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याकूब की मिस्त्र को तीर्थयात्रा

(उत्पति की किताब पर धार्मिक प्रवचन क्रमांक 73)
JACOB’S PILGRIMAGE TO EGYPT
(SERMON #73 ON THE BOOK OF GENESIS)
(Hindi)

डो. आर. एल. हायर्मस, जुनि. द्वारा
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

लोस एंजलिस के बप्तीस टबरनेकल में प्रभु के दिन की षाम, 3 मार्च, 2013 को दिया हुआ धार्मिक प्रवचन
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord’s Day Evening, March 3, 2013


याकूब के पुत्र मिस्त्र खाना खरीदने गए थे, क्योंकि वहाँ कनान देष में बड़ा अकाल था। जब वे वहाँ थे, उन्हे आष्चर्य हुआ जाना कि उनका छोटा भाई यूसुफ सारे मिस्त्र का प्रधानमंत्री बनाया गया था। उन्होंने यूसुफ को गुलामों की तरह बेचा था, परंतु परमेष्वर उसके साथ थे और उसे बड़े सामर्थ्य में उठाया। अब भाई लौटकर आए और उनके पिता याकूब को खुष खबर दी की यूसुफ अभी भी जीवित था। याकूब ने पहले अपने बेटो का विष्वास नहीं किया, परंतु जल्दी ही उन्होंने उसे समझाया कि यह सही था, और याकूब ने कहा,

‘‘बस, मेरा पुत्र यूसुफ अब तक जीवित है; मैं अपनी मृत्यु से पहले जाकर उसको देखूँगा'' (उत्पति 45:28)।

वह हमें इस षाम अपने विशय पर ले जाता है। मेहरबानी करके खड़े रहो और उत्पति 46:1-4 पर फिरो।

‘‘तब इस्त्राएल अपना सब कुछ लेकर बेष्‍ोर्बा को गया, और वहाँ अपने पिता इसहाक के परमेष्वर को बलिदान चढ़ाया। तब परमेष्वर ने इस्त्राएल से रात को दर्षन में कहा, हे याकूब, हे याकूब! उसने कहा, क्या आज्ञा। उसने कहा, मैं परमेष्वर हूँ, तेरे पिता का परमेष्वर; तू मिस्त्र में जाने से मत डर; क्योंकि मैं तुझ से वहाँ एक बड़ी जाति बनाऊँगा। मैं तेरे संग संग मिस्त्र को चलता हूँ, और मैं तुझे वहाँ से फिर निष्चय ले जाऊँगा; और यूसुफ अपने हाथ से तेरी आँखो को बन्द करेगा'' (उत्पति 46:1-4)।

आप बैठ सकते हो। मेहरबानी करके आपकी बाइबल उस जगह खुल्ली रखे।

मैं जब बहुत उदार धार्मिक पाठषाला में चालीस वर्श पहले जाता था, उन्होंने हमें कहा कि इस पदोने याकूब और इस्त्राएल के नामों को आगे - पीछे हठाया है, क्योंकि वो विभिन्न लेखको या ‘‘प्रकाषको'' द्वारा लिखे गए थे। ‘‘इ'' ‘‘E'' लेखको ने सदा उसे ‘‘याकूब'' ही बुलाया था, जब कि बाद में प्रकाषको ‘‘आर'' ‘‘R'' ने ‘‘इस्त्राएल'' नाम डाला। मैंने उनसे पूछा, ‘‘आप वह कैसे जानते हो?'' वे उनके सिद्धांत मुझे कभी भी मना नहीं सके। डॉ. एच. सी. ल्युपोल्ड, लुथरन भाश्यकार, ने वो उद्धार सिद्धांत का अस्वीकार किया और कहा, ‘‘ऐसे दोशदर्षी साधन द्वारा कुछ भी प्रमाणित कर सकते है'' (एच. सी. ल्युपोल्ड, डी.डी., एक्सपोझीषन अॉफ जेनेसीस, उत्पति की स्पश्टता, बेकर बुक हाऊस, 1985 की प्रत, भाग ॥, पृश्ठ 1106, उत्पति 46:1-4 पर संभाशण)।

