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वचन का अकाल!

A FAMINE OF THE WORD!
(Hindi)

डो. आर. एल. हायर्मस, जुनि. द्वारा
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

लोस एंजलिस के बप्तीस टबरनेकल में प्रभु के दिन की षाम, 3 फरवरी, 2013 को दिया हुआ धार्मिक प्रवचन
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Lord’s Day Evening, February 3, 2013

‘‘परमेष्वर यहोवा की यह वाणी है, देखो, ऐसे दिन आते है, जब मैं इस देष में महँगी करूँगा, उस में न तो अन्न की भूख और न पानी की प्यास होगी, परन्तु यहोवा के वचनों के सुनने ही की भूख प्यास होगी। लोग यहोवा के वचन की खोज में समूद्र से समूद्र तक और उत्तर से पूरब तक मारे मारे फिरेंगे, परन्तु उसको न पाएँगे। उस समय सुन्दर कुमारियाँ और जवान पुरूश दोनों प्यास के मारे मूर्छा खाएँगे'' (आमोस 8:11-13)।


आमोस मृत समूद्र के करीब तकोआ (Tekoa) नामके छोटे से गांव से आया था। वो यहूदा के दक्षिणी राज्य के उजाड़ स्थान से आया था। परन्तु प्रभु ने उसे दूर उत्तर दिषा में, इस्त्राएल के राज्य में भेज दिया, जो यहूवा (Judah) से अलग हुआ था। उनके राजा, यारोबाम I, ने बेतेल (Bethel) में पूजा करने की झूठी जगह बनायी थी। अमस्याह (Amaziah) उस मूर्तिपूजक जैसी पूजा की जगह के याजक थे। आमोस ने कहा कि प्रभु का न्याय यहूदा पर गिरनेवाला ही था। उनके तीव्र प्रचार करने के कारण अमस्याह झूठे याजक ने उनकी निंदा की। डो. चार्ल्स एल. फेइनबर्ग ने कहा,

ऐसी सरल घोशणा की इच्छा और परमेष्वर के कारण (सदा) अप्रिय होती है फिर से न जन्में हुए और पापी आदमी को। और ऐसा ही था आमोस के दिनों में। परमेष्वर के वचन बिना प्रतिबन्द नहीं किये गए। अमस्याह (Amaziah), जो बेतेल में सुनहरे बछडे (Golden Calf) के महायाजक थे, भविश्यवक्ता को (राजा) यारोबाम (Jeroboam) के सामने अपराधी ठहराया ... पापी अमस्याह ने षुरूआत की राजद्रोह के निराधार दोशो से और समाप्त किया चेतावनी के षब्दों के साथ कि षायद परिवर्तन या राजद्रोह होगा भविश्यवक्ता के षब्दों से परिणाम स्वरूप ... अमस्याह अषुद्ध करता है आमोस के वचनो को ताकि राजा के सामने वे व्यक्तिगत अपराध लगे ... अब अमस्याह ... भविश्यवक्ता को सलाह देता है अपने स्वयं के राश्ट्र यहूदा को भाग जाने की ... कि वह बेतेल में अब और ज्यादा भविश्यवाणी न करें ... क्योंकि नगर साम्राज्य के धर्म के आसन पर था और राजा के एक निवास स्थान की भी (चार्ल्स एल. फेइनबर्ग, टीएच.डी., पीएच.डी., ध माइनर प्रोफेट्स अल्पव्यस्क भविश्यवक्ता, मुडी प्रेस, 1982 की प्रत, पृपृश्ठ 113, 114)।

आमोस ने अधर्मी याजक को जवाब दिया, और उसे कहा,

‘‘मैं न तो भविश्यवक्ता था, और न भविश्यवक्ता का बेटा; मैं तो गाय-बैल का चरवाहा, और गूलर के वृक्षो का छाँटनेवाला था, और यहोवा ने मुझे भेड़-बकरियों के पीछे पीछे फिरने से बुलाकर कहा, जा मेरी प्रजा इस्त्राएल से भविश्यवाणी कर। इसलिये अब तू यहोवा का वचन सुन, तू कहता है, इस्त्राएल के विरूद्ध भविश्यवाणी मत कर; और इसहाक के घराने के विरूद्ध बार बार वचन मत सुना। इस कारण यहोवा यों कहता है : तेरी स्त्री नगर में वेष्या हो जाएगी, और तेरे बेटे - बेटियाँ तलवार से मारी जाएँगी, और तेरी भूमि डोरी डालकर बाँट ली जाएगी; और तू आप अषुद्ध देष में मरेगा, और इस्त्राएल अपनी भूमि पर से निष्चय बँधुआई में जाएगा''। (आमोस 7:14-17)।

