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अपने उद्धार

YOUR OWN SALVATION
(Hindi)

द्वारा डॉ0आर.एल.हिमर्स
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

रविवार की प्रात: 9 फरवरी 2014 को लॉस एंजिलिस के दि बैपटिस्ट टेबरनेकल में प्रचार
किया गया संदेश
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord’s Day Morning, February 9, 2014

"अपने उद्धार" (फिलिप्पयों २: १२)


पिछली रात हमारी शनिवार की संध्याकालीन प्रार्थना २:१२−१३ प्रचार कर रहा था। मैं सोचता हूं कि लगभग आप सभी उस में थे,और जो नहीं आ सके थे वे इस संदेश को www.realconversion.com पर पढ सकते हैं। पिछली रात के संदेश में मैंने सी.एच.स्पर्जन के संदेश में से कुछ उद्धरण पढे थे। उस संदेश में उन्होंने दो पदों को नहीं लेते हुये सिर्फ इस बात पर संदेश दिया जैसा पद में लिखा है ''अपने उद्धार'' मुझे लगा कि इन दो पदों का वर्णन मुझे करना चाहिये किंतु जब मैंने यह संदेश तैयार किया तब मेरे विचार पुन: स्पर्जन के संदेश पर गये जो इन दो शब्दों पर आधारित था - ''अपने उद्धार''।

पिछली रात के संदेश में कई विषय सम्मिलित थे, किंतु आज का संदेश एक ही विषय पर केंदित है, जिसका शीर्षक है ''अपने उद्धार''। मेरी प्रार्थना है कि पवित्र आत्मा आज सुबह ''अपने उद्धार'' विषय पर ध्यान करने में आपकी सहायता करे। यह साधारण सा विषय है, किंतु अति महत्वपूर्ण है - सचमुच सब बातों में सबसे अधिक महत्वपूर्ण! परमेश्वर की आत्मा आपको आपके विषय में साक्षात्कार करने का हियाव प्रदान करे। और किसी के विषय में मत सोचिये किंतु अपनी दशा को देखिये। मेरी विनती है आज सुबह आप ''अपने उद्धार'' के विषय में ही सोचेंगे और कुछ दूसरा नहीं।

१. प्रथम‚ मैं चाहता हूं कि आप ''उद्धार'' शब्द के विषय में सोंचे।

''उद्धार'' शब्द के लिये यूनानी भाषा में ''सोटेरिया'' शब्द है। इसका अर्थ है ''छुटकारा'' और ''सुरक्षित रखना'' (जॉर्ज रिकर बेरी)। यह हममें से प्रत्येक के लिये बहुत महत्वपूर्ण है। क्योंकि हम सब ने पाप किया है। हमारा पापी स्वभाव हमारे प्रथम माता पिता से आया है। और हमने सबने व्यक्तिगत तौर पर पाप किया है। एक चीनी लडके ने मुझसे एक बार पूछा था कि पाप क्या होता है। मैंने उसे उत्तर दिया,''यह वह है जिसके विषय में आप अपनी मां को नहीं बताना चाहते।'' सचमुच हम सब स्वभाव से ही पापी हैं, और हमने व्यक्तिगत रूप से पाप किये हैं।

''उद्धार'' शब्द का अर्थ है कि पाप के बोध से छुटकारा प्राप्त करना। आपने परमेश्वर का नियम तोडा था। आपके अंदर शर्म और अपराध दोष है। तो उद्धार आपको आपके किये गये पापों के अपराध बोध से मुक्ति दिलाता है। उद्धार पाने के बाद आपके पाप मसीह के रक्त से,धुल जाते हैं, शुद्ध किये जाते हैं, एकदम साफ हो जाते हैं। आपने जितने भी पाप अभी तक किये होंगे उन सभी से माफी मिल जाती है। आपकी प्रत्येक दुष्टता शुद्ध हो जाती है जो आपने अभी तक की होगी। आप परमेश्वर को ग्रहण योग्य हो जाते हो, जो महान व खतरनाक न्यायी है।

