ट टेबरनेकल में प्रचार किया गया संदेश
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord’s Day Evening, February 23, 2014

“और वे नया गीत गाने लगे‚ कि तू इस पुस्तक के लेने और उस की मुहरें खोलने के योग्य है क्योंकि तू ने वध होकर‚ अपने लहू से हर एक कुल‚ और भाषा ‚और लोग‚ और जाति में से परमेश्वर के लिये लोगों को मोल लिया है।” (प्रकाशितवाक्य ५˸९)


मेरी आत्मा करती है! मैं छोटा लडका बनकर एरिजोना जाउं! मेरी मां के पास पुराने मॉडल की एक फोर्ड कार थी। वह उसमें सारी चीजें पैक करके रख देती‚ वह और मैं‚ और मेरा दोस्त चक हम तीनों मिलकर सैर को निकल जाते। हम रेडलैंडस में रूकते और पेप्सी पीते। वे १९४० के बडे अच्छे दिन थे। ५०वीं सदी में उन्होंने पेप्सी का स्वाद बदल दिया। तब पेप्सी बाजार से बाहर हो गई,और हम लॉस एंजीलिस से बाहर हो गये! हम हमेशा दोपहर बाद निकला करते थे- जब हम रेडलैंड से रवाना होते सूरज डूबने की तैयारी कर रहा होता, और हम गाना शुरू कर देते थे। उन ६० वर्षो पहले की बातें याद करना, ऐसा लगता था कि हम फिनिक्स पहुंचने तक रास्ते भर गाते ही रहते! मां रात में गाडी चलाती थी क्योंकि उनकी पुरानी कार में एअर कंडीशनर नहीं होता था। मुझे एरिजोना की वे सब रात की यात्रायें बडी अच्छी लगती थी! मेरे भयावह व सुनसान बचपन के वे कुछ चंद मीठे लम्हें हुआ करते थे! आज भी कभी मां की वह आवाज सुनाई देती है, जो कहती है- ''चलो, रॉबर्ट! आज रात हम फिनिक्स जा रहे हैं!'' वाह! कितनी अच्छी बात होती थी! हम गंदे,काले धुंए वाले, उदास करने वाले लॉस एंजीलिस शहर से बाहर जा रहे होते थे! हम निकल पडते थे - ऐरिजोना के रेगिस्तान में, कैक्टस और जोशुआ पेडों के मध्य होते हुए, जैकरेबिटस,क्वेल, कॉइटेस, व दौडते भागते जंतुओं के बीच से होते हुये वह यात्रा बहुत मजा देती थी! हम बर्नाड रोअर का चिडिया वाला फार्म देखते ग्रेप सोडा पीते और डोनॉल्ड डक की कॉमिक्स पढते हुए जाते! हमें लगता कि हम जैसे उनकी पुरानी पिक्चर देख रहे हों - ''हम तो जादू देखने जा रहे हैं! वाह, वह जादूगर कितने जादू दिखाता है! मेरा दिल खुशी से झूमने लगता था जब मां कहती‚ “चलो रॉबर्ट‚ हम आज रात ऐरीजोना जा रहे हैं!”

जब मैं बाद में ऐरीजोना गया तो वह पहले जैसा नहीं था। उसका आकर्षण खो गया था। मेरी बडी इच्छा थी ऐरीजोना जाने की‚ किंतु जब मैं वापस गया तो मुझे दूसरी जगहों जैसा ही लगा। तब मैंने यह सोचा कि इस दुनिया में कोई भी ऐसी चीज नहीं है जो आपके दिल को संतुष्ट कर सकती है। आप देख रहे हैं‚ आप देख रहे हैं - मैं सचमुच ऐरीजोना जाने की इच्छा नहीं कर रहा था। मैं तो स्वर्ग जाने की इच्छा कर रहा था! स्क्वायर पार्सन्स ने अपने गाने में इसी भावना को व्यक्त किया है जो गाना अभी मि. गिफिथ ने गाया‚