डो. ल्युपोल्ड ने सूचना दी की दो नाम जानबूझकर इस्तेमाल किए गए थे - याकूब व्यक्ति का संदर्भ करता था, और इस्त्राएल संदर्भ करता है उसके राज्य के राश्ट्र का। वो षायद सही भी हो, परंतु मुझे ऐसा लगता है कि स्पर्जन की स्पश्टता मुख्य कारण है नाम के आगे पीछे बदलने का। स्पर्जनने कहा कि उसका पुराना नाम ‘‘याकूब यहाँ इस्तेमाल हुआ था जब वो धर्मभ्रश्ट था, और उसका नया नाम ‘‘इस्त्राएल'' इस्तेमाल हुआ था जब वह पुनःजवित हुआ था, जैसे हम उत्पति 45:27 और 28 में देखते है : ‘‘... तब उन्होंने अपने पिता याकूब ... और इस्त्राएल ने कहा, बस मेरा पुत्र यूसुफ अब तक जीवित है; मैं अपनी मृत्यु से पहले जाकर उसको देखूँगा'' (उत्पति 45:27,28) मैं जान चूका हूँ वही तरीका है नाम बदली के समझाने का। ‘‘याकूब'' अर्थ है ‘‘कपटी निकालनेवाला''। ‘‘इस्त्राएल'' का अर्थ है ‘‘प्रभु का राजकुमार''। सारे माननेवालों के पास है पुराना गुण, और नया गुण भी। जब वो अपने पुराने गुण द्वारा प्रभावित हुआ था, परमेष्वर ने उसे ‘‘याकूब'' बुलाया। परंतु जब वह ‘‘पुनःजीवित'' हुआ था वो उसके नये गुण द्वारा प्रभावित और इसलिये बुलाया गया ‘‘इस्त्राएल''। वह स्पश्टता पवित्रषास्त्र को सही है, और यह जीवन को भी सही है - जैसे हर एक मसीही अनुभव द्वारा जानते है। स्पर्जन ने कहा, ‘‘‘याकूब' उसका नाम था जन्म के स्वभव (गुण) का; ‘इस्त्राएल' नाम था उसके नये और आध्यात्मिक स्वभाव का'' (सी. एच. स्पर्जन, मेट्रोपोलीटन टबरनेकल पुलपीट, क्रमांक 2,116, पृश्ठ 1)। उसके नये स्वभाव में वह प्रभु को विष्वास में आज्ञाकारी होने तैयार था, और मिस्त्र जाने तैयार था, उसके पुत्र यूसुफ के पास। परंतु उसके पुराने स्वभाव में वह जाने को डरता था। इसीलिये परमेष्वर ने उसे राहत दी उसके वहाँ जाने से पहले। इस प्रकार हम याकूब की मिस्त्र को तीर्थयात्रा में विष्वास और डर दोनो देखेंगे। इस स्पश्टीकरण के साथ, हम तुरंत ही विशय पर जाते है, जहाँ हम सीखते है दो महान् सच्चाई के बारे में जो हमें हमारे मसीही जीवन में सहाय करता है।

1. पहला, हम याकूब के विष्वास के बारे में सीखते है।

जैसे ही याकूब और उसके परिवार ने उनकी यूसुफ को देखने की यात्रा षुरू की, वे बेष्‍ोर्बा में रूके, जब वे अभी भी कनान देष की भूमि पर थे। वे वहाँ रूके जब यूसुफ ने बलि चढ़ाई। मेहरबानी करके खड़े रहो और उत्पति 46:1 जोर से पढ़ो।

‘‘तब इस्त्राएल अपना सब कुछ लेकर बेष्‍ोर्बा को गया, और वहाँ अपने पिता इसहाक के परमेष्वर को बलिदान चढ़ाया'' (उत्पति 46:1)।