किंतु उद्धार इससे भी बढकर है। स्वभावगत आपको बुराई ही पसंद आती है। आप पाप के गुलाम बनना चाहते हैं। किंतु जब आप उद्धार प्राप्त करते हो तो पाप की विचलित करने वाली शक्ति आप पर प्रबल नहीं हो सकती। उद्धार का दूसरा पहलू यह है कि आप दुष्टता के गुलाम बने रहने से छुटकारा प्राप्त करते हो। क्या आप संसार की अभिलाषा से उत्पन्न भ्रष्टता से कभी बच निकले हो? मसीह आपको इस भ्रष्ट स्वभाव से छुटकारा दे सकता है!

उद्धार का अर्थ यह भी है कि आप परमेश्वर के गुस्से से छुटकारा पा सकते हैं, परमेश्वर का गुस्सा जो पाप पर प्रगट होता है। लोग सोचते हैं कि परमेश्वर उनके पाप से नाराज नहीं हैं। इससे उन्हें कोई असर नहीं होता। आधुनिक सोच कहती है, ''यह तुम्हारे लिये सच है, किंतु मेरे लिये नहीं'' आज युवा ऐसा ही सोचते हैं। किंतु किसी को भी यह बताना चाहिये कि आप अगर इसी तरह सोचते हैं तो आप मूर्ख हैं! ''यह तुम्हारे लिये सच है, किंतु मेरे लिये नहीं'' । यह सरासर मूर्खता है! बाईबल इस बात की अंतिम न्यायी है कि सच क्या है। बाईबल कहती है, ''परमेश्वर प्रतिदिन दुष्ट जन से नाराज रहता है'' (भजन ७ :११)। यह तथ्यपूर्ण वाक्य है। चाहे आप इसे मानो या न मानो किंतु यह सत्य है। क्या हो अगर आपको डॉक्टर कहे कि, ''तुम्हें कैंसर है''? तो क्या आप उसको ऐसा उत्तर देंगे कि, ''यह आपके लिये सच होगा, मेरे लिये नहीं''? कुछ लोग इस संसार में ऐसे ही मिलेंगे! मनोचिकित्सक ऐसे लोगों को कहते हैं कि वे ''इंकार'' की अवस्था में ही रहते हैं। इसका अर्थ है कि वे सत्य का भी इंकार करते हैं। अगर आप सोचते हैं कि परमेश्वर आपके पाप से गुस्सा नहीं है तो आप भी इस इंकार की दशा में ही पाये जाते हो। आप चाहे कितना भी इंकार कर लें, यह फिर भी सत्य है, ''परमेश्वर (आपसे) प्रतिदिन गुस्सा है''। यह सत्य है चाहे आप माने या न माने। यह सत्य है चाहे आप विश्वास करें अथवा न करें।

मुझे याद है जब पहली बार मनुष्य चांद पर पहुंचा था। तब ऐसे भी लोग थे जिन्होंने इस सत्य पर विश्वास नहीं किया था? उन्होंने कहा था, ''कि वे तस्वीरें जो चांद पर किसी व्यक्ति के चलने के समान है वे स्टूडियो में ली गई है। उन्होंने एक पिक्चर के सेट के समान तैयारी करके,चन्द्रमा और मनुष्य की तस्वीरें तैयार की है।'' मैंने पहले इसके बारे में नहीं सुना था, परन्तु में जानता था कि कोई मूर्ख अवश्य होगा जो ऐसी बात सोच सकता है। परन्तु यह इतनी महत्वपूर्ण बात नहीं है कि वह ''मूर्ख'' ऐसा सोचता है! असल बात तो यह है कि मनुष्य चांद पर चला चाहे वह आदमी इस सत्य पर भरोसा करे या न करे, चाहे यह ''उसके'' लिये सत्य हो या नहीं हो! और ऐसा ही परमेश्वर के गुस्से को लेकर भी है, परमेश्वर का गुस्सा जो पाप के उपर भडकता है। यह सत्य बात है चाहे आप इस पर विश्वास करें अथवा नहीं करें!

