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लहू - साधारण या बहूमूल्‍य?

THE BLOOD – COMMON OR PRECIOUS?
(Hindi)

द्वारा डॉ0आर.एल.हिमर्स,जूनियर
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

रविवार की सुबह, नवं. 17,2013 को लॉस एंजीलिस के बैपटिस्‍ट टेबरनेकल में
दिया गया संदेष।
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord’s Day Morning, November 17, 2013


आज प्रातः मैं चाहता हूं कि आप नये नियम की इन दो आयतों को ध्‍यान से देखें जो मसीह के लहू का वर्णन करती है। पहले इब्रानियों 10:29 को पढ़िये। इस पद के बीच में एक वाक्‍यांष है जो लहू का वर्णन करता है,

‘‘अपवित्र वस्‍तु'' (इब्रानियों 10:29)

अब 1पतरस 1:19 को पढ़ें। यहां लहू का इस प्रकार वर्णन है,

‘‘मसीह का बहुमूल्‍य लहू'' (1पतरस 1:19)

कृपया अपनी बाईबल खुली रखें।

कुछ रात पहले मैं इन दोनों पदो के ऊपर विचार कर रहा था। यह पूरा संसार दो समूहों में बंटा हुआ है : (1) वे जो मसीह के लहू को ‘‘अपवित्र जानते हैं,'' और (2) वे जो ‘‘मसीह के लहू को बहुमूल्‍य'' समझते हैं। इनमें से मसीह के लहू के लिये आप का मत क्‍या है?

1. प्रथम, क्‍या आप मसीह के लहू को ‘‘अपवित्र वस्‍तु'' जानते हैं?

अगर आप इब्रानियों 10:26-31 के संपूर्ण भाग को पढ़ते हैं जो अभी श्रीमान प्रुदोमे ने कुछ क्षण पूर्व पढ़ा है, तो आप देखेंगे कि यह उनकी ओर संकेत देता है जो ‘‘जानबूझ कर पाप करते हैं'' और इसीलिये परमेष्‍वर उन का न्‍याय करेगा, जैसा हमने आज प्रातः इस पद में से पढ़ा, जो ‘‘अपवित्र जानने'' वाक्‍यांष के दो पद पष्‍चात मिलता है। इब्रानियों 10:31 को देखिए।

‘‘जीवते परमेष्‍वर के हाथों में पड़ना भयानक बात है'' (इब्रानियों 10:31)

आप बैठ सकते हैं।

डॉ0 जे.वरनॉन मैगी ने इस पद के विषय में कहा है

...परमेष्‍वर का न्‍याय उन सब के लिये हैं (जो)े...मसीह के वाचा के लहू को.....अपवित्र वस्‍तु जानते है..... ‘‘मेरे मित्र अगर मसीह ने, जो आपके लिये क्रूस पर बलिदान दिया है, आप इस सत्‍य से इंकार करते हो, तो आपके लिये सिवाय न्‍याय के कुछ नहीं है। आपके लिये तो किसी भी प्रकार की आषा नहीं बचती। (जे.वर्नान मैगी,टी.एच.डी.,थ्रू दि बाईबल,थॉमस नेलसन पब्‍ल्‍षिर्स, 1983,वॉल्‍यूम 5,पृष्‍ठ 578;इब्रानियों 10:31 पर व्‍याख्‍या)

आप कह सकते हैं कि, ‘‘मैं नहीं सोचता कि मसीह का लहू अपवित्र है। मैं सोचता हूं कि यह हरेक जन के लहू के समान है। मसीह के लहू में ऐसी कोई विष्‍ोष बात नहीं थी।'' अगर, आप सोचते हैं कि आप दोषी है - क्‍योंकि ग्रीक भाषा में ‘‘अपवित्र'' को ‘‘कोईनॉज'' कहा जाता है और इसका अर्थ होता है ‘‘सबके लिये'' (स्‍ट्रांग,नंबर2839)। जॉर्ज रिकर के अनुसार, ‘‘साधारण, अर्थात कई लोगों द्वारा बांट लिया गया'' होता है। यही ‘‘अपवित्र'' का अर्थ है। इसका अर्थ है कि यीषु का लहू सभी के लिये है - ‘‘कई लोगों द्वारा बांट लिया गया,'' जैसा जॉर्ज रिकर बेरी इसे समझाते हैं।

