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मसीह केवल सच्चे परिवर्तित लोगों के लिये बेशकीमती है!

CHRIST PRECIOUS TO REAL CONVERTS ONLY!
(Hindi)

डॉ0 आर.एल.हिमर्स
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

रविवार प्रात:,फरवरी 2,2014 को लॉस एंजिलिस के
िद बैपटिस्ट टेबरनेकल में प्रचार किया गया संदेश
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord’s Day Morning, February 2, 2014

‘‘तो तुम्हारे लिये जो विश्वास करते हो, वह तो बहुमूल्य है।’’ (1पतरस2:7)


स्पर्जन सोलह साल का था जब उसने पहला संदेश िदया। जबसे उसका हृदय परिवर्तित हुआ,वह संडे स्कूल में एक वर्ष से पढ़ा रहा था। युनाइटेड किंगडम की जीवन शैली के हिसाब से, संडे स्कूल दोपहर में लगते थे। वह पढ़ाने में इतना निपुण व सफल था कि लोग उसके पास संदेश तैयार करने की मदद लेने आते थे। वह सहायक पास्टर्स संघ में भी भाग लिया करता था। एक िदन संघ के प्रमुख जन ने स्पर्जन को किसी दूसरे जवान मनुष्य के साथ जाने को कहा जिसे उसका प्रथम संदेश देना था। जव वे सभा गृह की ओर बढ रहे थे, अचानक स्पर्जन को अगुवाई हुई कि उसे आज प्रचार करना था। उसके साथी ने भी कहा कि अगर वह नहीं बोलेगा तो अधूरा सा लगेगा। जब वे चले जा रहे थे स्पर्जन ने सोचा,‘‘मैं खुद आत्मिक गरीबों (लोगों को) यीशु के प्रेम व उसकी मधुरता के विषय में बताऊंगा।’’

और तब, 16वर्षीय स्पर्जन ने अपना प्रथम संदेश िदया - इस पद पर,

‘‘जो तुम्हारे लिये जो विश्वास करते हो, वह तो बहुमूल्य है’’ (1पतरस2:7)

वह जब बोलने खड़ा हुआ तो बहुत डर गया था। किंतु वह इस पद में इतना खो गया कि शब्द स्वत: उसके मुंह से निकलने लगे। उसने कहा,‘‘मसीह मेरी आत्मा का प्रिय विषय है...और मैं खामोश नहीं रह सकता जब (वह) बहुमूल्य यीशु प्रभु मेरे बोलने का विषय हो।’’ उसे अपने पाप का बंधन याद आया, उसके व्याकुल विवेक को लपेटती हुई वह आग की गहरी दरारें याद आने लगी। उसे लगा कि अब वह कभी न बुझने वाली अनंत आग में गिरने वाला है। अपने परिवर्तित होने से पूर्व वह जिस नारकीय दशा से गुजरा था, एक वर्ष पूर्व ही का अनुभव उसे याद आया, तो वह यीशु के बहुमूल्य प्रेम के लिये और बढ़ कर बोलने लगा। उसने कहा कि मसीह ने, उस संघर्ष से अलग कर एक पहचान दी और एक चौडे़ स्थान पर पहुंचाया, और मेरे मुंह में अपने शब्द भर िदये।’’

स्पर्जन ने इसी पद को लेकर छ: और संदेश िदये, अंतिम संदेश 1890 में िदया गया, उसकी मृत्यु से कुछ महिने पूर्व। मैं सोच रहा था कि सोलह साल का लड़का यीशु के बहुमूल्य होने के ऊपर प्रचार कर रहा था। मुझे आश्चर्य है कि शायद ही कोई किशोर हमारे समय में इस विषय पर बोलना पसंद करता। आज तो यह और भी मुश्किल हो गया कि कोई किशोर लड़का अपना प्रथम संदेश इस विषय को लेकर दे,

‘‘जो तुम्हारे लिये जो विश्वास करते हो, वह तो बहुमूल्य है’’ (1पतरस2:7)