आप बैठ सकते हो।

आर्थर डब्ल्यु पींक ने कहा, ‘‘इस प्रकार, याकूब के बारे में उसकी लंबी यात्रा मिस्त्र की षुरू होने के बाद जो पहली बात लेखप्रमाण की गई थी, वो थी परमेष्वर को बलिदान चढ़ाना। लंबे वर्शो की अनुभव की षाला में षिस्तता थी ... उसे सीखाया परमेष्वर को पहले रखने; (उससे पहले की) वो आगे यूसुफ को देखने जाए, वह रूकता है, उसके पिता इसहाक के प्रभु की पूजा करने!'' (ग्लीनींग्स इन जेनेसीस, उत्पति में बटोरना, मुडी प्रेस, 1981 की प्रत, पृश्ठ 313)।

मेरे अपने मसीही अनुभव में पहले मैंने सुना था लोगों को कहते कि वे पवित्र आत्मा द्वारा कुछ निष्चित काम करने ‘‘ले जाए गए'' (Led), जैसे उनकी सदस्यता को दूसरे कलीसिया में बदलने। परंतु मैंने देखा बारम्बार, कि आमतौर पर इसका परिणाम बुरा होता है। पहले मैंने निष्चय किया था कि मैं अचानक बदलाव नहीं करूँगा, और कि मैं जीवन के किसी भी बड़े निर्णय में पहले परमेष्वर को आगे रखूंगा। चाहे मैं जहाँ रहता था वहाँ रहना पसंद न करूँ, मैं बदलाव नहीं करूँगा जब तक मेरे याजक और दूसरे वरिश्ठ मसीही मेरी कलीसिया में, मुझे सलाह दे चाहे जो भी बदलाव मेरा सामना करे। कभी कभी यह भी करना कठिन महसूस होता था, मैं बहुत सचेत हो जाता मेरी अपनी भावना और इच्छाओं का अनुकरण करने, परंतु पहले प्रभु को रखूंगा; और सदा सावधान रहूँगा इब्रानियों 13:17 के बारे में सोचने,

‘‘(अपने अगुवों की आज्ञा मानो और उनके अधीन रहो); क्योंकि वे उनके समान तुम्हारे प्राणों के लिये जागते रहते है जिन्हें लेखा देना पड़ेगा; वे यह काम आनन्द से करें, न कि ठंडी सांस ले लेकर, क्योंकि इस दषा में तुम्हें कुछ लाभ नहीं'' (इब्रानियों 13:17)

और 1 थिस्सलुनीकियों 5:12,13।

‘‘हे भाइयों, हम तुम से विनंती करते है कि जो तुम में परिश्रम करते है, और प्रभु में तुम्हारे अगुवें है, और तुम्हें षिक्षा देते है, उनका सम्मान करो। और उनके काम के कारण प्रेम के साथ उनको बहुत ही आदर के योग्य समझो। आपस में मेलमिलाप से रहो'' (1 थिस्सलुनीकियों 5:12, 13)।

मैंने हमेषा मेरे याजक डो. तीमोथी लीन, और मेरे सलाहकार और विष्वसनीय मंत्री डो. मर्फी लूम की सलाह ली है, जब कभी बड़े जीवननिर्णय का सामना किया था। मैंने निष्चय किया कि मैं उनकी सलाह का अनुःकरण करूँगा चाहे मुझे वह उस समय सही न लगे तो भी। यह बार बार सही हुआ करने के लिये। बाइबल कहता है,

‘‘तू अपनी समझ का सहारा न लेना, वरन् सम्पूर्ण मन से यहोवा पर भरोसा रखना। उसी को स्मरण करके सब काम करना, तब वह तेरे लिये सीधा मार्ग निकालेगा। अपनी दृश्टि मैं बुद्धिमान न होना; यहोवा का भय मानना, और बुराई से अलग रहना। ऐसा करने से तेरा षरीर भला चंगा, और तेरी हड्डियाँ पुश्ट रहेंगी। ... हे मेरे पुत्र, यहोवा की षिक्षा से मुँह न मोड़ना, और जब वह तुझे डाँटे, तब तू बुरा न मानना, क्योंकि यहोवा जिस से प्रेम रखता है उसको डाँटता है, जैसे कि बाप उस बेटे को जिसे वह अधिक चाहता है। क्या ही धन्य है वह मनुश्य जो बुद्धि पाए, और वह मनुश्य जो समझ प्राप्त करें'' (नीतिवचन 3:5-8, 11-13)।