उन दिनों में, वह भविश्यवाणी अविष्वसनीय लगती थी। राश्ट्र समृद्धता और ताकत के षिखर पर था। परंतु आमोस ने प्रभु के वचन दिये। उसने प्रचार किया की प्रभु से चार न्याय आएँगे। इस्त्राएल पर प्रभु का पहला न्याय था कि वे बहिश्कार में गुलामी में जाएँगे।

‘‘इस कारण मैं तुम को दमिष्क के उस पार बँधुआई में कर दूँगा, सेनाओं के परमेष्वर यहोवा का यही वचन है'' (आमोस 5:27)।

प्रभु का इस्त्राएल पर दूसरा न्याय था कि यह सुनसान हो जाएँगा।

‘‘और इसहाक के ऊँचे स्थान उजाड़, और इस्त्राएल के पवित्र स्थान सुनसान हो जाएँगे, और मैं यारोबाम के घराने पर तलवार खींचे हुए चढ़ाई करूँगा'' (आमोस 7:9)।

प्रभु का तीसरा न्याय था कि वहाँ हर जगह में मृत्यु होगी।

‘‘और उस दिन राजमन्दिर के गीत हाहा-कार में बदल जाएँगे, और षवों का बड़ा ढेर लगेगा; और सब स्थानों में वे चुपचाप फेंक दिए जाएँगे'' (आमोस 8:3)।

हर जगह मृत्यु होगी। वे थोड़े जो बाकी थे वे षवों को चुपचाप नगर के बाहर फेंक देंगे। परन्तु प्रभु से चौथा न्याय दूसरों से बहुत अलग था। चौथे न्याय को फिर से सुनो।

‘‘परमेष्वर यहोवा की यह वाणी है, देखो, ऐसे दिन आते है, जब मैं इस देष में महँगी करूँगा, उस में न तो अन्न की भूख और न पानी की प्यास होगी, परन्तु यहोवा के वचनों के सुनने ही की भूख प्यास होगी। लोग यहोवा के वचन की खोज में समूद्र से समूद्र तक और उत्तर से पूरब तक मारे मारे फिरेंगे, परन्तु उसको न पाएँगे। उस समय सुन्दर कुमारियाँ और जवान पुरूश दोनों प्यास के मारे मूर्छा खाएँगे'' (आमोस 8:11-13)।

इसके बारे में सोचो! उस गुलामी, निर्जनता और मृत्यु की चेतावनी के अंत में - प्रभु के न्याय का उत्कर्श होगा, प्रभु के वचन सुनने का अकाल। परंतु, सही ज्ञान में, वो यर्थाथ में सारे न्याय में से सबसे बुरा है! गुलामी, निर्जनता, और मृत्यु सहन कर सकते है। परंतु प्रभु के वचनो का खोना सारी आषा ले जाता है।

याजक रीचर्ड वुर्मब्रान्ड (1909-2001) ने रोमनिया के साम्यवादी कारावास में चौदह वर्श बिताए। वे सताएँ गए थे और उन्होंने सब कुछ खो दिया सबकुछ, अर्थात प्रभु के वचन के अलावा! और प्रभु के वचन ने उसे उन सारी पीड़ा और यातना से ले गये! याजक वान्ग मीन्गडाओ (1909-1991) ने चीन में साम्यवादी कारावास में बीस वर्श बिताए। जब भेंट करनेवाले (interviewer) ने उनसे पूछा उनके कारावास के समय काल दौरान उनके लिये सबसे महत्वपूर्ण क्या था, वान्ग ने कहा, ‘‘वचन''। इन आदमीयों के मनमें बाइबल के वचन थे, और इसने उनको इतने वर्श जो उन्होंने विष्वास के लिये कारावास में बिताए थे उसके लिये आष्वासन (आराम) दिया। वहाँ पर अकेले, या राश्ट्र को कोई बड़ी सजा नहीं की प्रभु न्याय करे ‘‘प्रभु के वचन सुनने की भूख और प्यास'' (आमोस 8:11) भेजने से अधिक। वही वचन पाठ में दिया गया है।