मुझे ऐसा लगता है कि डॉ. जॉन मेक आर्थर मसीह के लहू को ‘‘एक साधारण वस्‍तु'' के रूप में देखते हैं जब वह कहते हैं कि, ‘‘उसके लहू में बचाने की ताकत नहीं है'' (मेक आर्थर स्‍टडी बाईबल, इब्रानियों 9:7)। इब्रानियों 9:14 में वर्णित षब्‍द ‘‘मसीह का लहू'' के ऊपर, डॉ0 मेकआर्थर ने अपनी व्‍याख्‍या लिखी जहां उनका कथन है, ‘‘मृत्‍यु के स्‍थान पर लहू का प्रयोग किया गया है'' (इब्रानियों 9:14 पर व्‍याख्‍या)। उन्‍होंने थियोलॉजी की समीक्षा में (पृष्‍ठ क्रमांक 2192) यह लिखा है कि बाईबल में ‘‘मौखिक रूप से प्रत्‍येक षब्‍द प्रेरित है।'' परन्‍तु इब्राानियों 9:14 में जिस ‘‘हाईमा,'' षब्‍द का प्रयोग हुआ है उसका अर्थ होता है ‘‘लहू।'' और ‘‘लहू'' को मृत्‍यु के स्‍थान पर प्रयुक्‍त होने वाला षब्‍द कहना अर्थात इस बात का इंकार करना है कि बाईबल में ‘‘मौखिक रूप से प्रत्‍येक षब्‍द प्रेरित वचन'' है। जब डॉ0 मेक आर्थर कहते हैं कि, ‘‘उसके लहू में बचाने की सामर्थ नहीं है,'' तो यह मुझे इब्रानियों में वर्णित ‘‘लहू को अपवित्र जाना'' के बहुत नजदीक का कथन लगता है (इब्रानियों 10:29)। और इसी पद इब्रानियों 10:29 में वाचा के लहू को अपवित्र जानने के लिये भारी चेतावनी भी दे रखी है! ऐसी षिक्षा जो प्रचारक देते हैं उस षिक्षा में जीवन का अभाव है। यह रूखी व मृत षिक्षा है। डॉ0 मार्टिन ल्‍यॉड-जोन्‍स ने कहा था,

     पुनर्जागरण के प्रत्‍येक काल खंड में, बिना अपवाद के, मसीह के लहू के ऊपर हमेषा जोर दिया गया उस समय जो गीत गाये जाते थे वे मसीह के लहू के ऊपर केंन्‍द्रित होते थे। मैं कई भाषाओं में उन गीतो का उद्धरण दे सकता हूं। इससे बढकर उन गीतों की ओर कोई विष्‍ोषता नहीं होती थी। हम इसे देखते हैं, पौलुस ने किस प्रकार - कुलुस्‍सियों 1 में इसका वर्णन किया -‘‘मेल मिलाप करके'' - उसने किस प्रकार मेल मिलाप किया? ‘‘........क्रूस पर बहे हुए लहू के द्वारा'' (पद 20)
     यद्यपि मैं जानता हूं कि जो मैं अभी इस प्रकार की बात कर रहा हूं वह वर्तमान समय में लोगों को पसंद आने वाली नहीं है। ऐसे भी मसीही प्रचारक हैं जो इस लहू के विषय को हल्‍का जानते हैं और स्‍वयं को ऐसा करने के द्वारा बुद्धिमान समझते हैं। वे तो लहू के इस विषय को नापसंद करके लगभग हटा ही देते हैं..... और इसीलिये कलीसिया में उन्‍नति नहीं हो रही है। पुर्नजागरण काल में ऐसा नहीं था। कलीसिया क्रूस में गौरवान्‍वित पाई जाती थी, वह इस लहू का गुणगान करती थी। और जैसा कि पत्रियों का लेखक इब्रानियों में इस प्रकार लिखता है, कि हमें यीषु के लहू के द्वारा उस नए और जीवते मार्ग से पवित्र स्‍थान में प्रवेष करने का हियाव हो गया है, इब्रानियों 10:19 पद को पढ़िये (मार्टिन ल्‍यॉड -जोन्‍स, एम.डी., रिवाईवल,क्रास वे बुक्‍स,1994 संस्‍करण,पृष्‍ठ 48)