याकूब का विष्वास उसे रूकने और परमेष्वर के लिये बलिदान तक ले गया बेष्‍ोर्बा में, और जैसे उसने किया, प्रभु ने उसकी निर्दोश इच्छा उसे स्पश्ट की, चाहे पहले याकूब उनकी आज्ञा मानने से ड़रता था।

अचानक से, जैसे मैं यह लिख रहा था, मैंने मेरी मेज से एक छोट़ी किताब उठायी जो मैंने नहीं सोचा इस धार्मिक प्रवचन के साथ कुछ कर सकुं। यह पृश्ठ 17 पर खुल्ली और मैंने पुराने दक्षिणी बेपटीस्ट याजक की सलाह पढ़ी, जो वश्‍ोार् पहले लीखी गयी थी - उनके मरने से पहले। डो. डब्ल्यु हश्‍ोर्ल फोर्ड ने कहा,

     नीतिवचन 3:6 दर्षाता है वह मार्गदर्षन, ‘‘आपके सारे तरीको से उन्हें स्वीकार करों, और वे आपके रासतों को मार्गदर्षन करें।'' मैं व्यक्तिगतरूप से जानता हूँ कि जब मैंने उनके नेतृत्व का अनुःकरण किया मुझे षान्ति और विजय मिला, जब मैंने उनका अनुकरण करने से इन्कार किया मैंने षोक और पराजय पाया।
     आज बहुत से निर्णय करने है। अगर आपको अच्छी पगार के साथ नौकरी का प्रस्ताव दूसरे षहर में दिया जाए। क्या आप आगे दौडकर और नयी नौकरी स्वीकार करोगे या आप प्रभु के लिये रूकोगे? वहाँ पर आपके अभ्यास या आपके बच्चों के अभ्यास के बारे में निर्णय लेने है। कौनसी षाला आपके या उनके लिये सर्वश्रेश्ठ है? वहाँ पर बच्चों के बारे में भी निर्णय है। उनको आप कितनी आजादी दोगे, आप उनको कितना दबाओगे? वहाँ पर निर्णय करने है नये घर या नयी कार के बारे में। ठीक है, महान् षुद्ध करनेवाला विलम्ब में आता है ... हम परमेष्वर के आगे दौडते है, हम ढूँढते है हमारी अपनी महिमा और पाते है, हम हमारे अपने रास्ते पर जाते है। और बहुत बार टूटे मन से सब कुछ बंद कर देते है (डब्ल्यु हश्‍ोर्ल फोर्ड, डी.डी., सीम्पल सरमनस ओन लाइफ एन्ड लीवींग, जिने और जिने के तरीको पर सरल धार्मिक प्रवचन, झोन्डरवन प्रकाषक घर, 1971 की प्रत, पृपृश्ठ 17,18)।