निश्चित ही, चाल्र्स स्पर्जन जैसे लडके िबरले ही थे। और इसीलिये मुझे संदेह है कि अमेरिका में कोई जवान मसीह के बहुमूल्य होने के विषय पर प्रचार करने की सोचेगा। हमारे चर्चेस में तो आज सुसमाचार प्रचार होता ही नहीं है। मैंने पिछले रविवार को मेरे संदेश, ‘‘आजकल सुसमाचार का प्रचार कम क्यों है ’’ मैंने कुछ कारण बताये थे। अब तो जवान लड़के भी सुसमाचार संदेश देना पसंद नहीं करते! अब ‘‘वर्णनात्मक’’ संदेश के इस ‘‘नये’’ दौर में, वह निश्चित ही एक या डेढ़ पद पर आधारित संदेश नहीं देगा! एक जवान मसीहियों को वह संदेश देगा जिसमें पांच या अधिक पद निहित है, आजकल यह खतरनाक ‘‘वर्णनात्मक’’ प्रचार प्रचलन में है। और इसलिये एक जवान बड़ी लगन से यीशु के ‘‘बहुमूल्य’’ होने के गुण पर बोल नहीं पाता है। क्यों नहीं बोल पाता है? क्योंकि यह िबल्कुल सच है कि एक जवान लड़का आज अपने हृदय परिवर्तन की वास्तविक पीड़ा व परम आनंद से कभी गुजरा ही नहीं है! प्रचारक के घर से लौटते से हुये, जैसा स्पर्जन बताते हैं, ऐसे जवान लड़के ने सिर्फ किसी प्रचारक के कहने पर ‘‘पापी की स्वीकारोक्ति प्रार्थना’’ के शब्द बुदबुदाये थे और उसकी उम्र उस समय दो या तीन वर्ष रही होगी। उसे निश्चित ही कहा गया होगा कि वह जीवन भर के लिये बचाया गया है क्योंकि उसने यह प्रार्थना दोहराई है। तो इस तरह एक आधुनिक किशोर उसके जीवन को बदल देने वाले सच्चे परिवर्तन, जो यीशु के द्वारा संभव है उससे भी वंचित रह जाता है। इसीलिये जो जवान बच्चे लगभग 90 प्रतिशत जो अमेरिका के चर्चेस में बढ़े होते हैं वे 25 वर्ष के होते होते चर्च जाना छोड़ देते हैं,‘‘कभी न लौटने के लिये’’ जैसा जॉर्ज बारना की सर्वे रिपोर्ट बताती है। किंतु स्पर्जन किसी ऐसे ‘‘निर्णय िदलवाने’’ वाले चर्च में नहीं पला बढ़ा जहां ऐसा सोचा जाता हो कि उद्धार वह ‘‘जल्दी से बोली गई प्रार्थना’’ से ही मिलता है। यह खतरनाक, आत्मा को भ्रष्ट कर देने वाला रिवाज अभी तक चर्चेस में आया नहीं है। और इसीलिये इस ‘‘जवान प्रचारक’’ ने 1पतरस2:7 को अपने पहले संदेश का मुख्य पद बनाया - और इसे बड़ी प्रबलता व मल्हम लगाते हुये प्रचार किया! (सी.एच.स्पर्जन का प्रथम संदेश आधारित थॉमस जे.नेटल्स की सूचना पर,पी.एच.डी., लिविंग बॉय रिविल्ड ट्रुथ:िद लाईफ एंड पास्टोरल थियोलॉजी ऑफ चाल्र्स हेदौन स्पर्जन, क्रिश्चियन फोकस पिब्लकेशंस, 2013,पृ.58,59)

‘‘जो तुम्हारे लिये जो विश्वास करते हो, वह तो बहुमूल्य है’’ (1पतरस2:7)

मैं इस पद से निकले हुये दो िबंदु आपको बताऊंगा।

1. प्रथम, वे कौन हैं जो विश्वास करते हैं?

