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सर्वधर्म त्याग

THE APOSTASY
(Hindi)

डो. आर. एल. हायर्मस, जुनि. द्वारा
by Dr. R. L. Hymers, Jr.

लोस एंजलिस के बप्तीस टबरनेकल में षनिवार षाम, 29 दिसंबर, को दिया हुआ धार्मिक प्रवचन
A sermon preached at the Baptist Tabernacle of Los Angeles
Saturday Evening, December 29, 2012

‘‘किसी रीति से किसी के धोखे में न आना, क्योंकि वह दिन न आएगा जब तक धर्मी का त्याग न हो ले, और वह पाप का पुरूश अर्थात् विनाष का पुत्र प्रगट न हो'' (2 थिस्सलुनीकियों 2:3)।


‘‘वह दिन'' संदर्भ करता है ‘‘प्रभु के दिन'' के पद 2 (दो) में। थिस्सलुनीकियो को चिन्ता नहीं थी कि मसीह फिर से आए है। उन्हें जानकारी थी कि वे अब तक नहीं लौटे। परंतु उन्हें चिन्ता थी कि प्रभु के दिन का पहला हिस्सा आया था, और वो कि वे पहले से क्लेष के समय में थे। मूर्तिपूजक रोमी द्वारा प्रचण्ड बाधा वे अनुभव करते थे, उससे वे सोचने लगे वे पहले से क्लेष में थे। उनको ड़र था कि दिन के अन्त समय में प्रभु का क्रोध षुरू हुआ। अब, हमारे पाठ में, प्रेरितो पौलुस ने समझाया वे क्यों क्लेष के समय में नहीं हो सकते। दो घटनाएँ पहले होनी चाहिए। वीलीयम मेकडोनाल्ड ने कहा,

     सबसे पहले वहाँ पर धर्मी का त्याग, या स्वधर्म त्याग होगा। इसका अर्थ क्या है? ... ये संदर्भ करता है पूर्णरूप में मसीही विष्वास का आत्म समपर्ण, मसीही विष्वास का हकारात्मक अस्वीकार।
     फिर संसार के महान् व्यक्ति उठेंगे। उनके प्रभाव मानो, वे ‘‘स्वेचछाचार का आदमी'' है, पाप और द्रोह की बहुत मूर्तिमत्ता (embodiment) (वीलीयम मेकडोनाल्ड, बीलीवर्स बाइबल कोमेन्ट्री, विष्वास करनेवालों की बाइबल आलोचना, थोमस नेल्सन प्रकाषक, 1995 की प्रत, पृश्ठ 2053; 2 थिस्सलुनीकियों 2:1-3 पर संभाशण)।

‘‘स्वेच्छाचार का आदमी'' संदर्भ करता है मसीह के षत्रु का, संसार का अंतिम अनन्य षासक। इसीलिये, प्रेरितो हमें कहते है क्लेष आने से पहले दो बातें होनी ही चाहिए - स्वधर्म त्याग, और मसीह के षत्रु का प्रकाषित होना। इस संदेष में, मैं व्यवहार करता हूँ इस में से पहले के साथ - स्वधर्म त्याग। प्रभु का दिन नहीं आएगा ‘‘जब तक धर्मी का त्याग हो न ले''। डो. डब्ल्यु ए. क्रीसवेल ने कहा,

वाक्यखंड ‘‘त्याग'' ‘‘a falling away'' षायद अनुवाद किया है ‘‘स्वधर्म त्याग''। क्रियापद (ध) का इस्तेमाल संकेत करता है कि पौलुस के दिमाग में विष्‍ोश स्वधर्म त्याग है। झंझट है की ‘‘प्रभु के दिन के'' पहले वहाँ लक्ष्य किया हुआ स्वीकृत विष्वासुओं का त्याग होगा (डब्ल्यु ए. क्रीसवेल, पीएच.डी., ध क्रीसवेल स्टडी बाइबल, थोमस नेल्सन प्रकाषक, 1979; 2 थिस्सलुनीकियो 2:3 पर टीप्पणी)।