मैंने कहा कि यह ‘‘विचित्र'' था कि मैंने वह किताब उठायी और उसके गिरने में वह पृश्ठ खुला, जैसे मैं यह लिख रहा था। मैं इस तरह की बातों में बहुत विष्वासु नहीं था, परंतु मैं सोचता हूँ कि परमेष्वर वे पन्ने मेरे ध्यान में लाये ताकि आप डो. फोर्ड की सलाह सुनो। मुख्य बात उन्होंने कही थी विलम्ब करना, जीवन - निर्णय में आगे दौडना नहीं। उन्होंने कहा, ‘‘महान् षुद्ध करनेवाला विलम्ब में आता है''। और मैं उसमें और कहूँगा कि आपके याजक की सलाह, और समयोचित (season) मसीही आगेवान की सलाह आपके कलीसिया में ढूँढने की इच्छा। मैं आपके स्थानीय कलीसिया के बारे किसी भी नेता या आगेवानो के पास नहीं जाता। कुछ प्रचारक आपकी व्याकुलता का इसतेमाल करेंगे आपको उनके कलीसिया में आने के लिये, जो बहुत नीतिषास्त्र के विरूद्ध हैं उसके अलावा, सिर्फ आपके कलीसिया में आगेवान जानते है आपकी आवष्यकता का पूरा वर्णन। याकूब बेष्‍ोर्बा में रूका, परमेष्वर को बलिदान चढ़ाया, और उनके मार्गदर्षन के लिये विलम्ब किया। वह था याकूब का विष्वास!

2. दूसरा, हम याकूब के भय के बारे में सीखते है।

अब हमने कारण जाना की याकूब उसकी मिस्त्र की तीर्थयात्रा पर रूका था। वो बेष्‍ोर्बा में हिचकिचाया था क्योंकि वो डरता था। पद तीन में हम पढ़ते है कि प्रभु ने उसे कहा, ‘‘तू मिस्त्र में जाने से मत ड़र'' (उत्पति 46:3)। वो बेष्‍ोर्बा में बलिदान चढ़ाने रूका क्योंकि उसे मिस्त्र जाने से ड़र लगता था और वो परमेष्वर के लिये रूका उनकी इच्छा उसको स्पश्ट करने।

स्पर्जन ने कहा कि याकूब रूका और बेष्‍ोर्बा में प्रभु को बलिदान चढ़ाया परमेष्वर से पूछने की वह हकीकत में मिस्त्र जाये। मैं जानता हूँ कि हठी लोग नीचा देखते किसी को भी जो हिचकिचाता है और गलत जाने से ड़रता है। इसीलिये बहुत सारे बहाना करनेवाले मसीही क्षति में ठोकर खाकर गिरते है जिस में से वे कभी बाहर नहीं आते। यह बेहतर है कि उन जैसा न बने। स्पर्जन ने कहा, ‘‘परमेष्वर को अच्छा लगता है उनके बच्चों को सही होने के लिये उत्सुक देखकर; क्योंकि वह उत्सुकता एक महान् मुद्दा है उनके सही मार्गदर्षन में ... हमें सावधान किया गया है : हमें बातों को पवित्रस्थान में समतोल वजन रखने सहाय करते है और फिर हमारा षांत, स्थिर न्याय इसका निर्णय करता है, और हम चुनते है रास्ता जो सबसे ज्यादा परमेष्वर की महिमा के लिये है'' (मेट्रोपोलीटन टबरनेकल पुलपीट, भाग 35, धार्मिक प्रवचन क्रमांक 2, 116, पृश्ठ 639)।

याकूब का ड़र स्वाभाविक था क्योंकि वो वृद्ध था। वृद्ध लोगों को बदलाव पसंद नहीं होता। वो एक कारण है ज्यादा परिपक्व लोग थोड़ी गलतियाँ करते है उनसे जो अभी भी युवा हैं और वही एक मुख्य कारण है युवा लोगों के लिये, सम्मति लेना उनके स्थानीय कलीसिया में जो वृद्ध मसीही है उनसे। आप बहुत कम योग्य हो गलतियाँ करने जब आप आपके कलीसिया में बड़ो की सम्मति लेते हो, और उनकी सलाह पर ध्यान देते हो।

फिर, भी, याकूब निःसंदेहरूप से ड़रता था मिस्त्र जाने क्योंकि उसे स्मरण था जो परमेष्वर ने उसके दादा अब्राहम को कहा था। याकूब ने सोचना षुरू किया की षायद मिस्त्र वो भूमि हो जो अब्राहम का कारण हो ‘‘अत्यन्त भय और महा अन्धकार'' के अनुभव का एक सौ वर्श पहले (उत्पति 15:12)। इस कारण वो मिस्त्र जाने से हिचकिचाता था क्योंकि उसे डर था कि उसकी सन्ताने वहाँ दुःखी होगी चार सौ वर्शों तक।