‘‘परमेष्वर यहोवा की यह वाणी है, देखो, ऐसे दिन आते है, जब मैं इस देष में महँगी करूँगा, उस में न तो अन्न की भूख और न पानी की प्यास होगी, परन्तु यहोवा के वचनों के सुनने ही की भूख प्यास होगी। लोग यहोवा के वचन की खोज में समूद्र से समूद्र तक और उत्तर से पूरब तक मारे मारे फिरेंगे, परन्तु उसको न पाएँगे'' (आमोस 8:11-12)।

इस प्रकार पाठ का अप्रधान स्थान हमने देखा, और इसकी संक्षिप्त स्पश्टता भी। परंतु वहाँ पर दो बाते है जो मैं इसके संदर्भ में व्यवहार करूँगा।

1. पहला, षिक्षा जो हम पाठ से सिखते है।

प्रभु ने कहा, ‘‘मैं इस देष में महँगी करूँगा ... यहोवा के वचनों के सुनने की।'' यह अकस्मात (अचानक) नहीं होगा। प्रभु ने कहा, ‘‘मैं भेजुंगा'' इसे।

हमें नहीं सोचना चाहिए कि यह वचन का अकाल सिर्फ बाइबल पढ़ने के संदर्भ में है। उनके पास अवष्य तोराह (Torah), मूसाकी पहली पाँच किताबे होगी। उनके पास यह उनके घरों में नहीं होगी, क्योंकि यह सूचीपत्र पर हस्तलिखित थी। परंतु वे इसे सुन सके थे षब्त (विश्रामदिन) (Sabbath) पर पढ़ते समय। यह अकाल था प्रचार करने का अकाल, भविश्यवाणी संबंधी प्रचार करने के मजबूत मार का अकाल। डो. फेइनबर्ग ने कहा,

परमेष्वरने उनके इस्त्राएल के लिये असीम प्रेम के कारण उसे संदेष भेजा उनके सेवकों द्वारा उसे फिर से उठा लो उनके चुनने की और समानता उनकी इच्छा से उसके लिये। परंतु ये भविश्यवक्ता ... विरूद्ध थे; उनके संदेष तिरस्कार किए गए थे; और उनको (प्रचार करना बंद) करने को कहा गया था। अब परमेष्वर कहते है (यहूदा को) की, उसने उनके वचन को तुच्छ समझा था भविश्यवक्ताओं द्वारा, जब यह उसके पास लाया गया था, उसे जानना था सारे भविश्यवाणी संबंधी व्यवहार का (अन्त)। प्रभु के वचन उसमें से निकाले जाएँगे (फेइनबर्ग, ibid, पृश्ठ 118)।

जब लोगों को आत्मा-भरा प्रचार नहीं सुनना होता है, प्रभु उसे खींच लेते है - अदालती दण्ड के समान। वहाँ पर बाइबल में इसके अनेक द्रश्टांत है। राजा षाऊल ने षमूएल के भविश्यवाणी संबंधी वचनो का अस्वीकार किया, और प्रभु ने उससे फिर बात नहीं की (1 षमूएल 28:6)। यहेजकेल की किताब में हम पढ़ते है,

‘‘ष्सत्यानाष होने पर है, तब ढूँढने पर भी उन्हें षान्ति न मिलेगी। विपत्ति पर विपत्ति आएगी और उड़ती हुई चर्चा पर चर्चा सुनाई पड़ेगी; और लोग भविश्यवक्ता से दर्षन की बात पूछेंगे, परन्तु याजक के पास व्यवस्था और पुरनिये के पास से सम्मति देने की षक्ति जाती रहेगी'' (यहेजकेल 7:25-26)।