डॉ.कार्ल मेनिनजर ने बताया है कि कई आधुनिक भावुक समस्यायें अपने पाप को छिपाने की चिंता से पनपती है (कार्ल मेनिनजर,एम.डी.,व्हाटऐवर बिकेम आँफ सिन? हाउथोर्न बुक्स,१९७३) उनका कहना है कि कई लोगों के जीवन में अवसाद का यही कारण है। उनका कहना है कि यही शराब व नशे के कारणों में से एक है लोगों का विवेक उन्हें जगाता है कि वे पाप के दोषी हैं। उनका विवेक इस सत्य को दबाता है और स्वीकार नहीं करना चाहता इसलिये उनके विचार उन्हें शराब, नशा और यहां तक कि आत्महत्या तक करने की दिशा में ले जाते हैं। क्या आप जानते हैं कि किशोर और जवानों में आत्महत्या मौत का सबसे बडा कारण है? सबसे पहला कारण! यही जवान लोग कहते हैं; ''यह तुम्हारे लिये सच हो सकता है, किंतु यह मेरे लिये सच नहीं है''- यही जवान लोगो की आत्महत्या के आंकडे चौकाने वाले हैं। लाखों लोगों का अपना दिन बिताने के लिये नशे का सहारा लेना पडता है। वे नहीं जानते कि बिना नशे के जिंदा कैसे रहें! वे नहीं जानते कि खुश कैसे रहें! बाईबल बताती है, ''विश्वास घातियों का मार्ग कडा होता है'' (नीतिवचन १३:१५)। पाप में जीवन बिताना बहुत कठिन है। एक विश्वासघाती होना भी बहुत कठिन है!

मैं एक ऐसी महिला को जानता हूं जो कहती थी उसे मसीह की जरूरत नहीं है। उसे नहीं है जरूरत! वह मानती थी कि वह अच्छी महिला है और उसे मसीह क्षमा करे ऐसी जरूरत नहीं है। कुछ समय के बाद उसने जहर का गिलास पी लिया। वह घंटो तक तडफती रही जब कि किसी ने उसे देखा नहीं । अस्पताल के रास्ते में ही उसने दम तोड दिया। मुझे पता चला कि उसके पाप का बोध उसे खाया जा रहा था, पर उसने हमेशा इससे इंकार किया। बाईबल बताती है, ''दुष्टों के लिये शांति नहीं है, मेरे परमेश्वर का यही वचन है'' (यशायाह ५७:२१)

आप कहते हैं, ''मेरे साथ तो ऐसा कुछ नहीं होने वाला''। इस बारे में भरोसा मत कीजिये! जीवन लंबा व कठिन है, और भयानक बातों से भरा है। क्या आपने जवान कलाकार सेमोर हॉफमन के बारे में सुना है? उसने आँस्कर जीता था। उसके पास सब कुछ था! किंतु कुछ दिनों पहले वह अपने बाथरूम में मरा पाया गया, उसने अपने हाथ में इंजेक्शन लगा लिया था। उसके कमरा हेरोईन के सैंकडो पैक से भरा हुआ था! मैं सोचता हूं कि वह अपने पापों के दोष व अवसाद का रोकने की कोशिश कर रहा था! कितना दुखदायी है ये!

उद्धार, हमें आगे आने वाले समय में परमेश्वर के न्याय से भी छुटकारा दिलायेगा। बाईबल कहती है एक समय ऐसा आ रहा है। कुछ जगह पर इसे ''प्रभु का दिन कहा गया है'' कुछ जगह पर उसे ''वह दिन'' या ''वह भयानक दिन'' कहा गया है। प्रेरित पौलुस ने कहा था कि ''एक दिन जिस में वह जगत का न्याय करेगा'' (प्रेरितों के कार्य १७:३१)। प्रेरित पतरस इसे ''न्याय का दिन'' (२ पतरस २:९) कहता है। जगत प्रसिद्ध इवेंजलिस्ट बिली ग्राहम ने १९४९ में, लॉस एंजिलिस के प्रथम क्रूसेड में वाशिंगटन और हिल लेन‚ में कहा था। मैं उनसे हमेशा सहमत नहीं रहता, किंतु उनका यह कथन बिल्कुल ठीक है।