और भी, याकूब निःसंदेहरूप से भयभीय था कि मिस्त्र में उसके परिवार को बहुत से नये प्रलोभनो का सामना करना पड़ेगा। जब लोग उनके बच्चों को राश्ट्र (देष) से बड़े षहर में ले जाते है वे कईबार महसूस करते है यह ड़र, क्योंकि कोई भी बड़ा षहर बड़े प्रलोभन की जगह है। और फिर भी मुझे स्मरण है महान् धर्म प्रचारक सी.टी. स्टड ने जो कहा, ‘‘सिर्फ सलामत जगह होती है, परमेष्वर की इच्छा में''। जब परमेष्वर ने याकूब से कहा, ‘‘तू मिस्त्र में जाने से मत ड़र'' वो वहाँ विष्वास से गया। और मिस्त्र ही सिर्फ सलामत जगह थी, क्योंकि यह प्रभु की इचछा थी याकूब और उसका परिवार वहाँ जाए।

मुझे अच्छी तरह याद हे मैंने लोस एंजलिस में अपना घर कलीसिया कैसे छोड़ा और सान फ्रान्सीसको, एक बहुत उदार धार्मिक पाठषाला में गया। मैं बहुत ड़र के साथ गया, क्योंकि मैं जानता था पहिले उस समय उदार और अविष्वास गोल्डन गेट बेपटीस्ट थियोलोजीकल धार्मिक पाठषाला कैसी थी। परंतु मेरे पास पर्याप्त पैसे नहीं थे ज्यादा स्थितिपालक धार्मिक पाठषाला में जाने के लिये। मेरे याजक ने मुझे सान फ्रान्सिस्को में उस उदार धार्मिक पाठषाला में जाने को कहा। उन्होंने मुझे कहा यह मुझे हानि नहीं करेगा। एक तरह से वे सही थे। इसने मुझे लगभग नश्ट कर दिया, परंतु इसने मुझे ‘‘हानि'' नहीं की! मैं अगर वहाँ नहीं जाता तो मैं आज हूँ ऐसा प्रचारक नहीं होता। मैं सिफारिष नहीं करूँगा की कोई और युवा आदमी उदार धार्मिक पाठषाला में जाए। परंतु मेरे लिये यह एकदम सही जगह थी जाने के लिये!

परमेष्वर ने याकूब से कहा, ‘‘मैं तेरे संग मिस्त्र को चलता हूँ; और मैं तुझे वहाँ से फिर निष्चय ले जाऊँगा'' (उत्पति 46:4)ं वही था जो प्रभु ने मेरे लिये किया। वे मेरे साथ उदार धार्मिक पाठषाला गये, अईष्वरीय धार्मिक पाठषाला, और उन्होंने मुझे फिर से निष्चित ही इससे ऊपर ले आये! वो धार्मिक पाठषाला मेरा मिस्त्र और मेरा गतसमनी था। परंतु प्रभु मुझे इससे बाहर लाए, और उस अनुभव द्वारा मुझे मजबूत किया। एक पुराना गीत इसे अच्छी तरह कहता है!

‘‘आत्मा जिस पर यीषु ने सहारा दिया विष्वास दिलाने,
   मैं नहीं, मैं नहीं, निर्जन करूँगा उनके षत्रुओ को;
वह आत्मा यद्यपि सारा अधोलोक प्रयत्न करे हिलाने को,
   मैं कभी भी नहीं, नहीं कभी भी नहीं, नहीं कभी भी नहीं छोडुँगा!