मैं उस देश की चाह रखता हूं
   जहां पहले कभी नहीं गया;
वहां कोई उदास अलविदा नहीं कहता‚
   वक्त का कोई जोर वहां नहीं चलता।
हे स्वर्गिक देश‚ मुझे तेरी चाह है‚
   किसी दिन‚ मैं तेरे भीतर प्रवेश करूंगा‚
वह मेरा शाश्वत घर होगा‚
   हे स्वर्गिक देश‚मधुर स्वर्ग।
(“मधुर स्वर्ग‚” द्वारा स्क्वायर पार्सन्स‚१९४८)

कितना आनंद आयेगा‚ कितना अदभुत और उत्तेजनापूर्ण होगा − जब यीशु कहेगा‚ “चलो रॉबर्ट‚ आज रात हम स्वर्ग जा रहे हैं!”

मैं अब उस नदी के पार देखता हूं
   जहां मेरे विश्वास का अंत होगा;
अब और थोडे दिन हैं काम के‚
   उसके बाद मैं स्वर्ग चला जाउंगा।
हे स्वर्गिक देश मुझे तरी बडी चाह है‚
   थोडे दिन और है यहां फिर मैं वहां हूंगा।
मेरा शाश्वत घर जहां मैं पहुंचुंगा‚
   हे स्वर्गिक देश मधुर स्वर्ग।

उस चमकीले शहर में! मेरे साथ गाइये!

उस चमकीले शहर में श्वेत मोतियों के शहर में‚
   मेरा एक घर है एक वस्त्र और एक मुकुट;
अब मैं देख रहा हूं राह तक रहा हूं बडी चाह है मेरी‚
   उस श्वेत शहर को पहुंचुं जिसे यहन्ना ने उतरते देखा था।
(“मोतियो का श्वेत शहर”लेखक आर्थर इंगले १९०२)

१॰ प्रथम चलिये देखते हैं स्वर्ग में क्या होगा।

मि॰प्रदोमे ने इब्रानियों १२˸२२−२४ आपके सामने पढा। यह उद्धरण हमें स्वर्ग की चीजों के बारे में बताता है। मैं उसे फिर पढूंगा।

“पर तुम सिययोन के पहाड के पास‚ और जीवते परमेश्वर के नगर‚ स्वर्गीय यरूशलेम के पास‚ और लाखों स्वर्गदूतों‚ और उन पहिलौठों की साधारण सभा‚ और कलीसिया जिन के नाम स्वर्ग में लिखे हुए हैं‚ और सब के न्यायी परमेश्वर के पास और सिद्ध किए हुए धर्मियों की आत्माओं और नई वाचा के मध्यस्थ यीशु, और छिडकाव के उस लोहू के पास आए हो जो हाबिल के लहू से उत्तम बातें कहता है।” (इब्रानियों १२−२२˸२४)

२२ वीं आयत बताती है कि बिल्कुल यह ही स्वर्ग की तस्वीर है। वह इसे तीन नामों से पुकारता है। यह “सिययोन पर्वत” कहलाता है। यह “जीवते परमेश्वर का नगर” कहलाता है। और‚ जिसे हम समझते हैं वह इसे “स्वर्गीय यरूशलेम” कहता है।

फिर वह स्वर्ग में पायी जाने वाली बातों की सूची देता है। पहली बात वहां “लाखों स्वर्गदूतों की संगति” होगी। मैं मानता हूं कि वहां सारे समय‚ हमारे आसपास स्वर्गदूत होंगे, जो हमारे मार्गदर्शक होंगे हमारी रक्षा करेंगे। किंतु अधिकतर समय वे हमारी आंखों के सामने से ओझल रहेंगे। मेरा मानना है कि मैंने एक बार एक स्वर्गदूत देखा था। वह एक ही स्वर्गदूत था‚ और मैंने उसे एक बार ही देखा था। किंतु स्वर्ग में तो हम “लाखों” स्वर्गदूतों की सभा में विचरण करेंगे, हजारों हजार स्वर्गदूत वहां होंगे। प्रकाशितवाक्य ५˸११ में हमें बताया गया है कि लाखों और करोडो की संख्या में वहां स्वर्गदूत होंगे यह तो स्वर्गदूतों की बडी अदभुत संगति होगी! आप उन्हें देख सकोगे! आप उनमें से कुछ से बात भी कर सकोगे। वो कितना अदभुत दिन होगा! कितना मनोहर समय होगा! मैं उस समय की राह देख रहा हूं!