फिर, मीका 3:6,7 ने कहा कि प्रभु यहूदा का न्याय करेंगे भविश्यवक्ताओं का प्रचार करने से रोकने के द्वारा! डो. फेइनबर्ग ने कहा कि प्रभु भविश्यवाणी के प्रचार का अंत लाये जैसे ‘‘सत्य के ऐसे विरोध के लिये दिव्य प्रतिकार'' (ibid)।

नास्तिक याजक अमस्याह ने आमोस से कहा, ‘‘बेतेल में फिर कभी भविश्यवाणी न करना, क्योंकि वह राजा का पवित्रस्थान और राज-नगर है'' (आमोस 7:13)। और, इसलिये परमेष्वरने इस्त्राएल का न्याय किया। ‘‘प्रभु के वचन सुनने के'' (आमोस 8:11) अकाल भेजने के द्वारा।

नयी नियमावली में, प्रभु यीषु मसीह रोए यरूषलेम पर कहते हुए, ‘‘कितनी ही बार मैंने चाहा कि जैसे मुर्गी अपने बच्चों को अपने पंखो के नीचे इकट्ठा करती है, वैसे ही मैं भी तेरे बालकों को इकट्ठा कर लूँ, परन्तु तुमने न चाहा। देखो, तुम्हारा घर तुम्हारे लिये उजाड़ छोड़ा जाता है ... और यीषु मन्दिर से निकलकर जा रहा था'' (मती 23:37,38; 24:1)। दूसरे समय पर, यीषु के द्वारा पिषाचग्रस्त गदरेनियों को चंगा करने के बाद, ‘‘सारे नगर के लोग यीषु से भेंट करने को निकल आए, और उसे देखकर विनंती की कि हमारी सीमा से बाहर चला जा'' (मती 8:34)। वे चले गए। और वे कभी लौटकर नहीं गए। उनहोंने उनका अस्वीकार किया था, और वे उनको उनके पापों में मरने के लिये छोड़ दिया। प्रेरितों की किताब में ‘‘पौलुस वचन सुनाने की धुन में यहूदियों को गवाही देने लगा कि यीषु ही मसीह है'' (प्रेरितो 18:5)।

‘‘परन्तु जब वे विरोध और निन्दा करने लगे, तो उसने अपने कपड़े झाड़कर उनसे कहा, तुम्हारा लहू तुम्हारी ही गर्दन पर रहे, मैं निर्दोश हूँ। अब से मैं अन्यजातियों के पास जाऊँगा'' (प्रेरितो 18:6)।

2 इतिहास के अंतिम पाठ में हम पढ़ते है इस प्रकार के न्याय को फिर से।

‘‘उनके पूर्वजों के परमेष्वर यहोवा ने बड़ा यत्न करके अपने दूतों से उनके पास कहला भेजा, क्योंकि वह अपनी प्रजा और अपने धाम पर तरस खाता था; परन्तु वे परमेष्वर के दूतो को ठट्ठो में उड़ाते, उसके वचनों को तुच्छ जानते, और उसके नबियों की हँसी करते थे। अतः यहोवा अपनी प्रजा पर ऐसा झुँझला उठा कि बचने का कोई उपाय न रहा। तब उसने उन पर कसदियों के राजा से चढ़ाई करवाई, और इस ने उनके जवानों को उनके पवित्र भवन ही में तलवार से मार डाला; और क्या जवान, क्या कुँवारी, क्या बूढे, क्या पक्के बालवाले, किसी पर भी कोमलता न की; यहोवा ने सभी को उसके हाथ में कर दिया'' (2 इतिहास 36:15-17)।

इस प्रकार हम बाइबल से देखते है कि प्रभु कई बार भजबत भविश्यवाणी संबंध के प्रचार करने को निकाल देते है न्याय के समान जब यह अस्वीकार हुई है यह प्रभु द्वारा भविश्यवाणी संबंधी अदालती दण्ड है। अर्थात यही षिक्षा है हम हमारे पाठ से सिखते है।