‘‘जो तुम्हारे लिये.... विश्वास करते हो, वह तो बहुमूल्य है’’

आज अनेक लोग अविश्वासी हैं। सच्चे विश्वासियों को ढूंढना कठिन है, यहां तक कि धर्मविज्ञान सेमनरीज में भी वे नहीं मिलते। जॉन एस.डिकरसन ने एक पुस्तक लिखी है जो प्रत्येक पास्टर और प्रत्येक गंभीर मसीही को पढ़ना चाहिये। इसका शीर्षक है िद ग्रेट इवेंजलिकल रेसेशन (बेकर बुक्स,2013) मैं इस पुस्तक के बाद के आधे भाग से असहमत हूं। किंतु प्रथम भाग तो आपको ‘‘पढ़ना ही है’’ की सूची में रखना होगा। यहां वह अंश लिखा है जिसमें मि.डिकरसन हमारे सुसमाचारीय व रूढि़वादी चर्चेस के लिये कहते हैं,

अमेरिकन चर्च इस आत्मिक मंदी के दौर में बहुत खतरनाक स्थिति से गुजर रहा है। हमारी कुल सदस्यता सिकुड़ रही है। जवान (लोग) की हालत यह है कि वह (चर्च से) भाग रहे हैं। हमारे दान कम हो गये हैं। राजनीति का प्रवेश हमें बांट रहा है। जैसे जैसे आंतरिक संकट चर्च को खाये जा रहे हैं हमारे देश की मित्रतापूर्ण सभ्यता अब जल्द ही शत्रुता व विरोध में बदल गई है.....
         पास्टर जॉन डिकरसन ने छ: तथ्यों को पहचाना जो मूलत: चर्च का नुकसान कर रहे हैं...( बैक जैकेट कवर)

वह कहते हैं कि सुसमाचारीय और रूढि़वादी चर्च बहुत बढ़ गये हैं। उनका कहना है कि मात्र 7 प्रतिशत अमेरिकन्स सुसमाचारीय और रूढि़वादी विचारधारा के हैं। उनका कहना है कि हमारे देश के शेष लोग हमसे अब विद्वेष रखते हैं। उनका कहना है कि हम अब कंगाल होने की कगार में हैं। उनका कथन है कि हमारे 80 प्रतिशत से 90 प्रतिशत तक जवान लोग 25 की उम्र तक चर्च छोड़ देते हैं और फिर कभी वापस नहीं आते। उनका कहना है हम बंट चुके हैं, हममे से 70 प्रतिशत किसी धार्मिक अधिकार या रिपिब्लकन पार्टी को सहयोग नहीं करते। उनका कहना है कि जितनी तेजी से जनसंख्या बढ़ रही है उतनी तेजी से सुसमाचारीय और रूढिवादी नहीं बढ़ रहे हैं। उनका कहना है, ‘‘सुसमाचार प्रचारकों का प्रतिशत गिर गया है हर नई पीढ़ी में ऐसा देखा जा सकता है, जबकि नई पीढी में आस्तिक व विद्रोही लोग बढ़ गये हैं। जैसे जैसे पुरानी पीढ़ी समाप्त होती जायेगी एक नष्ट होती सुनामी सभ्यता का प्रभाव दृष्टिगोचर होगा....अगले उन्तीस वर्षो में 45 प्रतिशत प्रचारक समाप्त हो जायेंगे - अर्थात वे प्रचारक (कम हो जायेंगे)। (इसलिये) अमेरिका में वर्ष 2030 या 2040 में मूलत: अधिक सांसारिक और आस्तिक लोग प्रगट होंगे जितने (आज हम) कल्पना भी नहींं कर सकते (संदर्भ,पृष्ठ113,116) उसने यह भी बताया कि रिक वारेन, और जोएल ऑस्टिन, के बडे़ बड़े चर्च भी कुछ ही परिवर्तित लोग दे रहे हैं। वे सिर्फ छोटे चर्च से आये लोगों द्वारा बढ़ रहे हैं - इसलिये आज उन सब लोगों को सुसमाचारीय रूप में जोड़कर नहीं देखा जा सकता! (संदर्भ,पृष्ठ117,118)