मैं आप को सच कहना चाहता हूं। यदि यीषु का लहू आपको महत्‍वपूर्ण नहीं जान पड़ता है तो आप एक खोए हुए इंसान हैं, और आप अनंत की पीड़ा भोगने वाले हैं, आप सच्‍चे मसीही नहीं हैं।

एक बीस वर्षीय युवती जो हमारे चर्च में आती है, उसकी गवाही का एक भाग इस प्रकार है। उसने बताया,

मैं दुख और निराषा में झूल रही (थी)। मानसिक रूप से मैं जानती थी कि मैं पापी हूं किंतु मुझमें अपने पापों को लेकर बहुत अधिक आत्‍म दया का भाव जीवित था। आखिरकार पवित्र आत्‍मा ने मुझे मेरे पिछले पापों के प्रति सचेत किया। उन पापों ने मुझे इस तरह घेर लिया था कि मैं उनसे बाहर ही नहीं निकल पाती थी। मुझे आष्‍चर्य होता था, ‘‘मैं ऐसे पाप कैसे कर सकती थी?'' पवित्र आत्‍मा ने मुझे प्रकाषन दिया कि मेरे अंदर एक दुष्‍ट व छली हृदय हैं और मेरे स्‍वभाव की भ्रष्‍टता के कारण मेरे पापों का जन्‍म हुआ। मैं पूर्ण रूप से यह नहीं समझा सकती कि अपने हृदय के अंधकार व विकृत दषा को देखना क्‍या होता है। मैं इतनी षर्मसार थी कि परमेष्‍वर मेरे उन पापों को जानता है। मैं स्‍वयं को सर्वज्ञ परमेष्‍वर के सामने एक घृणित व्‍यक्‍ति महसूस कर रही थी वह परमेष्‍वर जो मेरे विचार और इरादे जानता था; जो मैंने किया,यहां तक कि मेरा चर्च में सहयोग करना भी, स्‍वार्थीपन के पाप में डूबा हुआ था। हर बार जब मैं चर्च में जाती तो स्‍वयं को षुद्ध मसीहियों के सामने कोढी जैसा महसूस करती। इतना होने के उपरांत भी, मैंने यीषु पर विष्‍वास नहीं रखा। ‘‘यीषु'' मेरे लिये मात्र एक षब्‍द था, एक सिद्धान्‍त था या कोई ऐसा जन था जो उपस्‍थित तो है परन्‍तु मुझसे बहुत दूर है। मैं यीषु के प्रति फौलादी रूप में विरोधी थी (मैं यीषु को नहीं चाहती थी)। यीषु को (ढूंढने) के स्‍थान पर, मैं उद्धार का अनुभव लेना चाह रही थी, और कुछ ऐसा ‘‘अनुभव'' चाह रही थी जो मेरे विष्‍वास को (सिद्ध) कर सके।

यह जवान महिला वास्‍तव में बहुत परेषान लग रही थी। उसने यद्यपि स्‍वयं की गवाही को बहुत अच्‍छे से ढंपने की कोषिष की। कई लोग नहीं समझ पा रहे थे कि वह कितने भयानक द्वंद से गुजर रही थी। वह भी जॉन बुनयन के समान अंतर्मन की घोर पीड़ा झेल रही थी।