उसके बाद हमें बताया गया है कि “उन पहिलौठों की साधारण सभा और कलीसिया जिन के नाम स्वर्ग में” लिखे हुए हैं वे वहां मौजूद रहेंगे( इब्रानियों १२˸२३) बाईबल में‚लगभग जितनी भी “कलीसिया” के संदर्भ दे रखे हैं वे स्थानीय चर्च स्थानीय कलीसिया, जैसे हमारी भी है के बारे में कहा जाता है। किंतु मेरा मानना है कि यह वैश्विक कलीसिया के लिये कहा गया है। प्रत्येक मसीही सदियों तक वहां निवास करेगा। वे लोग जिनके नाम ''स्वर्ग में लिखे हुये” हैं − मेमने के पास रखी जीवन की पुस्तक में लिखे हुये हैं! वे सब वहां होंगे- सारे प्रेरित समस्त शहीद; जो रोमियों के शासन में शेरों के द्वारा टुकडे टुकडे कर दिये गये थे; सारे विश्वसनीय संत‚ उनमें से कई जो मध्य युग में प्रताडित किये गये थे; सारी परिवर्तित आत्मायें जो महान जाग्रति के कारण उत्पन्न हुई थी; सारे मिशनरी; सारे विश्व के मन फिराए हुये लोग; हर युग के महान प्रचारक; कम्यूनिस्टों व २०वीं सदी में मुस्लिमों द्वारा मार डाले गये शहीद लोग; वे सब वहां होंगे! हेनरी अल्फोर्ड ने बहुत अच्छा कहा है (१८१०−१८७१)‚

लाखों करोडो आत्मायें चमक रही होंगी‚
   संतो की सेनाये उस उजली रोशनी में मुखर होगी;
पूरा हुआ सब पूरा हुआ‚ पाप व मौत से लडाई पूरी हुई;
   अब स्वर्ग का सुनहरा द्वार चौडा खुला हुआ है‚ सब
विजयी लोग भीतर जायेंगे।
   (लाखों करोडो हेनरी अल्फोर्ड द्वारा रचित१८१०−१८७१)

“परमेश्वर जो सब का न्यायी है” वह भी वहां होगा (इब्रानियों१२˸२३) अगर परमेश्वर वहां नहीं है तो स्वर्ग भी वहां नहीं है! मैं नहीं मानता कि हम परमेश्वर को सीधे देखेंगे। भजन १०४˸२ में लिखा है कि परमेश्वर स्वयं “उजियाले की चादर” ओढे रहता है। बाईबल कहती है‚ “परमेश्वर को किसी ने कभी नहीं देखा” (यूहन्ना१˸१८) मैं मानता हूं स्वर्ग में भी ऐसा ही होगा। हम उसके चारों ओर उजियाला देखेंगे‚ पर हम स्वयं पिता परमेश्वर को कभी नहीं देख पायेंगे। यद्यपि हमें कहा गया है कि वह स्वर्ग में अवश्य होगा।

“धर्मियों की आत्मा जो सिद्ध की गई” वे भी वहां होंगी। डॉ॰मैगी ने कहा था कि “पुराने नियम के संत लोगों का उद्धार भी स्वर्ग में पूरा किया गया जब मसीह संसार के लोगों के पाप के दंड चुकाने के लिये मरा वह मेमना जो जगत के पाप उठा ले गया'' (जे.वर्नान मैगी टीएचडी‚ थू दि बाईबल ‚थॉमस नेलसन पब्लिशर्सवॉल्यूम ५‚१९८३, पेज ६०८; इब्रानियों पर व्याख्या १२˸२३) पुराने नियम का प्रत्येक संत स्वर्ग में होगा! आदम और हवा वहां होंगे, मेमने के लहू से साफ किये हुये; हाबिल वहां होगा। एनोश‚ नूह‚ अब्राहम‚ सारा‚ इसहाक‚ याकूब‚ युसुफ‚ मूसा‚ यहोशु‚ गिदोन‚ बराक‚ सेमसन‚ येप्तह‚ और दाउद‚ शमुएल‚ और सारे दर्शी वहां होंगे! वह कितना महान दिन होगा जब हम इन सब को स्वर्ग में देखेंगे!