उनका कहना है कि ‘‘विश्वासियों’’ की कुल संख्या प्रत्येक वर्ष अमेरिका में घटती जा रही है, और, जैसा हमें हमारी पुस्तकों में पढ़ने को मिलता है, प्रीचिंग टू ए डायिंग नेशन और टू डेज एपोस्टेसी, तो हम पाते हैं कि कई सुसमाचारीय व रूढि़वादी चर्च के लोगों का अभी तक नया जन्म ही नहीं हुआ है, न परिवर्तित हुये, न बचाये गये हैं! एक कारण यह है कि मसीह के ऊपर प्रचार बहुत थोड़ा है! इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि डॉ0 माईकल हॉरटन यही दशा देखकर पुस्तक लिखने को बाध्य हुये होंगे जिसका शीर्षक है, क्राईस्टलेस क्रिश्चियनिटी: िद अल्टरनेटिव गॉस्पल ऑफ िद अमेरिकन चर्च (बेकर बुक्स,2008) प्रत्येक पास्टर को डॉ0 हॉरटन की पुस्तक, और जॉन डिकरसन की पुस्तक पढ़ना चाहिये। डिकरसन की पुस्तक का प्रथम भाग अतिमहत्वपूर्ण है! किंतु ध्यान रखिये व्यक्तिगत रूप से मैं सोचता हूं कि उनकी पुस्तक का दूसरा भाग इतना उपयोगी नहीं है। यह कुछ ‘‘तकनीकों’’ को बताता है बजाय परमेश्वर प्रदत्त हृदय परिवर्तन और परमेश्वर प्रदत्त आत्म जागृति के।

जिस तरह की ‘‘आत्मिक जागृति’’ की बात डिकरसन करते हैं वह फिनींज मॉडल पर आधारित है, जिसकी आलोचना डेविड वेल्स ने की है, उन्होंने इसे कहा है,‘‘जो चर्च में उचित तकनीकी की सहायता से योजनाबद्ध तरीके से डाला जा सकता है’’ (डेविड एफ.वेल्स,पी.एच.डी.,नो प्लेस फॉर ट्रुथ; या वॉट एवर हेप्पन्ड टू इवेंजलिकल थियोलॉजी?अर्डमन्स,1993,पृ.296)

जो योजनाबद्ध तरीके चर्च में काम में लाये जाते हैं उनसे बेशक,आत्मिक जागृति नहीं आती। किंतु डिकरसन इस तरीके से,‘‘आत्मिक जागृति’’लाने के लिये जोर दे रहे हैं जो ‘‘फिनेइस्म’’ पर आधारित है। मैं डॉ0डेविड वेल्स से पूर्ण रूप से सहमत हूं कि इन तरीकों से ‘‘आत्मिक जागृति’’ नहीं आ सकती। डॉ0वेल्स का कथन है, ‘‘चर्च को जागृति नहीं पुर्नसुधारवाद की आवश्यकता है’’ (संदर्भ) यही डॉ0टोजर का भी कथन है जब उन्होंने कहा, ‘‘संपूर्ण सुसमाचारीय संसार स्वस्थ मसीहत उत्पन्न नहीं कर रहा है...अर्थात बाईबल पर विश्वास लाने वाली भीड़ उत्पन्न नहीं कर रहा है।’’ ‘‘हमें नये ढंग से सुधारवाद की आवश्यकता है। अब अस्वस्थ मसीहत पर रोक लगाना चाहिये एक क्रांतिकारी परिवर्तन आना चाहिये...ये जो छदम - पुरातन धर्म ने मसीह के सच्चे विश्वास को ढंक लिया है और संपूर्ण विश्व में जो कृत्रिम विश्वास फैला है उस से बाहर आने की सख्त आवश्यकता है।’’ (ए.डब्ल्यू.टोजर,डी.डी., ऑफ गॉड एंड मैन, पृ.12-13; वी ट्रेवल एन एपोइंटेड वे पृ. 110-113)