वहाँ मसीही युग या व्यवस्था के दौरान कई समय थे स्वधर्म त्याग के। परंतु तुरंत वहाँ पूर्ण - मडण्लाकार ‘‘पूर्णरूप में मसीही विष्वास का आत्मसमर्पण'' था (मेकडोनाल्ड, ibid.) आधुनिक समय तक था। आज सारे बड़े प्रोटेस्टेन्ट (मसीही धर्म के वो अनुयायी जो पोप का पूरी तरह स्वीकार नहीं करते) संघ स्वधर्म त्याग के साथ प्रष्नार्थ में है। यह सच है मेथोडीस्ट षाला और संस्था का, लुथरन का भी, ुख्य प्रेसबायटेरीयन (प्रधान पादरी द्वारा षासित गिरजे का) समुदाय, धर्माध्यक्ष संबंधी और बहुत से बेपटीस्ट, जैसे हमने हमारी किताब टुडेस एपोस्टेसी, आजका स्वधर्म त्याग (हार्थस्टोन प्रकाषन, 1999; 2001 की दूसरी प्रत) में लिखा है। उदार स्वधर्म त्याग में फिसलना रोमन केथलिक कलीसिया में भी हुआ है, जहाँ पोप स्वयं अब पूरी तरह से स्वीकार करते है डार्वीन का विकास। डो. हेरोल्ड लीन्डसेल ने उनकी सीमाचीन्ह किताब ध बेटल फोर ध बाइबल, बाइबल के लिये युद्ध (झोन्डरवान, 1976) में कलीसिया में स्वधर्म त्याग का सविस्तार विवरण लिखा। उस किताब में कुछ षिर्शक के पाठ में स्वधर्म त्याग के उपाय का भी समावेष है,

ध लुथरन कलीसिया - मीसौरी सायनोड
(The Lutheran Church – Missouri Synod)
ध दक्षिणी बेपटीस्ट सभा
(The Southern Baptist Convention)
फूलर थीयोलोजीकल धार्मिक पाठषाला
(Fuller Theological Seminary)
और दूसरी जाति और छोटे कलीसिया जुथ।
(and other Denominations and Para church Groups)

डो. डेवीड एफ. वेल्स, गोरडोन में हीस्टोरीकल और सीस्टमेटिक थियोलोजी - कोनवेल थीयोलोजीकल धार्मिक पाठषाला के प्राध्यापक, ने कई किताबें लिखी है धर्म पुस्तक संबंधी प्रचार में स्वधर्म त्याग पर, इस प्रकार के षीर्शक के साथ जैसे, गोड इन ध वेस्टलेन्ड (बंजर भूमि में परमेष्वर) लुझींग अवर वर्च्यु (हमारा धर्म खोते हुए), और नो प्लेस फोर टु्रथ : ओर वोटेवर हेप्पन्ड टु इवाजलीकल थीयोलोजी? (सच के लिये जगह नहीं : या धर्म प्रचारक थीयोलोजी को जो कुछ भी हुआ?) टाइम सामायिक ने डो. वेल्स की किताबों को कहा, ‘‘ए स्टीन्गींग इन्डीक्टमेन्ट अॉफ इवान्जलीकलीझमस थीयोलोजीकल करप्षन'' (धर्म पुस्तक संबंधी धर्मप्रचार का थीयोलीकल) सिद्धांतवादी भ्रश्टाचार का पीड़ाकारी कलंक''। सच के लिये जगह नहीं, (नो प्लेस फोर ट्रुथ), (एरडमान्स, 1993) डो. वेल्सने कहा,