जब गहरे पानी में से मैं तूझे जाने को बुलाता हूँ,
   षोक की नदी में बाढ नहीं आनी चाहिए;
क्योंकि मैं आपके साथ हूँ, आपके आर्षीवाद के लिये प्रयत्न
   और तूझे षुद्ध करे तेरे गहरे क्लेष (दुःख) से।

जब उग्र प्रयत्नों द्वारा तेरा रास्ता दृश्टिगोचर हो,
   मेरा परिपूर्ण अनुग्रह आपकी सामग्री हो;
ज्वाला आपको हानि नहीं करनी चाहिए; मैं ही चित्रित करूँगा
   आपका मण्डूर नश्ट करने, और आपका सोना षुद्ध करने।''
(‘‘नींव कितनी मजबूत है'', ‘‘K'' ‘‘क'' रीप्पोन के भक्तिगीत संग्रह में, 1787)।

परंतु वहाँ पर एक दूसरा प्रार्थनापत्र है इस वाक्यखण्ड का जो मुझे आजरात आपको देना हैं आप में से थोड़े यीषु के पास आने से ड़रते है। आपको उद्धारक का भरोसा करने का ड़र हैं मुझे आपसे षक्य उतने मजबूत षब्दों में कहने दो - ड़र दुश्टात्मा से होता है! यह परमेष्वर से नहीं है; यह ष्‍ौतानी ड़र है, ष्‍ौतान द्वारा आपको रखने और गुलाम बनाने भेजा हुआ! प्रभु ने याकूब से कहा, ‘‘तू मिस्त्र जाने को मत ड़र...'' (उत्पति 46:3)। पाप का अपराधी ठहराने से ड़रो मत। आपके मन को वहाँ नीचे जाने दो, और देखो की आपके मन में पाप है वो यर्थाथ मिस्त्र है भश्ट्राचार का।

और यीषु उद्धारक के पास जाने से मत ड़रो। स्मरण रखो कि यूसुफ यीषु का चिन्ह है! प्रभु आपके साथ नीचे है दोशसिद्धि में। प्रभु आपके साथ यीषु के पास जाएँगे, हमारे यूसुफ, और प्रभु आपको पाप से फिर से ऊपर लायेंगे! मेहरबानी करके खड़े रहो और पद तीन और चार जोर से पढ़ो।

‘‘उसने कहा, मैं परमेष्वर हूँ, तेरे पिता का परमेष्वर; तू मिस्त्र में जाने से मत ड़र; क्योंकि मैं तुझ से वहाँ एक बड़ी जाति बनाऊँगा। मैं तेरे संग संग मिस्त्र को चलता हूँ और मैं तुझे वहाँ से फिर निष्चय ले आऊँगा; और यूसुफ अपने हाथ से तेरी आँखो को बन्द करेगा'' (उत्पति 46:3,4)।

आप बैठ सकते हो। ‘‘मैं तेरे संग संग मिस्त्र को चलता हूँ और मैं तुझे वहाँ से फिर निष्चय ले आऊँगा; और यूसुफ अपने हाथ से तेरी आँखो को बन्द करेगा''! यूसुफ अपने हाथ से याकूब की आँखो को बन्द करेगा मृत्यु में। परंतु यीषु, हमारे यूसुफ अपना हाथ आपकी आँखो पर रखेंगे और आप विष्वास द्वारा देखेंगे! ‘‘डर मत'' - क्योंकि यीषु आपको आपके पापो से बचााएँगे! परमेष्वर आज रात आपसे कहते है,

‘‘आत्मा जिस पर यीषु ने सहारा दिया विष्वास दिलाने,
मैं नहीं, मैं नहीं, निर्जन करूँगा उनके षत्रुओ को;
वह आत्मा यद्यपि सारा अधोलोक प्रयत्न करे हिलाने को,
   मैं कभी भी नहीं, नहीं कभी भी नहीं, नहीं कभी भी नहीं छोडुँगा!''

यीषु के पास विष्वास से आओ। वहाँ डरने जैसा कुछ भी नहीं है - कुछ भी नहीं डरने को!

‘‘मसीह यीषु पापियों का उद्धार करने के लिये जगत में आया'' (1 तीमुथियुस 1:15)।

हम कैसे प्रार्थना करे की आप उनका भरोसा अभी करो, इसी रात!