परमेश्वर कहता है, ''मैंने वह दिन ठहरा दिया है'' वह संपूर्ण जगत को यह घोषित है.....संसार के सब अविश्वासियों का उस दिन न्याय होगा....''मैंने एक दिन ठहरा दिया है जिस दिन मैं संसार का न्याय करूंगा कि तुमने मसीह यीशु के साथ कैसा व्यवहार किया है।'' यही शब्द परमेश्वर आज रात भी आपसे कहता है (बिलीग्राहम, रिवाइवल इन अवर टाईम, वान कैंपेन प्रेस, १९५०‚१५९)

मि.ग्राहम ने इसे ६५ वर्ष पहले कहा था। क्या इसका यह मतलब था कि यह होने ही नहीं वाला था? नहीं! इसका मतलब है कि हम न्याय के दिन ६५ वर्ष नजदीक हैं! अकेला उद्धार आपको न्याय से बचा सकता है। मसीह में उद्धार पाना आपको उस भयानक दिन नरक की झील में डाले जाने से बचायेगा!

आप सोचते है कि आपका उद्धार इतना आवश्यक नहीं है - किंतु परमेश्वर तो यह आपके लिये आवश्यक समझता है! वह इसे इतना आवश्यक समझता है कि उसने यीशु को आपको बचाने भेजा! यीशु स्वयं आपके उद्धार को आवश्यक समझता है इसलिये उसने आपको बचाने के लिये क्रूस पर दुख उठाना व आपके लिये मरना स्वीकार किया! बाईबल कहती है, ''मसीह यीशु पापियों को बचाने के लिये इस जगत में आया'' (१ तीमुथियुस १:१५) पवित्र आत्मा जानता है कि आपका उद्धार कितना आवश्यक है इसलिये वह आपके लिये लगातार कार्यरत है। इस तरह संपूर्ण त्रिएकत्व जानता है कि आपके उद्धार का बहुत महत्व है।

आपके पास्टर होने के नाते, मैं सोचता हूं कि आपका उद्धार कितना आवश्यक है इसलिये मैं आपको लगातार प्रचार करता रहता हूं! मैं तो बाईबल से दूसरी बातें भी बता सकता था। किंतु मैं आपके उद्धार पाने के लिये सोचता हूं और मसीह में आपको उद्धार मिले इसलिये आपको प्रचार करने के लिये बाध्य हूं।

यह चर्च भी आपको समय रहते उद्धार मिले इसकी चिन्ता करता है और इसीलिये लगातार हमारे लोग आपके लिये दुआ करते रहते हैं। वे अपनी निजी प्रार्थना में, तीनों प्रार्थना सभाओं में वे बडी दुआ करते है। बहुत दिली इच्छा के साथ आपके बचाये जाने के लिये दुआ मांगते हैं!

शैतान और दुष्टात्मा भी जानते हैं कि आपका उद्धार कितना आवश्यक है इसलिये वे आपको बचाये जाने का हमेशा विरोध करते है! नरक में भटकी आत्मायें भी जानती है कि आपके उद्धार पाने का कितना महत्व है! जब धनी आदमी मरा और नरक पहुंचा तो उसने कहा कि मेरे पांच भाइयों के पास लाजर को पहुंचा दे कि वह उन्हें उद्धार के विषय में चेताये ताकि, ''ऐसा न हो कि वे भी इस पीडा की जगह में आए'' (लूका १६:२८)

तो धन्य त्रिएकत्व, इस चर्च के लोग, शैतान और दुष्टात्मा, नरक की आत्मा सब जानते हैं कि उद्धार कितना अधिक आपके लिये आवश्यक है! आप अभी भी जाग जायें और मसीह यीशु में उद्धार पाने की बडी आवश्यकता महसूस करें!