जैसे मसीही सच्चाई का संसार टूटेगा ... परिणाम ... है व्यवहारिक नास्तिकता, यह उदारमतवादी है या सिद्धातंवादी जो इस में व्यस्त है उसकी परवाह किए बिना। यह नास्तिकता है जो कलीसिया को कम करता है सभा, यह देता है उससे अधिक कुछ नहीं! या अच्छी भावनाएँ धर्मप्रचारक (सेवक) उत्पन्न कर सकते है। ... सहायक कार्य से थोड़ा अधिक तक कम किया हुआ ... हमारे पास बचा है सिर्फ कल्पना भाव ... वो सुनना चाहते है बिना न्याय किये, जिसमें है ... थोड़ी रूचि सच्चाई में, वो सहानुभूति (दयायुक्त) परंतु जो सही है उसके लिये लगाव नहीं (पृपृश्ठ 248, 249)।

फिर से उन्होंने कहा,

धर्म प्रचारक विष्व ने अपनी राजनीति का मौलिक सिद्धांत खो दिया है आधुनिकता की सुविधा की लंबी प्रक्रिया से। दुःखदरूप से, इसने परमेष्वर के केन्द्रिय और पर्याप्त की प्राचीन परंपरागत समझ को खो दिया है ... कलीसिया को आवष्यकता है पुनःसुधार की ना कि पुनःउद्धार की (ibid., पृपृश्ठ 295, 296)।

वे कहते है कि बड़े - कलीसिया, आवष्यकता अनुसार खुलनेवाले (emerging) कलीसिया, और प्रगतिषील बढ़ रहे है ‘‘ज्यादा स्वतंत्र विचारवाली मसीहीता की ओर। आनेवाले समय में इस सुसमाचार प्रचारक के बच्चे पूरी तरह से बढ़े हुए षिश्ट बन जाएँगे, मुझे संदेह है, वैसे ही जिसके सामने सुसमाचार प्रचारक दादा-दादी (grandparents) ने मूलरूप से विरोध किया था'' (डेवीड एफ. वोल्स, पीएच. डी., ध करेज टु बी प्रोटेस्टन्ट, (मसीही के उस पंथ का अनुयायी जो पोप के सर्वस्व अधिकार का अस्वीकार करते है वो बनने का साहस) एरडमान्स प्रकाषन कम्पनी, 2008, पृश्ठ 2)। मैं उनसे सहमत हूँ, सिवा मैं सोचता हूँ कि उनमें से बहुत पहले से ही ‘‘पूरी तरह से बढ़े हुए षिश्ट'' है। द्रश्टांत के तौर पर, रोब बेल का अनन्त अधोलोक पर हमला बाहर आ सकता है हेरी एमरसन फोस्डीक की किताब से, या भूतकाल के दूसरे षिश्ट से। और बेल की किताबें पूरी तरह से दृढ की गयी है फूलर थीयोलोजीकल धार्मिक पाठषाला के अध्यक्ष द्वारा!

‘‘किसी रीति से किसी के धोखे में न आना, क्योंकि वह दिन न आएगा जब तक धर्मी का त्याग न हो ले ...'' (2 थिस्सलुनीकियों 2:3)।

हम अभी स्वधर्मत्याग के उस समय में निष्चितरूप से जी रहे है!

परंतु स्वधर्म त्याग आता कैसे है? डो. मार्टीन लोयड - जोनेस सही थे जब उन्होंने कहा,

मुझे दृढ़ता से स्वीकार करने में कोई हिचकिचाहट नहीं है कि आज मसीही कलीसिया की अवस्था और विष्व की पूरी अवस्था की महिमा का मुख्य कारण है भयानक स्वधर्म त्याग जिसने बढ़ती से कलीसिया के गुणदोश बताये है पिछले सौ वर्शों से (डी. मार्टीन लोयड-जोनेस, एम.डी., पुनःउद्धार, (रीवाइवल), क्रोसवे बुक्स, 1987 की प्रत, पृश्ठ 55)।

डो. लोयड - जोनेस ने वह कहा 1970 के षुरूआत में। अगर उन्होंने यह कथन आज किया होता वे कहते, ‘‘भयानक स्वधर्म त्याग जिसने बढ़ती से कलीसिया के गुण-दोश बताये है पिछले देढ सौ वर्शो से''।