और हमें यह भी बताया गया है कि “नई वाचा का मघ्यस्थ यीशु” भी वहां होगा (इब्रानियों १२˸२४) अगर यीशु वहो नहीं तो वह स्वर्ग नहीं कहलायेगा। हम यीशु को देखने जा रहे हैं!

एक अनाडी डॉक्टर ने जब वह शिशु ही थी उसकी आंखो में जहर उंडेल दिया। वह जीवन भर के लिये अंधी हो गयी। किंतु फैनी क्रासबी ने अपने मधुर गीतों में यह लिखा है˸

मैं जब उस पार पहुंचुंगी मैं मेरे मुक्तिकर्ता को जानूंगी‚
   उसकी मुस्कुराहट पहले मेरा स्वागत करेगी।
मैं उसे जानूंगी ‚मैं उसे जानूंगी‚
   छुटकारा पाये हुये मैं उसके साथ खडी रहूंगी‚
मैं उसे जानूंगी‚ मैं उसे जानूंगी
   उसके हाथों में कीलों के निशान से।
(“सबसे पहले मेरा मसीहा” फैनी क्रासबी१८२०−१९१५)

और तब एक ओर बात स्वर्ग में मिलेगी - ''और छिडकाव के उस लहू के पास आए हो, जो हाबिल के लहू से उत्तम बातें कहता है” (इब्रानियों १२:२४) डॉ. मैगी ने बताया कि, ''हाबिल का लहू बदले के लिये चिल्ला उठा था, किंतु मसीह का लहू उद्धार की बातें कहता है'' (मैगी, संदर्भ) बेशक छिडकाव का लहू वहां है! मसीह के बेशकीमती लहू के बिना स्वर्ग नहीं रहेगा।

डॉ.डब्ल्यू.ए. किसवेल ने यूनानी नये नियम में उनकी पी.एच.डी. की। वह फस्र्ट बैपटिस्ट चर्च डलास, टेक्सास के महानतम प्रचारकों में से एक प्रचारक रहे‚ जिन्होंने ६० वर्षों तक अपनी सेवायें दी। बिलीग्राहम उन्ही के चर्च के सदस्य थे। डॉ.किसवेल ने स्वर्ग में यीशु के लहू के विषय में कहा,

हमारे प्रभु ने महापवित्र स्थान में लहू लिये हुये प्रवेश किया, वह लहू बकरे व बैलों का लहू नहीं था, अपितु स्वयं अपना लहू लिये हुये हमारे पापों के बदले दंड चुकाया... स्वर्गो के स्वर्ग में, सदियों से अनादि काल तक के लिये जहां परमेश्वर है, हमारे मसीह को चढावे का लहू, बलिदान स्वरूप एवं क्षमा के बदले लेकर प्रवेश करना था, और वह उस पवित्र स्थान को पवित्र करता है मानो हम वहां हैं....। मसीह ने स्वर्ग में प्रवेश करके महापवित्र स्थान के परदे के पीछे अपने लहू को चढाया। आखिर, हम पापी आदमी व स्त्रियां, किस प्रकार परमेश्वर के निवास स्थान में प्रवेश कर सकते हैं? हम प्रभु के लहू के बलिदान चढाये जाने के कारण स्वर्ग में प्रवेश कर सकते हैं (डब्ल्यू.ए.किसवेल, पी.एच.डी., ग्रेट डॉक्टरीन्स आँफ दि बाईबल, वाल्यूम २, संपादन द्वारा पेटरसन, जोंडरवन पब्लिशिंग हाउस, १९८२, पेज १९४-१९६)