हमारी समस्या की जड़ यह है कि बहुत सारे सुसमाचारीय और रूढि़वादी लोग असल में परिवर्तित ही नहीं हुये हैं। वे केवल कुछ सिद्धान्तों के प्रति ‘‘विश्वासी’’ बने हुये हैं वे केवल कुछ बाईबल की आयतों के प्रति ‘‘विश्वासी’’ बने हुये हैं। किंतु मसीह स्वयं उनके लिये इतना बेशकीमती नहीं है क्योंकि वे यीशु के प्रति ‘‘विश्वासी’’ नहीं है, बाईबल के वचन के अनुसार कहा जा सकता है।

‘‘जो तुम्हारे लिये जो विश्वास करते हो, वह तो बहुमूल्य है’’ (1पतरस2:7)

स्पर्जन ने कहा कि स्वंय मसीह में विश्वास रखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सच्चा विश्वास वह है, ‘‘जब एक मनुष्य यीशु के ऊपर विश्वास रखता है, या यीशु पर विश्वास रखता है, वह स्वयं को उसके ऊपर छोड़ देता है...(वह कह सकता है) ‘‘मैं उस महिमामयी मनुष्य पर विश्वास करता हूं; मेरा भरोसा उस पर है’’ (मसीह ही) उसका संपूर्ण उद्धार है और उसकी सारी इच्छायें हैं...यिद आप उसमें या उस पर विश्वास लाते हो, तो वह आपको सब बातों के आगे सबसे कीमती लगेगा।’’ (सी.एच.स्पर्जन, िद मेट्रोपॉलिटन टेबरनेकल पुलपिट, िबलीग्राहम पिब्लकेशन, 1978 पुर्नमुद्रण,वॉल्यूम 54, पृ.470,471)

‘‘जो तुम्हारे लिये जो विश्वास करते हो, वह तो बहुमूल्य है’’ (1पतरस2:7)

जब तक आपको अपने पापों का बोध नहीं होगा आप यीशु पर विश्वास लाने की जरूरत महसूस नहीं करोगे। जब तक आप अपने पापों के लिये सजग नहीं होंगे आप अपना चेहरा उससे छुपाते रहोगे, और उसे आदर नहीं दोगे (यशायाह53:3) किंतु जब पवित्र आत्मा आपके भीतर यह ज्ञान उत्पन्न करेगा कि आप विद्रोही हो और आपके हृदय में दुष्ट स्वभाव भरा हुआ है, उसी क्षण आपको अपने आप से घृणा हो जायेगी। तभी आप महसूस कर सकेंगे कि यीशु बहुत बहुमूल्य है।

आपको अपने अंदर ऐसे कई विद्रोही स्वभाव से लड़ना होगा उनको समर्पित करना होगा, ताकि यीशु को आप अपना पापी स्वभाव सौंप सकें। जब आपको लगे कि इस दुनिया में, आपके लिये कोई आशा नहीं है, जब आप को लगने लगे कि आप घोर पापी हैं, आपके लिये अब कोई आशा नहीं है, तब आप यीशु के पास लाये जा सकते हैं स्वयं यीशु के पास और उसके कीमती लहू से आपके पाप धोये जा सकते हैं। तब, और केवल तब, आप यीशु के विश्वासी कहलायेंगे, इस पद के परिप्रेक्ष्य में।

‘‘जो तुम्हारे लिये जो विश्वास करते हो, वह तो बहुमूल्य है’’ (1पतरस2:7)

2. िद्वतीय, जो विश्वास करते हैं उनके लिये मसीह बहुमूल्य क्यों है?