मैं हाई स्‍कूल और कॉलेज की उम्र वाले युवकों, युवतियों को लगभग पचास वर्षो से ऊपर समय से परामर्ष दे रहा हूं। मैंने यही पाया है कि उनमें से बहुत जवान - बहुत बहुत से जवान - तनाव में हैं, भयभीत हैं और उलझन में हैं ठीक - इसी प्रकार जैसे यह जवान युवती थी। कई जवान तो नष्‍ो के आदी हो जाते हैं ताकि अपने मन की आंतरिक पीडा को भुला सके। कई जवान अपने खाली दिमागों को भरने के लिये अंधाधुंध वीडियेा गेम्‍स खेलना षुरू कर देते हैं। कुछ पोर्नाेग्राफी के आदी हो जाते हैं। अगर उनके दिमागों में सेक्‍स भरा होता है, तो वे स्‍वयं को परेषानियों से मुक्‍त समझते हैं। मैंने अभी अभी पढ़ा था कि जवान बच्‍चों में आत्‍महत्‍या के लिये नंबर दो व नंबर एक कारण जिम्‍मेदार हैं। वे इतने गहरे अवसाद में चले जाते हैं, इतने नाखुष रहते हैं कि आत्‍महत्‍या जैसा कदम उठा लेते हैं। एक जवान लड़के ने मरने से पहले यह नोट छोड़ा कि, ‘‘मैं अपने दिमाग को आराम देने और परेषानियों को भूल जाने का, इससे अच्‍छा कोई दूसरा रास्‍ता नहीं सोच सकता।''

मैंने यह पाया है कि 15 से 25 वर्ष की उम्र आज के युग के लोगों के लिये बहुत मुष्‍किल होती है। आपके मित्र आपको छोड़ सकते हैं। बॉयफ्रेड और गर्लफ्रेंड आपको अकेला छोड़ सकते हैं। स्‍कूल की पढ़ाई कठिन लगती हो, और पढ़ने में ध्‍यान केंन्‍द्रित करना मुष्‍किल लगता हो। कोई रास्‍ता सूझ नहीं पड़ता है!

परमेष्‍वर ने आपके पापों से छुटकारे के लिये एक रास्‍ता दिया है - किंतु अभी आप उस मार्ग पर इतना ध्‍यान नहीं देते हैं। परमेष्‍वर ने अपने एकमात्र पुत्र को क्रूस पर मरने व लहू बहाने के लिये भेजा ताकि वह अपने लहू से आपके पापों को धो सके। किंतु यह बात भी आपको समझ नहीं आती है। आप में से कुछ सोचते हैं कि, ‘‘कैसे किसी व्‍यक्‍ति का 2000वर्ष पूर्व बहाया गया लहू आज मेरे पापों को धो सकता है?'' इसलिये आप इन विचारों के द्वंद में उस जवान युवती के समान चढ़ते - उतरते रहते हैं।

हमारे चर्च की एक युवती चार कॉलेज के कोर्स पढ़ाती है। उसने अपने पिता को बताया कि उसके क्‍लास में कितने ही विद्यार्थी हैं जो गलत बातें सोचते हैैं। उसने बताया कि जवान यह जानते हैं कि राजनीतिज्ञ किसी भी चीज को नहीं सुधार सकते। वे यह जानते हैं कि यह संसार पूरा गड़बड़ व परेषानी से - भरा हुआ हैं और उनके लिये कोई आषा नहीं है। ऐसे में वे क्‍या करते हैं? वे अपना सिर एक के बाद दूसरे वीडियो गेम में खपा लेते हैं। या अपने अंदर के असंतोष को ड्रग्‍स और मेरीजुएना लेकर दर्द को भूल जाना चाहते हैं। कुछ जवान तो स्‍वयं को अंतहीन काम में डुबो लेते हैं ताकि अपनी समस्‍याओं को भूल जाऐं। ऐसे जवान लोगों में आत्‍महत्‍या की प्रवृति बढ़ रही है। कितना दुखदायी अंत है! इन जीवनों का! केवल उन्‍हे यह समझना होगा कि इन सब की जड़ पाप में छुपी हुई है। उन्‍हे केवल इस आयत पर विष्‍वास लाना है कि ‘‘उसके पुत्र यीषु का लहू हमें सब पापों से षुद्ध करता है'' (1यूहन्‍ना 1:7)। परन्‍तु वे भी इस संसार के बहुत सारे अन्‍य लोगों के समान यह सोचते हैं कि यीषु का लहू एक साधारण - सा लहू है जो इतना महत्‍वपूर्ण भी नहीं है कि उसके बारे में सोचा जाए। और यही हमको अब दूसरे बिंदु पर ले चलता है।

2. दूसरा, क्‍या आप सोचते हैं कि यीषु का लहू ‘‘कीमती'' है?