मैं नहीं जानता कि कितने लोगों को यूनानी बाईबल और इब्रानियों पढकर मौखिक प्रेरणा मिलती है, और वे परमेश्वर के अचूक वचन में से, इन शब्दों को कभी उडा भी देते हैं, ''और लहू के छिडकाव द्वारा।'' राजा यहोयाकीम ने अपने दास से परमेश्वर के वचन की पुस्तक को चाकू से काटने और आग में डालने के लिये कहा। ''तब उस ने उसे चाकू से काटा और जो आग अंगीठी में थी उस में फेंक दिया'' (यिर्मयाह३६˸२३) मेरे अजीज भाई, प्रचारक, आर.बी.थेम या जॉन मेक आर्थर इस प्रेरित अध्याय के इन शब्दों को कभी काटने न पाये! ''और लहू के छिडकाव दवारा''- जिसके द्वारा मुहर लगी है और सब कुछ हमेशा के लिये चुका दिया गया है! सनातन काल तक, के लिये, यह महापवित्र स्थान में मौजूद है; सिययोन पर्वत पर, जीवित परमेश्वर के शहर में, उस स्वर्गीय यरूशलेम में यीशु के “पवित्र लहू का छिडकाव है!”

कुछ लोग मुझसे कहते हैं, ''आप क्यों कर्नल थेम और जॉन मेकआर्थर की लहू की शिक्षा के उपर बोलते रहते हैं? छोडिये उन्हें! जाने दीजिये!'' किंतु, आप जानते हैं, मैं उन्हे ऐसे ही नहीं छोड सकता। इन लोगों ने हजारों प्रचारकों को प्रभावित किया है! किया है! पिछली बार कब आपने मसीह के लहू के उपर पूरा संदेश सुना था? पिछली बार कब आपने मसीह के महान ''रक्त'' का गीत गाया था? पिछली बार कब आपकी कलीसिया ने ''केवल यीशु का लहू,'' या ''यीशु के रक्त से बचाया गया' या ''यीशु के रक्त में सामर्थ है'' या ''जब मैं लहू देखता हू,'' या ''इम्मानुएल के लहू से एक सोता बहता है,'' जैसे गीत गाये थे?

मुझे पूरा निश्चय है कि डॉ.मैकआर्थर ने मसीह के बेशकीमती लहू की अवज्ञा करना कर्नल आर.बी.थेम से सीखा है। मैं,१९६१ में, उन सभाओं में था। थेम को बायओला यूनिवर्सिटी में बोलने से वंचित कर दिया गया था क्योंकि लहू के उपर उनके वक्तव्य असामान्य थे। तब उन्होंने एक स्कूल के आँडिटोरियम में सभा की। हम बायओला यूनिवर्सिटी के छात्र उत्सुकतावश उनको सुनने गये। मैं देख रहा था थेम हर रात मसीह के लहू की उपेक्षा करते और डॉ.मेकआर्थर हर रात उनके संदेशो से नोटस तैयार करते। जब मैंने डॉ.मैकआर्थर के कथन पढे, तो वे मुझे सीधे, उस अजीब आदमी, कर्नल थेम के संदेश से लिये हुये प्रतीत हुये।

मैं जानता हूं जब तक मसीहा के लहू को प्रचारक सम्मान नहीं देंगे तब तक महान जाग्रति आ ही नहीं सकती। डॉ.मार्टिन ल्यॉड-जोंस का जाग्रति के उपर बडा प्रभुत्व था, और उन्होंने कहा था,