२. दूसरा, मैं चाहता हूं कि आप ''अपने उद्धार'' के विषय में सोचें।

पद कहता है '' आपका स्वयं का उद्धार''। इस समय मैं चाहता हूं कि आप ''अपने उद्धार'' के बारे में सोचें। यूनानी भाषा में ''आपके स्वयं'' के लिये शब्द है - ''हयूटोन''- और दूसरा किसी का नहीं किंतु ''आपका स्वयं'' का उद्धार! सोचिये कितना अधिक आवश्यक है कि आप बचाये जायें! अपने खुद के उद्धार के बारे में सोचिये- और कुछ मत सोचिये - आज सुबह! जेलर ने कहा था, ''मैं उद्धार पाने के लिये क्या करूं?'' (प्रेरितों के कार्य १६:३०) यही आपको भी सोचना चाहिये - ''कि मैं उद्धार पाने के लिये क्या करूं?''

आपके बदले मसीह के लहू में कोई दूसरा शब्द नहीं किया जा सकता। आपका शुद्ध होना आवश्यक है! आपको पश्चाताप करना जरूरी है! आपको यीशु पर विश्वास लाना जरूरी है! अगर आप मसीहा पर विश्वास नहीं लाते, तो आप अनंत काल के लिये खो चुके होंगे!

इस सत्य पर विचार करो कि आपको खुद मरना होगा। कोई यह नहीं सोचे कि उनके मित्र या रिश्तेदार उनके स्थान पर मरेंगे। मुझे मौत द्वार से अकेले गुजरना होगा। और आपको भी! और जब आपकी मौत होगी तो या तो आप को आगे आराम या आनंद मिलेगा, अथवा भयानक क्लेश से गुजरना होगा। या तो आप ''राजा को उसकी सुंदरता'' में देखेंगे (यशायाह ३३:१७); या आप ''प्रचंड आग में जलेंगे'' (यशायाह ३३:१४)। सच्चे मसीही के लिये असली स्वर्ग है। पर आप तभी वहां पहुंचेंगे जब आपने ''अपने उद्धार'' का अनुभव ले लिया हो। एक व्यक्तिगत नरक भी है - अगर आपने उद्धार का अनुभव प्राप्त नहीं किया है तो आप वहां जायेंगे - कोई और नहीं जायेगा। आप नरक की आग से कैसे बच सकते हैं - अगर आपने मसीह यीशु द्वारा आपको दिया गया उद्धार ठुकरा दिया हो? एक पुरानी कोरस में शब्द है, ''मेरा भाई, मेरी बहिन नहीं, किंतु मैं खुद, प्रभु, दुआ मांगता हुआ आपके सामने खडा हूं!''