प्रेरित पतरस ने ऐसा समझा था। उसने कहा था, ‘‘तुम्‍हारा छुटकारा नाषमान चीजों से नहीं......परन्‍तु मसीह के कीमती लहू से हुआ'' (1 पतरस 1:18,19)। क्‍योंकि वह जानता था कि एक पापी होना कैसा लगता है। वह जानता था कि जब सब मित्र छोड़ जाते हैं तो कैसा लगता है। वह जानता था कि अकेले एक उलझन भरे दिमाग के साथ रहना कैसा लगता है। वह जानता था कि परमेष्‍वर पर से भरोसा उठ जाना क्‍या होता है। वह जानता था कि अपने करीबी दोस्‍त को धोखा देना क्‍या होता है, जब अकेले में उस धोखा देने के अहसास को लिये हुए रोना पडे़ तब कैसा लगता है। वह जानता था कि पापी होना कैसा लगता है!

इसलिये वह जानता था कि तुम्‍हारे पापों का मोल चुकाया जा सकता है, तुम पापों की जकड़न से छुडाये जा सकते हो -‘‘मसीह के बहुमूल्‍य लहू बहाये जाने के द्वारा'' (1पतरस 1:19)। ‘‘बहुमूल्‍य'' का अर्थ होता है, बहुत मूल्‍य वाला! ‘‘बहुमूल्‍य'' अर्थात चांदी और सोने से भी अधिक कीमती! एक कोरस है जो इस विषय में सब कहती है,

हीरे की एकड़ जमीन हो, या पहाड़ हो सोने का बना
   नदियां हो चांदी की, जवाहरात न जाने कितने;
ये सब मिलकर भी तुम्‍हें व मुझे खरीद नहीं सकते कभी
   सोते समय चैन हो और विवेक पर भी कोई भार न हो।
एक दिल और दिमाग, हो जो संतुष्‍ट हो पूरी तरह
   यह वह दौलत है जो पैसे से खरीदी नहीं जा सकती।
अगर यीषु आपके पास है, तो आत्‍मा आपकी धनी है
   हीरो की एकड़ भूमि या सोने के पहाड़ से भी बढ़कर
(‘‘हीरे की एकड भूमि'' आर्थर स्‍मित द्वारा रचित, 1959)

या, जैसे मि. ग्रिफिथ ने जो कुछ क्षण पहले जो गीत गाया,

हे पापी, आ, जो निराष और खोया हुआ है,
   यीषु का लहू तुझे मुक्त कर सकता है;
क्‍योंकि उसने बड़े से बड़े पापी को भी बचाया,
   जैसे उसने मुझ घृणित को बचाया।
और मैं जानता हूं, हां, मैं जानता हूं, यह बात
   यीषु का लहू घृणित को भी षुद्ध कर सकता है।
और मैं जानता हूं, हां, मैं जानता हूं, यह बात
   यीषु का लहू घृणित को भी षुद्ध कर सकता है।

और मैं जानता हूं, हां, मैं जानता हूं,
   यीषु का लहू घृणित को भी षुद्ध कर सकता है।
और मैं जानता हूं, हां, मैं जानता हूं,
   यीषु का लहू घृणित को भी षुद्ध कर सकता है।
(‘‘हां, मैं जानता हूं!‘‘ एना डब्‍ल्‍यू.वाटरमेन रचयिता, 1920)