     आत्मिक जाग्रति के हर काल में, बिना किसी अपवाद के, मसीह के लहू के उपर बहुत जोर दिया जाता था...बेशक, मैं यह अच्छी तरह जानता हूं कि जब मैं ऐसी बातें कह रहा हूं तो इसका यह अर्थ है कि अभी इस समय प्रचारक अपने संदेश में ऐसा नहीं कर रहे हैं। ऐसे मसीही प्रचारक भी हैं जो अपने आपको समझदार समझते हुये मसीह के लहू की बातों को नजर अंदाज कर देते हैं। वे तिरस्कारपूर्ण रीति से इसे खारिज कर देते हैं (किंतु) जब तक क्रूस पर बहाये लहू का अपमान होगा तब तक मनुष्यों में आत्मिक जाग्रति नहीं आयेगी, और जिस पर हमें घमंड करना चाहिये हम उसका उपहास उडाते रहेंगे (मार्टिन ल्यॉड- जोंस, एम.डी., रिवाइवल, क्रासवे बुक्स,१९८७, पेज ४८‚४९)

इम्मानुएल के लहू से
   एक सोता बहता है और;
जिसमें डूबते पापी लोग‚
   रंग पाप का छूटता है।
(''इम्मानुएल के लहू से'' विलियम काउपर, १७३१−१८००)

मेरे अजीज मसीही मित्रों, आप ये सब अदभुत व पवित्र चीजें जब सिययोन पर्वत‚ पर पहुंचेंगे तब देखेंगे, वहां जहां जीवित परमेश्वर का निवास है, स्वर्गीय यरूशलेम में! और मसीह के लहू से बढकर कुछ भी नहीं होगा!

प्यारे मरते हुये मेमने, आपका कीमती लहू
   कभी अपनी सामर्थ न खोयेगा,
जब तक मसीह की पूरी कलीसिया
   बचायी न जायेगी, पाप भी न रहेगा और।
(''इम्मानुएल के लहू से'' विलियम काउपर, १७३१−१८००)

२. दूसरा, मैं चाहता हूं कि आप देखें कि हम इन बातों में से एक स्वर्ग में कर रहे होंगे।

अब, हम, हमारे दूसरे बिंदु पर आते हैं, जो हमारा दूसरा उद्धरण है। निवेदन है कि प्रकाशितवाक्य ५˸९ खोलकर पढिये।

''और वे यह गीत गाने लगे, कि तू इस पुस्तक के लेने और उस की मुहरें खोलने के योग्य है; क्योंकि तू ने वध होकर अपने लहू से हर एक कुल, और भाषा, और लोग, और जाति में से परमेश्वर के लिये लोगों को मोल लिया है।’’ (प्रकाशितवाक्य ५˸९)

हम २४ प्राचीनों को देखते हैं, जो स्वर्ग में सब मसीहियों के नुमाइंदे हैं। ''और वे यह नया गीत गाने लगे।'' मैं पद ८ में किताब के खुलने के बारे में नहीं बोलूंगा। मैं इस प्रमुख बिंदु पर विचार रखूंगा कि हम स्वर्ग में कौन सा नया गीत गायेंगे।

“.......क्योंकि तू ने वध होकर अपने लहू से हर एक कुल, और भाषा, और लोग, और जाति में से परमेश्वर के लिये लोगों को मोल लिया है” (प्रकाशितवाक्य ५˸९)

स्वर्ग में, अनगिनित मसीही जन होंगे, खरबों से भी उपर, जो मसीह की प्रशंसा में गाते रहेंगे। ''वह नया गीत'' जो नयी वाचा का गान है, मसीह के बलिदान किये लहू से छुटकारा पाने का गान है। सचमुच में‚ यह गीत यीशु के क्रूस पर मरने, व अनमोल लहू बहाने के बारे में होगा! दूसरे शब्दों में, हम प्रभु भोज के दो तत्वों के बारे में गा रहे होंगे। ''तू जो वध किया गया''- उसका क्रूसित शरीर, जो प्रभु भोज की रोटी से प्रकट किया गया। ''और लहू से मोल लिये गये'' - उसका अनमोल लहू, प्रभु भोज के कटोरे से प्रकट किया गया। अत:, मसीह का मरना प्रभु भोज में दिये जाने वाले दो तत्वों से प्रकट किया जाता है। इसलिये डॉ.मैकआर्थर सरासर गलत हैं जब वे बार बार दोहराते हैं कि यीशु का ''लहू'' ''मौत'' शब्द का पर्याय है, उसकी मौत की ''उपमा'' दी गई है। वह बिल्कुल गलत है। एक ही बात के लिये ये दो शब्द नहीं है! वे दोनों अलग अलग बातें हैं! इन दो बातों के लिये हम स्वर्ग में गीत गायेंगे जो यह बतायेगा कि उनका प्रचार सरासर गलत है,