हम स्वधर्म त्याग की जड़ो का पता कर सकते है प्रबोधन (Enlightenment) में वापस जाकर। डो. फ्रान्सीस ए. शेफर (Schaeffer) (1912-1984) ने दिखाया की फ्रान्स के तत्वज्ञानी वोलटेर (1694-1778) कहे जाते थे ‘‘प्रबोधन के पिता''। डो. शेफर ने कहा,

प्रबोधन का काल्पनिक सपना पाँच षब्दो द्वारा जोड़ा जा सकता है : कारण, प्रकृति, आनन्द, प्रगति और स्वतंत्रता। इसके सोचने में पूर्णरूप से धार्मिक सत्व था (फ्रान्सीस ए. शेफर, डी.डी., हाउ षुड वी धेन लीव? (फिर हम कैसे जीये?) पुस्तक के मुद्रण का मूल अधिकार 2005, पृश्ठ 121)।

प्रबोधन सोच में आदमी केन्द्र में था। प्रभु और बाइबल पीछे धकेले गये थे।

हमारी स्वधर्म त्याग की पढ़ाई के लिये, तीन प्रबोधन आदमी खड़े रहते, और उनका अभिप्राय अत्यन्त महत्वपूर्ण है। जोहान्न सेम्लर (1725-1791) जर्मन के वेदान्ती थे जिन्होंने कहा था कि ईष्वरज्ञान निरन्तर बदलने और उन्नति के अधीन था जैसे अध्यात्मवादी विभिन्न सांस्कृतिक हालांतो को प्रतिसाद देते है। परिणाम स्वरूप, उन्होंने कहा कि वहाँ बाइबल में बहुत कुछ है जो उत्तेजित नहीं किया गया। बाइबल का मूल्य हर एक व्यक्ति के न्याय पर छोड़ देना चाहिए। इस प्रकार, सेम्लर मानवीय कारण को बाइबल संबंधी आकाषवाणी से ऊपर रखते है, और बाइबल संबंधी टीका के लिये द्वार खोल दिये जो जल्दी जर्मनी के बाहर फेंका गया और बाइबल संबंधी अधिकार को आधुनिक विष्व में नश्ट किया था।

स्वधर्मत्याग के वृद्धि में दूसरे बड़े महत्वपूर्ण आदमी थे चार्ल्स डार्वीन (1809-1882)। डार्वीन की विष्वविद्यालय संबंधी स्नातकता सिर्फ थीयोलोजी (ईष्वरज्ञान) थी। परंतु उन्होंने उनकी पहले की मान्यता सर्जन के उत्पति के लेखप्रमाण, को त्याग और जाति को बदलकर दूसरा आकार धारण करने की (थीयरी) सिद्धांत को बनाया, मषहूरता से जाना जाता है विस्तार, उनकी किताब ध ओरीजीन ओफ स्पीसीस, जातियों का मूल में। बाद में उन्होंने उनकी इंसानो के विस्तार की मान्यता को लागु किया, 1871 में, ध डीसेन्ट अॉफ मेन, आदमी का गिराव में। थोमस हक्सले (1829-1895) ने डार्वीन के विस्तार को विभिन्न दलीलों में मषहूर किया जिसमें उसने मसीहीता पर आक्रमण किया था। डार्वीन और हक्सले ने मसीही विष्वास और पवित्रषास्त्र के अधिकार को अत्यंत अस्थिर किया।