वह जवान युवती जिसका वर्णन मैंने पहले किया इस प्रकार कहती चली गई,

मेरे पाप जैसे आधारहीन समुद्र जैसे फैले हुए थे। मैं अब उन पापों का भार सहन नहीं कर पा रही थी। मुझे मसीह की अत्‍यंत आवष्‍यकता थी! मुझे यीषु के लहू की आवष्‍यकता थी! मैंने घुटनों के बल बैठकर प्रार्थना की.......और स्‍वयं यीषु पर विष्‍वास किया। (मैं स्‍वतंत्र थी) मेरी भावनाओं की बनाई मूरतों से, मेरे मनोविष्‍लेष्‍णों से, और भरोसा दिलाये जाने के लिये पैदा होती इच्‍छाओं से .......मैंने मेरे मन व दिमाग में बसी तमाम चीजों को मसीहा को दे दिया...उसने मेरे पापों को अपने लहू में डुबो लिया;उसने मेरे ऊपर से मेरे पापों का भारी बोझ हटा दिया!......मेरे जीवन के ऊपर मुहर लग गई ‘‘अब दोषी नहीं'' यीषु के लहू की मुहर!.... मैं तो पूर्ण रूप से वह संतुष्‍टि का अहसास व वह षांति जो मेरे पाप क्षमा होने के बाद व परमेष्‍वर का न्‍याय संतुष्‍ट होने के बाद मुझे मिली उसका वर्णन भी नहीं कर सकती। मैं चाहती हूं, कि वे लोग जो मेरे समान संघर्ष कर रहे हैं, उन्‍हे भी यीषु से क्षमा प्राप्‍त हो सके! उसने मेरे पाप का दोष अपने ऊपर ले लिया। उसने पूरा मोल चुका दिया!!! सुसमाचार वह, ‘‘षुभ संदेष,'' जो मुझे पहले नीरस और निर्जीव प्रतीत होता था, अब वह मेरे हृदय को आनंद प्रदान करने लगा और मेरा हृदय खुषी व धन्‍यवाद से भर जाता है जब मैं यीषु के संदेष सुनती हूं.

मैं इससे अधिक और क्‍या कह सकती हूं? अगर आप यीषु के पास आते हो तो आप यीषु के लहू को ‘‘साधारण चीज'' नहीं समझोगे। ओह, हां! तब आप बडे़ उत्‍साह व प्रसन्‍नता के साथ कहेंगे, ‘‘यह मसीह का बहुमूल्‍य लहू है'' (1पतरस 1:19)।

अगर आप हमसे जानना चाहते हैं कि यीषु का लहू आपको किस प्रकार षुद्ध कर सकता है, तो कृपया अपनी सीट छोड़कर अॉडिटोरियम के पिछले हिस्‍से में अभी आ जाइये। डॉ0कगान आपको दूसरे कमरे में ले जायेंगे जहां हम बात कर सकते हैं व प्रार्थना कर सकते हैं। कृपया इसी समय अॉडिटोरियम के पिछले हिस्‍से में जाइये। डॉ0चान, कृपया प्रार्थना कीजिये कि आज प्रातः कोई यीषु पर विष्‍वास लाये। आमीन!

(संदेश का अंत)
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संदेष के पूर्व धर्मषास्‍त्र पाठ का पठन श्री ऐबेल प्रुदोमे द्वारा किया गयाः इब्रानियों 10:29-31
संदेष के पूर्व एकल गान श्री बैंजामिन ग्रिफिथ द्वारा प्रस्‍तुत किया गयाः
‘‘हां, मैं जानता हूं!'' (एना डब्‍ल्‍यू.वाटरमेन रचयिता, 1920)


रूपरेखा

लहू - साधारण या बहूमूल्‍य?

द्वारा डॉ आर एल हिमर्स जूनियर

‘‘अपवित्र वस्‍तु'' (इब्रानियों 10:29)

‘‘मसीह का बहुमूल्‍य लहू'' (1 पतरस 1:19)

1- प्रथम, क्‍या आप मसीह के लहू को ‘‘अपवित्र वस्‍तु'' जानते हैं?
इब्रानियों 10:31 ; 1 यूहन्‍ना 1:7

2- दूसरा, क्‍या आप सोचते हैं कि यीषु का लहू ‘‘कीमती'' है?
1 पतरस 1:18,19