१. ''तू जो वध किया गया,
२. ''पिता ने तेरे लहू से हमें छुटकारा दिया''

परमेश्वर का धन्यवाद हो! हल्लेलूयाह! हम क्रूस पर हमारे बदले में प्राण देने वाले प्रभु की प्रशंसा के गीत गायेंगे! हम मसीह के लहू से, हमारे पाप धोने वाले लहू के गीत गायेंगे! यीशु के नाम की जय! डॉ.मैगी ने कहा,

(हम उसके) बहाये हुये लहू की प्रशंसा स्वर्ग में गायेंगे। यहां तो कई डिनोमिनेशनल चर्चेस ने अपनी गीत की किताब में से लहू संबंधित गीत बाहर ही निकाल दिये हैं; किंतु स्वर्ग की गीत पुस्तिका में वे पुन: रखे जायेंगे। मेरा अनुमान है कि प्रभु ऐसे कुछ लोगों को स्वर्ग नहीं ले जाने वाला है क्योंकि उन्हें स्वर्ग में लहू की प्रशंसा के गीत गाने होंगे (मैगी, संदर्भ, पेज ९३७; प्रकाशितवाक्य पर टीका ५˸९−१०)

और मैं आपका ध्यान इस बात की ओर ले जाना चाहता हूं कि हम वहां खरबों स्वर्गदूतों की मंडली के, साथ गीत गायेंगे, जो मसीह के लहू से धोकर शुद्ध किये गये हैं ''हर जाति,जुबान,भाषा, देश के लोग।'' मैं खुश हूं कि वचन में लिखा है, ''हर जाति,जुबान,भाषा, देश के लोग वहां होंगे।'' अगर ऐसा नहीं कहा होता तो स्वर्ग में इतने लोग भी नहीं जा पाते, क्योंकि अमेरिकन चर्च के सदस्य तो बहुत थोडे हैं जो बचाये गये हैं! मुझे लगता है कि कितनी आश्चर्य की बात होगी कि थोडे से अमेरिकन, विशेषकर २० व २१वीं सदी के अमेरिकन, स्वर्ग की भजन मंडली में शामिल होंगे।

अमेरिकन चर्चेस ने सादे सुसमाचार को अपने दिमाग के पागलपन द्वारा हटा दिया है जिसमें लिखा है, ''तू ने वध होकर अपने लहू से परमेश्वर के लिये लोगों को मोल लिया है।'' बिना क्रूस और लहू के कोई स्वर्ग नहीं जायेगा!

कोई यह कह सकता है, ''डॉ. हिमर्स, आप मसीह के लहू पर इतना अधिक प्रचार क्यों करते हो?'' मैं उन्हे स्पर्जन का जवाब दूंगा,