2. दूसरा, पाठ का प्रार्थना पत्र।

‘‘परमेष्वर यहोवा की यह वाणी है, देखो, ऐसे दिन आते है, जब मैं इस देष में महँगी करूँगा, उस में न तो अन्न की भूख और न पानी की प्यास होगी, परन्तु यहोवा के वचनों के सुनने ही की भूख प्यास होगी। लोग यहोवा के वचन की खोज में समूद्र से समूद्र तक और उत्तर से पूरब तक मारे मारे फिरेंगे, परन्तु उसको न पाएँगे। उस समय सुन्दर कुमारियाँ और जवान पुरूश दोनों प्यास के मारे मूर्छा खाएँगे'' (आमोस 8:11-13)।

डो. केइथ एम. बेइली, मसीही और धर्मप्रचारक संगठन के होम सेक्रेटरी ने, एकबार कहा,

     मैं सोचता हूँ ए. डब्ल्यु. टोझर भविश्यवक्ता थें वे उनकी पीढी के ज्यादातर लोगों से बहुत दूर तक देख सकते थे। वे विचार और विष्लेशण कर सकते थे कि कौन कलीसिया का उसके मन तक क्षय करते है। भविश्यवाणी संबंधी ज्ञान में, वे साहसी थे बोलने में उस सच्चाई को अभिश्‍ोक की हुई योग्यता और सामर्थ्य के साथ (डों. केइथ एम. बेइली, मैं इसे नास्तिकता कहता हूँ! की प्रस्तावना में, डो. ए. डब्ल्यु. टोझर द्वारा, मसीही प्रकाषन, 1974 की प्रत, पृश्ठ 6)।

यहाँ है डो. टोझर से दो भविश्यवाणी का कथन। पहला, उन्होंने कहा,

     दुश्टात्मा उस प्रचारक को कोई परेषानी नहीं देगा जो उसके धार्मिक परिशद से डरा हुआ कठोर है और उसकी नौकरी के लिये चिंतित है विस्तार तक कि वो प्रचार करते है तीस मिनट के लिये और जमा जो वो कहता है ‘‘अच्छे बनो और आप बेहतर महसूस करेंगे।'' आप चाहो उतने अच्छे हो सकते हो और फिर भी अधोलोक में जाओ अगर आपने अपना भरोसा यीषु मसीह में नहीं रखा! दुश्टात्मा उसका समय बर्बाद नहीं करनेवाला प्रचारक को कोई भी परेषान करने जिसका संदेष सिर्फ ‘‘अच्छा होना'' है! (ए. डब्ल्यु. टोझर, डी.डी., ‘‘किसने यीषु को क्रूस पर रखा?'' ए. डब्ल्यु टोझर के सर्वश्रेश्ठ में, ध बेस्ट अॉफ ए. डब्ल्यु. टोझर, वोरेन, डब्ल्यु. वाईस्बी द्वारा संग्रह किया हुआ, बेकर बुक घर, 1986 की प्रत, पृपृश्ठ 230, 231)।

फिर से, डो. टोझर ने कहा,

     कोई भी आदमी सुन्दर तख्त भेंट के साथ मध्यम समुदाय के साथ षुरूआत कर सकते है अगर वो सिर्फ उन्हें ‘‘पालता'' है और उनको अकेला छोड़ देते है। उन्हें दो बात सारे पदार्थ विशयक सच्चाई और कभी भी इषारा नहीं करो कि वे गलत है और वे प्रसन्न होंगे दूसरी ओर, आदमी जो सच्चाई प्रचार करता है और उनके सुननेवालों के जीवन में लागु करते है वो कील और काँटे महसूस करेंगा। वो कठिन परंतु तेजस्वी जीवन आगे बढाएँगा। प्रभु बहुत सारे ऐसे भविश्यवक्ताओं को आगे बढाएँ। कलीसिया को उनकी बहुत आवष्यकता है (ibid, पृश्ठ 142)।

लीयोनार्ड रेवेनहील डो. टोझर के मित्र थे। हकीकत में, डो. टोझरने रेवेनहील की महान् किातब, क्यों पुनःजीवन विलम्ब करता हैं (व्हाय रीवाइवल टेरीस) की प्रस्तावना लिखि थी। उनकी किताब अमरिका मरने के लिये बहुत छोटा है, अमरिका इस टू यन्ग टु डाय, में रेवेनहील ने कहा,