कुछ लोग ''अनुग्रह की वाचा'' की आड में स्वयं को छिपा लेते हैं। वे मानते हैं कि आप मसीही परिवार से हैं तो यह तय है कि आप बचाये जायेंगे। वे मान सकते हैं मगर मैं नहीं मानता! यह सच है, मसीही घराने में पैदा होने पर अनुग्रह मिलने के कई रास्ते हैं। व्यक्ति को संदेश सुनने को मिलते हैं। उसे बाईबल पढने को मिलती है। उसके लिये दुआ करने वाले बहुत लोग होते हैं। परन्तु कोई भी आज तक इन ''अनुग्रह से भरे'' रास्तों के कारण नहीं बचाया जाता। यह वाचा मसीहियों के लिये नहीं है। यह' 'स्थानापन्न धर्मविज्ञान'' का परिणाम है - जो कहता है चर्च ने इजरायल की जगह ले ली। यह एक खराब धर्मसिद्धान्त है जिसने कई लोगों को इजरायल के विरूद्ध कर दिया और परमेश्वर के विरूद्ध भी हो गये। हेडेलबर्ग धार्मिक शिक्षा कहती है कि यह तथाकथित ''अनुग्रह की वाचा'' है जो बपतिस्मा लेते ही प्राप्त हो जाती है, जो वाचा का चिन्ह है, जिन शिशुओं को बचपन से मसीही चर्च में बपतिस्मा से स्वीकार कर लिया जाता है वे अविश्वासियों से अलग हो जाते हैं। जिसने ऐसा पुराने नियम में भी किया गया था जब खतना किया गया, नये नियम में बपतिस्मा का स्थान ले लिया'' (हेडेलबर्ग कैटकिजम,प्रश्न ७४) किंतु इसके ''बदले में'' ऐसा किया जाये ये धर्मशास्त्र पर आधारित नहीं है। हमें कहीं नहीं कहा गया कि बपतिस्मा खतने का स्थान ले लेगा। हमें यह कहीं नहीं कहा गया है कि शिशु का बपतिस्मा करने से वह ''अनुग्रह की वाचा'' में सुरक्षित हो जाता है। मैं नहीं मानता कि कोई सच्चा बैपटिस्ट इस शिक्षा को स्वीकार करेगा। इतिहास गवाह है कि बैपटिस्ट ''विश्वासी के बपतिस्में'' पर ही विश्वास करते हैं। इसलिये, एक ठोस बैपटिस्ट तार्किक रूप से ''अनुग्रह की वाचा'' पर विश्वास नहीं करेगा। इसके पहले कि आप बपतिस्मा लो आप का बचाया जाना आवश्यक है। ''समस्त घराने'' के बपतिस्में प्रेरितों के कार्य में मिलते हैं जहां घर में हरेक जन बचाया जाता था - जो बडी जाग्रति के समय में भी हुआ था - जैसा प्रेरितों के कार्य वर्णन करता है। देखा जाये, तो बहुत से दुष्ट लोग मसीही परिवार से ही आते हैं। दूसरी ओर हमारे कोई भी डीकन मसीही परिवार से नहीं हैं। न ही डॉ.चान, डॉ.कैगन और न मैं खुद। हम यीशु मसीह पर विश्वास रखने से बचे है न कि ''अनुग्रह की वाचा'' से।

आप ''अनुग्रह की वाचा'' की आड में छिप नहीं सकते कि यह आपके लिये पहले से ही ठहराया गया है। आप अपने माता पिता से आशा नहीं रख सकते हो कि वे आपके लिये ''आपका उद्धार'' प्राप्त करके देंगे। नीकुदेमुस अभी तक पुराने नियम में ही जी रहा था। किंतु यीशु ने उससे कहा, ''तेरा नये सिरे से जन्म लेना आवश्यक है'' (यूहन्ना ३:७)। मैं जानता हूं कि मेरी बात से ''उग्र'' केल्वीनिस्ट सहमत नहीं होंगे, किंतु परमेश्वर के वचन में यह सत्य बताया गया है, भले ही यह उनके ''स्थानापन्न धर्मविज्ञान'' का अंग नहीं हो। मैं उद्धार पाने (उद्धार) के विषय में सुधारवादी हूं, किंतु कोई मुझसे यह आशा नहीं रखे कि मैं उनके स्थानापन्न धर्मविज्ञान को भी मान सकता हूं! मैं ऐसा कभी नहीं करूंगा! जब इजरायल और चर्च की बात आती है तो मैं बिना शर्म के उद्धार की बातों का ''बांटने वाला'' हो जाता हूं। परमेश्वर ने यहूदी लोगों के साथ इस धरती पर एक वाचा बांधी थी। मसीही जन केवल यीशु में विश्वास करके ''नई वाचा'' को पाने के उत्तराधिकारी हो गये हैं!

अगर आप मसीही परिवार से हैं, तो मैं आपको चेतावनी देता हूं कि आप ''अपना स्वयं का उद्धार'' पहले खोजे। अगर यीशु पर आपका भरोसा नहीं है, तो आपको भयभीत होना चाहिये कि आप आपके परिवार से हमेशा के लिये अलग हो जायेंगे! हो सकता है कि आप अविश्वासी परिवार से भी आते हों। अगर ऐसा है, तो दूसरे सदस्यों के समान नरक की आग के लिये उनका अनुसरण मत करना! ''आपको स्वयं के उद्धार'' के लिये यीशु पर विश्वास करना होगा।