प्रबोधन सोच के तीसरे व्यक्ति, जो आमतौर पर स्वधर्म त्याग के उठने में उपेक्षा किए गए है, वो थे चार्ल्स जी. फिनेय (1792-1875)। फिनेय ने प्रोटेस्टन्ट पुनःसुधार की षिक्षा पर आक्रमण किया, और आदमी के हाथ में बजाय प्रभु के हाथ के, मुक्ति रखी। फिनेय ने सोचा कि आदमी चुन सकता या अस्वीकार कर सकता है मुक्ति का अपने स्वयं की इच्छा द्वारा। इसलिये सिर्फ अनुग्रह द्वारा मुक्ति, पुनःसुधार की बड़ी षिक्षा, बदली गई फिनेय की नीयो - पेलाजीयानीझम (Neo-Pelagianism) विचार की आदमी अपने आप निष्चय कर सकता है मसीही बनने, और वो ऐसा कर सकता है अपनी स्वयं की इच्छा द्वारा। फिनेय फौजी (Arminian) नहीं था। वो पूरी तरह से पेलाजीयानीस्ट था। फिनेय की पेलाजीयानीस्ट नास्तिकता अन्त में दूरी और पुनःसुधार की षिक्षा बदली गई मुक्ति सिर्फ अनुग्रह द्वारा से। इसलिये फिनेय के विचार इतने सामर्थ्यवान बने कि इसने प्रोटेस्टन्ट सिद्धांत के उच्चकोटि के साहित्य का आधुनिक ‘‘निर्णायकता'' से बदला।

चलिये जाँचते है कैसे ‘‘निर्णायकता'' ने कलीसिया को हाथ में लिया और आज का स्वधर्म त्याग उत्पन्न किया। उनकी किताब, रीवाइवल एन्ड रीवाइवलीझम : ध मेकिंग एन्ड मारींग अॉफ अमेरिकन इवान्जेलिकलीझम 1750-1858, में इयान एच. मुरेय दिखाते है कि ईसाइ मत संबंधी धर्म-पुस्तक की षिक्षा दूर हो गयी परिवर्तन के पुराने विचार से उन्नीसवी सदी में ‘‘निर्णायकता'' चार्ल्स जी. फिनेय (1792-1875) से। मुरेय घोशित करते है कि यह परिवर्तन करीबन पूर्ण था, मषहूर धर्म प्रचार संबंधी सोच में बीसवी सदी के प्रारंभ में :

परिवर्तन आदमी का काम है वह विचार स्थानीय मनुश्यों में प्रचलित (endemic) हो गया धर्म संबंधी सुसमाचार प्रचार संबंधी (इवान्जेकलीझम के अतिआवष्यक हिस्सा) को, और, जैसे आदमी भूल गए कि पुनःजीवन प्रभु का काम है, इसलिये पुनःजन्म में विष्वास प्रभु की आत्मा का काम है वो अदृष्य हो गया। (यह) फिनेय की थियोलोजी सीधा परिणाम था (इयान एम. मुरेय, रीवाइवल एन्ड रीवाइवलीझम : ध मेकींग एन्ड मारींग अॉफ अमेरिकन इवान्जेलीकलीझम 1750-1858, बेनर अॉफ ट्रुथ ट्रस्ट, 1994, पृपृश्ठ 412-413)।

मुरेय की किताब देती है गहरा परिज्ञान इस मुख्य आधार (Pivotal) के समय में। पाठ चौदा पहले पढ़ा जाना चाहिए। यह स्थूल-वर्णन करता है धर्मप्रचार संबंधी धर्म को फिसलने का, परिवर्तन के पुराने विचार से फिनेय के ‘‘निर्णायक्ता'' की नयी षिक्षा में। परिवर्तन जैसे पहले के प्रोटेस्टन्ट और बेपटीस्ट द्वारा सीखाया गया था वो क्रमषः भूला गया, सिर्फ मसीह के लिये निर्णय के द्वारा बदला गया, अकेले व्यक्ति को उसका जो अर्थ हो। ‘‘आगे जाना'', ‘‘हाथ उठाना'', ‘‘पापीयों की प्रार्थना कहना'', ‘‘मसीह को परमेष्वर बनाना'', ‘‘मुक्ति के विचार'' को मानना या थोड़े बाइबल के पद मानना, परिवर्तन प्रभु का काम है वो बाइबल के विचार को आदमी के मन में से बदला।