     वहाँ महान् प्रचार का अकाल है, अकाल है अंतःकरण उतेजक प्रचार की, अकाल है मन - तोड़नेवाले प्रचार का, अकाल है आत्मा-चीरनेवाले प्रचार का, अकाल है उस प्रचार का जो हमारे पिता जानते थे जिसने सारी रात आदमीयों को जागृत रखा ताकि ऐसा न हो कि वे अधोलोक में गिरे। मैं दोहराता हूँ, ‘‘वहाँ पर अकाल है प्रभु के वचन का''। वहाँ पर अकाल है दृढ (अखण्ड) सुसमाचार प्रचार का (लीयोनार्ड रेवेनहील, अमरिका इझ टु यन्ग टु डाय, बेथनी फेलोषीप, 1979, पृश्ठ 80)।

मैं सोचता हूँ कि डो. टोझर और लीयोनार्ड रेवेनहील एकदम सही थे। ‘‘वहाँ पर अकाल है ऐसे प्रचार का जो हमारे पिता जानते थे जिसने सारी रात आदमीयों को जागृत रखा ताकि ऐसा न हो कि वे अधोलोक में गिरे''। हाँ, वहाँ पर आज ऐसे प्रचार करने का अकाल है, बहुत स्थितिपालक कलीसिया में भी।

परन्तु वही है जो आपको सुनने की आवष्यकता है अगर आप परिवर्तित नहीं हो। आदमी जो मेरे साथ इस तख्त के पीछे खडे है, आदमी जैसे डो. चान, डो. केगन, श्रीमान ग्रीफिथ, श्रीमान ली, श्रीमान प्रद्योम्म, श्रीमान सोन्ग और श्रीमान मेन्सीया, वो आदमी है जिन्होंने किमत चुकाई है सच्चाई बोलने, की कठिन सत्य, पाप पर प्रभु के न्याय का सत्य, सत्य कि आपको फिर से जनम लेना ही चाहिए, कि आप परिवर्तित होने ही चाहिए - या आप अधोलोक में जाओगे के कारण। वो आज बहुत बाहर नहीं सुनाई देता है। परन्तु यह सच्चाई है! प्रभु यीषु मसीहने कहा,

‘‘ये अनन्त दण्ड भोगेंगे ... अनन्त आग में चले जाओ, जो ष्‍ौतान और इसके दूतों के लिये तैयार की गई है'' (मती 25:46,41)।

हमें आपको सच्चाई कहनी चाहिए। हमें बुलाया गया था, जैसे भविश्यवक्ता आमोस को बुलाया था, आपको सच्चाई कहने। हमें सच्चाई छिपानी नहीं चाहिए। हम प्रभु द्वारा विवष किए गए है आपको सच्चाई कहने। हम पवित्र आत्मा द्वारा बलपूर्वक विवष किए गए है आपको सच्चाई कहने! हम प्रभु यीषु मसीह द्वारा दबाए गए है आपको आपकी खोयी हुई परिस्थिति बताने तीन बार पवित्र प्रभु की दृश्टि में! आप खोए हुए हो! आप खोए हुए हो! आप खोए हुए हो! मसीह ने कहा कि आप दण्डित हो ‘‘अनन्त आग में जो ष्‍ौतान और उसके दूतों के लिये तैयार की गई है'' (मती 25:41)।

दूसरों को हँसने दो। उनको हमारे प्रचार की हँसी उड़ाने दो। हम जो कहते है उसका उन्हें अस्वीकार करने दो, जैसे दुश्ट याजक अमस्याह ने भविश्यवक्ता आमोस की चेतावनी का अस्वीकार किया था। हमें विवष किया है कहने को जो आमोसने उस पापी आदमी से कहा, ‘‘तू आप अषुद्ध देष में मरेगा, और (तू) अपनी भूमि पर से निष्चय बँधुआई में जाएगा'' (आमोस 7:17)। आप सोचो उससे अधिक त्वरा से मृत्यु आपसे टकराएगी। और आपकी आत्मा नीचे जाएगी, बिना विचारे अनन्त ज्वाला में गिरेगी! दूसरों को हँसने और मजाक करने दो और हमें बदनाम करने दो, जैसे झूठे याजकने आमोस को किया। परन्तु हम प्रभु के वचन को रूका नहीं सकते। प्रभु के वचन! प्रभु के वचन! प्रभु के वचन ने आपसे कहा कि आप ‘‘अनन्त दण्ड भोगेंगे ... अनन्त आग में।'' वही है परमेष्वर - प्रभु यीषु मसीह का वचन!