‘‘बहुमूल्य’’ शब्द का यूनानी अनुवाद ‘‘टीमे’’ है। इसका अर्थ है कीमती, मंहगा, अमूल्य (मजबूत) जब कभी आपको महसूस हो कि आप पाप में खो चुके हैं तभी आप यीशु पर वास्तव में विश्वास लायेंगे-केवल तभी, उसके पहले कभी नहीं। और तभी आप उस पर विश्वास करते हो उसे देख पाते हो, केवल उसे देख पाते हो,कि वह अमूल्य है,कीमती है,बहुमूल्य है! तब, और केवल तब, आप वह गीत अपने िदल से गा सकोगे जो अभी मि.ग्रिफिथ ने गाया है,

मेरा यीशु इतना कीमती, मेरा मसीहा और राजा,
     परम आनंद से उसकी प्रशंसा मैं पूरे िदन गाता रहूं;
उससे मिलती ताकत मुझे जब मैं निर्बल रहता हूं,
   क्योंकि वह मेरे लिये अनमोल है।
क्योंकि वह मेरे लिये अनमोल,वह मेरे लिये अनमोल,
   वह खुद स्वर्ग है, मेरा मुक्तिदाता जानता है,
क्योंकि वह मेरे लिये अनमोल है।
   (‘‘क्योंकि वह मेरे लिये अनमोल है’’ द्वारा चाल्र्स एच.गेिब्रएल,1856-1932)

जब लूथर ने यीशु पर विश्वास किया,तब वह यह गीत गा सका! जब उसने यीशु पर विश्वास किया, महान वाईटफील्ड यह गीत गा सके! निम्न सभी प्रचारक यह गीत गा सके - जॉन बुनयन, जॉन वेस्ली, विलियम रोमेन, ऑगस्टस टॉपलेडी, जॉन न्यूटन, रॉबर्ट हॉल, जोनाथन एडवर्ड, तिमोथी डवाईट, गिलबर्ट टेनेंट, विलियम विलियम्स, हॉवेल हेरिस, डेनियल रॉलेंड, क्रिसमस इवान्स, चाल्र्स साईमन, रॉबर्ट मुर्रे मैकेने, सी.एच.स्पर्जन, मार्टिन ल्यॉड-जोन्स, ए.डब्ल्यू टोजर और हजारों हजार जिन्होंने यीशु पर विश्वास रखा, उस पर विश्वास रखने से शांति पाई, और मसीह व क्रूसित मसीह का प्रचार अंत तक किया! प्राचीन व्याख्याकार जॉन ट्रेप (1601-1669) ने कहा था,‘‘यीशु हमारे मुंह में जैसे शहद है, कानों में संगीत है, और िदल में परमानंद है।’’

‘‘जो तुम्हारे लिये जो विश्वास करते हो, वह तो बहुमूल्य है’’ (1पतरस2:7)

‘‘प्रचारकों का राजकुमार’’ महान स्पर्जन कहता है कि

यीशु कीमती है अपने सत्व में - वह बेशकीमती है!
  कीमती इसलिये कि उसे खरीदा नहीं जा सकता - वह अमूल्य है!
   कीमती क्योंकि उसका कोई मिलान नहीं - वह अिद्वतीय है!
    एक ही है प्रभु!
     कीमती क्योंकि वह खो नहीं सकता - एक बार जो तुम उस पर भरोसा रखो
      तुम भी उसे खो नहीं सकते!
       कीमती क्योंकि उसे कोई नष्ट नहीं कर सकता - क्योंकि वह हमेशा जीवित
        कीमती क्योंकि जो कुछ उसने हमारे लिये किया है -

उसने हमारे दोष अपने ऊपर ले लिये और हमारे पापों का मोल चुकाने के लिये मरा, हमारे स्थान पर। वह मुरदों में से जी उठा और पिता परमेश्वर के दाहिने हाथ बैठा है, हमारे लिये विनती करता है। प्रार्थना करता है! वह हमें क्षमा करता है! वह परमेश्वर से हमारा मेल करवाता है! वह हमें सनातन जीवन देता है! वह हमें आशा देता है! वह हमें सामर्थ देता है! वह हमारी प्रार्थना का उत्तर देता हैं!