‘‘मैं तेरे संग संग मिस्त्र को चलता हूँ और मैं तुझे वहाँ से फिर निष्चय ले आऊँगा; और यूसुफ अपने हाथ से तेरी आँखो को बन्द करेगा'' (उत्पति 46:4)।

अगर आपको हमारे साथ आपकी मुक्ति के बारे में बात करनी हो तो, मेहरबानी करके सभागृह के पीछे जाओ। डो. केगन आपको षान्त जगह ले जाएँगे जहाँ हम आपके साथ बात कर सकते है यीषु पर भरोसा करने के बारे में जैसे ही श्रीमान ग्रीफिथ गाते है, ‘‘नींव कितनी मजबूत है।''

‘‘आत्मा जिस पर यीषु ने सहारा दिया विष्वास दिलाने,
   मैं नहीं, मैं नहीं, निर्जन करूँगा उनके षत्रुओ को;
वह आत्मा यद्यपि सारा अधोलोक प्रयत्न करे हिलाने को,
   मैं कभी भी नहीं, नहीं कभी भी नहीं, नहीं कभी भी नहीं छोडुँगा!

जब गहरे पानी में से मैं तूझे जाने को बुलाता हूँ,
   षोक की नदी में बाढ नहीं आनी चाहिए;
क्योंकि मैं आपके साथ हूँ, आपके आर्षीवाद के लिये प्रयत्न
   और तूझे षुद्ध करे तेरे गहरे क्लेष (दुःख) से।

जब उग्र प्रयत्नों द्वारा तेरा रास्ता दृश्टिगोचर हो,
   मेरा परिपूर्ण अनुग्रह आपकी सामग्री हो;
ज्वाला आपको हानि नहीं करनी चाहिए; मैं ही चित्रित करूँगा
   आपका मण्डूर नश्ट करने, और आपका सोना षुद्ध करने।''

डो. चान, मेहरबानी करके आओ और उनके लिये प्रार्थना करो जिन्होंने प्रतिसाद दिया है।

(संदेश का अंत)
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धार्मिक प्रवचन से पहले श्रीमान एबेल प्रुद्योम्म द्वारा पढ़ा हुआ पवित्रषास्त्र : उत्पति 45:25-46:4।
धार्मिक प्रवचन से पहले श्रीमान बेन्जामिन किनकेड ग्रीफिथ द्वारा गाया हुआ गीत :
‘‘नींव कितनी मजबूत है'' (‘‘क'' रीप्पोन के भक्तिगीत संग्रह में, 1787।)


रूपरेखा

याकूब की मिस्त्र को तीर्थयात्रा

(उत्पति की किताब पर धार्मिक प्रवचन क्रमांक 73)

‘‘तब इस्त्राएल अपना सब कुछ लेकर बेष्‍ोर्बा को गया, और वहाँ अपने पिता इसहाक के परमेष्वर को बलिदान चढ़ाया। तब परमेष्वर ने इस्त्राएल से रात को दर्षन में कहा, हे याकूब, हे याकूब! उसने कहा, क्या आज्ञा। उसने कहा, मैं परमेष्वर हूँ, तेरे पिता का परमेष्वर; तू मिस्त्र में जाने से मत डर; क्योंकि मैं तुझ से वहाँ एक बड़ी जाति बनाऊँगा। मैं तेरे संग संग मिस्त्र को चलता हूँ, और मैं तुझे वहाँ से फिर निष्चय ले जाऊँगा; और यूसुफ अपने हाथ से तेरी आँखो को बन्द करेगा'' (उत्पति 46:1-4)।

(उत्पति 45:27,28)।

1. पहला, हम याकूब के विष्वास के बारे में सीखते है, उत्पति 46:1;
इब्रानियों 13:17; 1 थिस्सलुनीकियों 5:12, 13;
नीतिवचन 3:5-8, 11-13।

2. दूसरा, हम याकूब के भय के बारे में सीखते है,
उत्पति 46:3; 15:12; 46:4; 1 तीमुथियुस 1:15।