परिवर्तन से निर्णायक्ता पर बदलना, जो फिनेय द्वारा भाले की तरह नौकदार बनाया था, वो दूसरे बहुतों द्वारा ध्यान दिया गया। डो. डेवीड एफ. वेल्सने, एैतिहासिक और यथाक्रम थीयोलोजी, गोरडोन - कोनवेल थीयोलोजीकल धार्मिक पाठषाला में, कहा, ‘‘परिवर्तन के बारे में समझने का बदलना कई स्थिति में था।'' उन्होंने उनको दिया और फिर दिखाया कि यह बदलाव चार्ल्स फिनेय की सेवा के साथ जुड़ा हुआ है (डेवीड एफ. वेल्स, पीएच.डी., टर्नींग टु गोड : बीबलीकल कन्वर्झन इन ध मोर्डन वर्ल्ड, (प्रभु की ओर फिरना : आधुनिक विष्व में बाइबल - संबंधी परिवर्तन), बेकर बुक हाऊस, 1989, पृश्ठ 93)। इतिहासकार स्व. डॉ. वीलीयम जी. मेकलोग्लीन, जुनि. ने ‘‘चार्ल्स ग्रान्डीसन फिनेय, जिसने, वर्श 1825-1835 में, आधुनिक पुनःजीवन का निर्माण किया'' के बारे में बोले (वीलीयम जी. मेकलोग्लीन, जुनि., पीएच.डी., आधुनिक पुनःजीवन संबंधी : चार्ल्स ग्रान्डीसन फिनेय से बीली ग्रेहाम, ध रोनाल्ड प्रेस कम्पनी, 1959, पृश्ठ 11)। सुसमाचार प्रचार संबंधी अध्यात्मवादी जे. आय. पेकर सहमत हुए, कहते हुए कि ‘‘आधुनिक प्रकार का सुसमाचार प्रचार 1820 में चार्ल्स जी. फिनेय द्वारा आविश्कार किया गया था'' (जे. आय. पेकर, ए क्वेस्ट फोर गोडलीनेस, ईष्वरभक्ति के लिये खोज, क्रोसवे बुक्स, 1990, पृश्ठ 292)। रीचर्ड रेबीनोवीटझ ने परिवर्तन से निर्णायक्ता पर बदलने फिनेय के समय के दौरान, के बारे में लिखा एक लौकिक इतिहासकार के मंतव्य से (रीचर्ड रेबीनोवीट्झ, ध स्पीरीच्युअल सेल्फ इन एवरीडे लाइफ : ध ट्रान्सफरेमेषन अॉफ पर्सनस रीलीजीयस एक्सपीरीयन्स इन नाइनटीन्थ सेन्चुरी न्यु इंग्लेन्ड, नोर्थइर्स्टन विष्वविद्यालय प्रेस, 1989)। दूसरे प्रचारको का इस परिवर्तन में हिस्सा था, परंतु वो फिनेय थे जिन्होंने स्पश्टता से राह दिखायी।

इस प्रकार, परिवर्तन निर्णायक्ता में बदला विष्‍ोश करके चार्ल्स जी. फिनेय की सेवा और लिखावट से, जैसे इन आदमीयों ने दर्षाया था। फिनेय के मंतव्य ने अमरिका के सुसमाचार प्रचारक कलीसियाओं को पूरी तरह निगल लिया, और बाद में, बीसवी सदी में, ब्रीटीष टापुओ पर कलीसियाओं को अषुद्ध किया। आज, इयान मुरेय का कथन बहुत करीब से सर्व-व्यापी है अंग्रेजी बोलनेवाले विष्व में : ‘‘आदमी भूल गए कि पुनःजीवन परमेष्वर का काम है, इसलिये पुनःउद्धार में विष्वास कि यह प्रभु की आत्मा का काम है वो अदृष्य हो गया। (यह) था फिनेय के सिद्धांत का सीधा परिणाम'' (मुरेय, रीवाइवल एन्ड रीवाइवलीझम, पृपृश्ठ 412-413)। जैसे वीलीयम जी. मेकलोग्लीन, जुनि. इसे रखते है, ‘‘उन्होंने अमेरिका के पुनःउद्धार के कार्य के नये युग का उद्घाटन किया था। उन्होंने पूरे तत्वज्ञान और सुसमाचार प्रचार की प्रक्रिया को बदला'' (मेक्लोग्लीन, मोर्डन रीवाइवलीझम, पृश्ठ 11)। हम आज भी उस बदलाव की असर के साथ व्यवहार करते है। हमारे आसपास का स्वधर्म त्याग प्रगट करता है कि फिनेय की निर्णायकता हमारे कलीसियाओं को मृत्यु तक ले गई।