जो लोग उस पर संपूर्ण विश्वास लाते हैं यीशु ऐसे लोगों के लिये बहुमूल्य है सब बातों से बढ़कर है! जैसा जॉन ट्रेप ने कहा था, वह ‘‘मुंह में शहद, कानों में संगीत, और िदल में परमानंद है’’ उनके लिये जो उस पर पूरा भरोसा रखते हैं! वे प्रेरित पौलुस के समान ऐसा कह सकते हैं,

‘‘परन्तु उसी की ओर से तुम मसीह यीशु में हो, जो परमेश्वर की ओर से हमारे लिये ज्ञान ठहरा अर्थात धर्म, और पवित्रता,और छुटकारा। ताकि जैसा लिखा है, वैसा ही हो, कि जो घमण्ड करे वह प्रभु में घमण्ड करे। (1कुरूंथियो 1;30-31)

कीमती है वह मेरे लिये, बहुत कीमती है मेरे लिये,
वह स्वर्ग है, मेरा मुक्तिदाता कहलाता है
वह बेशकीमती है मेरे लिये!

‘‘जो तुम्हारे लिये जो विश्वास करते हो, वह तो बहुमूल्य है’’ (1पतरस2:7)

यीशु बेशकीमती है। सच में, वह अमूल्य है। सब जवाहरातों से बढ़कर सारे सम्मान, बीते संसार की सारी प्रतिष्ठा से बढ़कर है यीशु। यीशु के पास आइये। वह आपके पापों के लिये मरा-आपके स्थान पर मरा - क्रूस पर - ताकि आपको आपके पापों का दंड कभी न मिले। वह जीवित है - परमेश्वर के दाहिनी हाथ बैठा है, स्वर्ग में - इसलिये अगर आप विश्वास करते हैं तो आप भी नहीं मरेंगे। आपके पाप माफ किये जायेंगे और आपको शाश्वत जीवन मिलेगा - जब आप यीशु मसीह को, अपना मसीहा जानकर विश्वास लाते हो! वह आपसे प्रेम रखता है! वह आपको बचायेगा! डरो मत! उस पर अभी विश्वास लाओ, इस सुबह ही, अभी इसी वक्त! वह आपको बचायेगा। वह आपको बचायेगा। वह आपको अभी बचायेगा!

अगर आप यीशु के पास आने के विषय पर बात करना चाहते हैं - तो कृपया उठकर ऑडिटोरियम के पिछले भाग में आ जाइये। डॉ0 जॉन सेमुएल कैगन आपको दूसरे कक्ष में ले जाऐंगे जहां हम बात कर सकते हैं और प्रार्थना कर सकते हैं। डॉ0 चान, कृपया प्रार्थना कीजिये कि आज की रात कोई यीशु पर विश्वास लाये।! आमीन।

(संदेश का अंत)
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संदेश के पूर्व बाईबल में से पढ़ा गया श्री ऐबेल प्रुद्योमें द्वारा: 1 पतरस 2:1-8
संदेश के पूर्व एकल गीत श्री बैंजामिन किनकैद ग्रिफिथ द्वारा गाया गया :
(‘‘क्योंकि वह मेरे लिये अनमोल है’’ द्वारा चाल्र्स एच.गेिब्रएल,1856-1932)


रूपरेखा

मसीह केवल सच्चे परिवर्तित लोगों के लिये बेशकीमती है!

डॉ0 आर.एल.हिमर्स

1. प्रथम, वे कौन हैं जो विश्वास करते हैं? यशायाह 53:3

2. िद्वतीय, जो विश्वास करते हैं उनके लिये मसीह बहुमूल्य क्यों है? 1कुरिथियो 1:30-31ं