और आप दूसरे लोगों के बारे में सोचकर अपने उद्धार को भूल सकते हो। क्या आप सोचते हैं कि आप किसी को जानते हैं, जो चर्च का सदस्य है, और सचमुच में खोया हुआ है? हो सकता है वे ऐसे ही हो - किंतु इससे आपको क्या मदद मिलेगी? आपको उनके बारे में सोचना भूल कर ''आपके अपने उद्धार'' के लिये चिंता करनी चाहिये।

मुझे तो ऐसा लगता है कि इस धरती पर इस स्वर्ग में, इस नरक में, और स्वयं परमेश्वर, आपको ''आपका उद्धार'' प्राप्त करता देखना चाहता है! सचमुच, मेरे मित्र, अपने बारे में सोचो! क्या आप बचाये गये हो? अगर नहीं, तो जीवन में सब काम छोड कर पहले उद्धार प्राप्त करो! अपनी खुद की बुलाहट को पहचानो और निश्चय सही चुनाव करो!

मैं आज सुबह प्रत्येक जन से विनती करता हूं कि अपने संपूर्ण मन से मसीह को खोजे। अविश्वास में सोते रहना बंद कीजिये। अपने स्वयं के विचारों और खोखली आशा से भागो! यीशु आपके पापों का मोल चुकाने कूस पर मरा। वह आपके जैसे पापियों के बदले में मरा! पश्चाताप करो और यीशु को अपना जीवन सौंपो, और वह आपको बचायेगा! तभी आप बडे विश्वास से यह गीत गा सकोगे‚

मैंने एक मित्र को पा लिया है जो मेरा सब कुछ है,
   उसका प्रेम हमेशा सच्चा है;
मैं बताना चाहता हूं उसने कैसे मुझे बचाया,
   उसका अनुग्रह तुम्हारे लिये भी बहुत कुछ कर सकता है।
उसकी आत्मिक सामर्थ से मैं बचाया गया, नये उत्तम जीवन के लिये!
   अब जीवन मधुर और आनंद भरपूर है
क्योंकि मैं बचाया गया, बचाया गया, बचाया गया!
   (''बचाया गया, बचाया गया!'' द्वारा जेक पी. शोलफील्ड, १८८२−१९७२)

अजीज मित्र, अगर आप हमसे ''आपके उद्धार'' के बारे में बातें करना चाहते हैं तो निवेदन है कि अपनी कुर्सी पर से उठकर पीछे आँडीटोरियम में आइये। मि.जॉन सेमुएल कैगन आपको दूसरे कमरे में ले जायेंगे जहां हम आपके लिये प्रार्थना कर सकते हैं और आपके प्रश्न का उत्तर दे सकते हैं। अगर आप सच्चे मसीही बनना चाहते हैं तो अभी इस आँडीटोरियम के पिछले भाग में पहुंचिये। डॉ.चान, क्रपया दुआ कीजिये कि आज सुबह कोई यीशु के द्वारा पापों से छुटकारा पाये, आमीन!

(संदेश का अंत)
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संदेश के पूर्व धर्मशास्त्र पढा गया मि.ऐबेल प्रुद्योमें: फिलिप्पयों २:९−१३
संदेश के पूर्व एकल गाना गाया गया। मि.बैंजामिन किन्केड गिफिथ:
''बचाया गया, बचाया गया''। (द्वारा जेक पी. शोलफील्ड,१८८२−१९७२)


रूपरेखा

अपने उद्धार

द्वारा डॉ0आर.एल.हिमर्स

"अपने उद्धार" (फिलिप्पयों २:१२)

१॰ प्रथम‚ मैं चाहता हूं कि आप ''उद्धार'' शब्द के विषय में सोंचे भजन ७ :११;
नीतिवचन १३:१५; यशायाह ५७:२१; प्रेरितों के कार्य १७:३१; २
पतरस २:९; १ तीमुथियुस १:१५; लूका १६:२८

२॰ दूसरा, मैं चाहता हूं कि आप ''अपने उद्धार'' के विषय में सोचें प्रेरितों के
कार्य १६:३०; यशायाह ३३:१७‚१४; यूहन्ना ३:७