     मैं लगभग, हर दूसरे दिन, किसी प्रचारक के लिये सुनता था कि, ''अरे! हमें दूसरा प्रचारक चाहिये, हम इस आदमी से तो बहुत थक गये हैं; यह तो अधिकतर समय लहू की बात करता है।'' अंतिम महान दिन, परमेश्वर इस आदमी से थक जायेगा जिसने ऐसा कहा। परमेश्वर कभी कीमती लहू की बात से थकता नहीं, न ही उसके लोग थकते हैं क्योंकि वे जानते हैं कि उनका छुटकारा इस लहू से ही हुआ है। वे तो, स्वर्ग में भी, कभी नहीं कहेंगे कि (उसका लहू) कोई भयानक शब्द है। एक नाजुक से भद्र जन ने कहा,''अरे, मुझे तो यह (लहू) शब्द ही पसंद नहीं है।'' तो हमारा प्रभु भी इन लोगों की परवाह नहीं करेगा, क्योंकि ऐसे लोग स्वर्ग जायेंगे ही नहीं। इसलिये (चिंता) न करो कि तुम्हे वहां जाकर लहू की प्रशंसा के गीत गाने होंगे। परन्तु, अगर आप कभी वहां पहुंचे, तो आपको बार बार यही पंशंसा सुनने को मिलेगी! ''उसने परमेश्वर के लिये हमें अपने लहू से मोल लिया है।'' ऐसे लोग कैसे गीत गायेंगे! ''तूने, तूने, तूने अपने लहू से हमें परमेश्वर के लिये मोल लिया है।'' वे कैसे इस सर्वनाम ''तूने'' पर जोर देकर बोलेंगे और पूरी प्रशंसा यीशु को देंगे......'' तू ने वध होकर अपने लहू से परमेश्वर के लिये लोगों को मोल लिया है।'' मसीह के लोग स्वर्ग में भी यीशु के लहू से नहीं शर्मायेंगे! (सी.एच.स्पर्जन, स्वर्गीय गायक व उनके गीत,'' दि मेट्रापोलेटिन टेबरनेकल पुलपिट, पिलगिम पब्लिकेशन्स, १९७५ पुन:मुदित, वॉल्यूम ४९ पेज ३९१)

मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि क्या आप स्वर्ग की भजन मंडली में होंगे। अगर आज रात आप दुर्घटना में मर जाते हैं तो क्या आप स्वर्ग में जाकर गीत गायेंगे? गीत गायेंगे? गीत गायेंगे? गीत गायेंगे? अगर आपके पाप लहू से धोकर साफ नहीं किये गये हैं तो आप स्वर्ग नहीं जायेंगे। केवल मसीह का लहू पाप धो सकता है! ''क्या पापों को साफ करने के लिये आप यीशु के पास गये हैं? क्या मेमने के लहू में साफ हुये हैं?'' क्या साफ हुये हैं? क्या साफ हुये हैं? क्या साफ हुये हैं? आपके पाप अगर यीशु के लहू से नहीं धोये गये हैं तो आप स्वर्ग नहीं जा पायेंगे। क्या आज रात आप यीशु के पास आयेंगे? क्या उसके लहू से इसी समय अपने पापों को धोयेंगे?

अगर आप चाहते हैं कि आपके पाप यीशु के लहू से साफ किये जायें, तो उठकर आँडिटोरियम के पीछे आईये। हम आपको दूसरे कमरे में ले जायेंगे और आपसे बातें करेंगे व आपके लिये प्रार्थना करेंगे। आमीन।

(संदेश का अंत)
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संदेश के पूर्व धर्मशास्त्र पढा गया मि.ऐबेल प्रुद्योमें: इब्रानियों १२:२२−२४
संदेश के पूर्व एकल गाना गाया गया। मि.बैंजामिन किन्केड गिफिथ:
(“मधुर स्वर्ग‚” द्वारा स्क्वायर पार्सन्स‚१९४८)
(“मोतियो का श्वेत शहर”लेखक आर्थर इंगले १९०२)


रूपरेखा

स्वर्ग की झलक

द्वारा डॉ.आर.एल.हिमर्स

“और वे नया गीत गाने लगे‚ कि तू इस पुस्तक के लेने और उस की मुहरें खोलने के योग्य है क्योंकि तू ने वध होकर‚ अपने लहू से हर एक कुल‚ और भाषा ‚और लोग‚ और जाति में से परमेश्वर के लिये लोगों को मोल लिया है।” (प्रकाशितवाक्य ५˸९)

१॰ प्रथम चलिये देखते हैं स्वर्ग में क्या होगा इब्रानियों १२:२२−२४;
प्रकाशित ५˸११; भजन १०४˸२; यूहन्ना १˸१८; यिर्मयाह ३६˸२३.

२. दूसरा, मैं चाहता हूं कि आप देखें कि हम इन बातों में से एक स्वर्ग में कर
रहे होंगे प्रकाशितवाक्य ५˸९