ओह, उनके वचन को जानो (समझो)! ओह, उनके वचन सुनो! ओह, उनके वचन को ध्यान में लो! ओह, उनके वचन से डरो! ओह, यीषु मसीह के पास भागो। वे अकेले ही आपको बचा सकते है। वे अकेले ही उनके बहुमूल्य लहू द्वारा आपके पाप को षुद्ध कर सकते है! वे अकेले ही आपको उनकी धार्मिकता से ढँक सकते है! वे अकेले ही आपको स्वर्ग के लिये योग्य बना सकते है - और वे अकेले आपको अनन्त ज्वाला से बचा सकते है! पष्चाताप करो, यीषु, पर भरोसा करो और उनका लहू आपके पाप षुद्ध करेगा और आप बचाए जाओगे।

मैं एक गीत गाने जा रहा हूँ। अगर मैंने आपके अंतःकरण से बात की हो तो, आपकी बैठक छोड़ो और इस सभागृह के पीछे जाओ जब मैं गाता हूँ। डो. केगन आपको षान्त जगह ले जाएँगे जहाँ हम आपके साथ मुक्ति और उद्धारक के लहू द्वारा पाप से षुद्ध होने के बारे में बात कर सकते हैं अभी जाओ जब मैं गाता हूँ।

वहाँ फव्वारा है खून से भरा
   इम्मानूएल की रगो से लिया हुआ;
और पापीयों, उस जल-प्रलय के नीचे डूबकी लगाओ
   उनके सारे दोशी कलंक छुड़ाओ;
उनके सारे दोशी कलंक छुड़ाओ,
   उनके सारे दोशी कलंक छुड़ाओ;
और पापीयों, उस जल-प्रलय के नीचे डूबकी लगाओ
   उनके सारे दोशी कलंक छुड़ाओ;
(‘‘वहाँ फव्वारा है'' वीलीयम काऊपर द्वारा, 1731-1800)।

डो. चान मेहरबानी करके हमें प्रार्थना में ले जाओ।

(संदेश का अंत)
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धार्मिक प्रवचन से पहले श्रीमान एबेल प्रुद्योम्म द्वारा पढ़ा हुआ पवित्रषास्त्र : आमोस 7:10-17।
धार्मिक प्रवचन से पहले श्रीमान बेन्जामिन किनकेड ग्रीफिथ द्वारा गाया हुआ गीत :
‘‘लहू द्वारा बचाया हुआ'' (एस. जे. हेन्डरसन द्वारा, 1902)।


रूपरेखा

वचन का अकाल!

डो. आर. एल. हायर्मस, जुनि. द्वारा

‘‘परमेष्वर यहोवा की यह वाणी है, देखो, ऐसे दिन आते है, जब मैं इस देष में महँगी करूँगा, उस में न तो अन्न की भूख और न पानी की प्यास होगी, परन्तु यहोवा के वचनों के सुनने ही की भूख प्यास होगी। लोग यहोवा के वचन की खोज में समूद्र से समूद्र तक और उत्तर से पूरब तक मारे मारे फिरेंगे, परन्तु उसको न पाएँगे। उस समय सुन्दर कुमारियाँ और जवान पुरूश दोनों प्यास के मारे मूर्छा खाएँगे'' (आमोस 8:11-13)।

(आमोस 7:14-17:5:27;7:9;8:3)

1. पहला, षिक्षा जो हम पाठ से सिखते है, 1 षमूएल 28:6;
यहेजकेल 7:25-26; मीका 3:6,7; आमोस 7:13; मती 23:37,38;
मती 24:1; 8:34; प्रेरितो 18:5,6; 2 इतिहास 36:15-17।

2. दूसरा, पाठ का प्रार्थना पत्र, मती 25:46,41; आमोस 7:17।