फिनेय प्रबोधन का परिणाम थे, जिसने अठ़ारवी (18) सदी में मनुश्य जाति की सेवा (मानव विचार को जानकारी (ज्ञान) का ज़रीया) का परिचय कराया तत्वज्ञान संबंधी प्रकाष में। ब्लेकस्टोन की टीप्पणी कायदे पर मुख्य मार्ग थी जिसके द्वारा प्रबोधन विचार फिनेय के सोच में (विचारों में) आए। फिनेय की थियोलोजी की किताब करीबन पूरी तरह अवलंबित है इंसानी विवेक पर, उनका ऋण दिखाते है प्रबोधन को। केन्ट (डी. 1804) और सेलीयरमेचर (डी. 1834) की दलील, कि धर्म प्रभु के बारे में कम, आदमी के धार्मिक अनुभवों के बारे में अधिक है, फिनेय की थियोलोजी और मेथोडोलोजी (नियम से काम करने का सिद्धांत) में पूरा वर्णन मिलता है। जी. डब्ल्यु. एफ. हेगल (डी. 1831) ने कहा कि परमेष्वर भाववाचक ताकत है। यह विचार फिनेय की लिखावट में भी अनेक बार प्रकट होता है। इसलिये, प्रबोधन आदमी जैसे एम्मान्युएल केन्ट, फ्रीडरीच सेलीयरमेचर और जी. डब्ल्यु. एफ. हेगल के तत्वज्ञान संबंधी विचार फिनेय के उपर आए बुद्धिषाली युवा प्रतिनिधि के दिमाग में षुद्ध करने के द्वारा, इन विचारें को नीचा करने के द्वारा। इंसानी केन्द्रियता और इंसानी पर्याप्ति बन गए है फिनेय के समय का मानसिक बुद्धि संबंधी सोचना, और वे बड़े प्रभावित हु थे इन विचारोे द्वारा। और यह अत्यंत फिनेय द्वारा है कि प्रबोधन फिर अषुद्ध प्रोटेस्टेन्टीझम और सब को नश्ट किया। ऐसे प्रारंभ के 1887 में स्पर्जन कह सकते, ‘‘कलीसिया दफनाया जा रहा है आधुनिक नास्तिकता के कीचड़ के फव्वारे के नीचे'' (‘‘ध ब्लड ष्‍ोड फोर मेनी'', ‘‘बहुतों के लिये लहू बहाया गया'', ध मेट्रोपोलीटन टबरनेकल पुलपीट, पीलग्रीम प्रकाषन, 1974 में फिर से छ़पा हुआ, भाग XXXIII, पृश्ठ 374)।

फिनेय की निर्णायकता ने पहले नाष किया समुदाय संबंधी घ्यान करनेवालो को, फिर नियमानुसार कार्य करनेवालो को, फिर प्रेसबायटेरीयनो को, और फिर विभिन्न बेपटीस्ट जुथो कों। उदार मत का सिद्धांत इन कलीसियाओं के मृत्यु का कारण नहीं बना, निर्णायक्ताने किया। निर्णायकता ने उदारमत का सिद्धांत उत्पन्न किया। हर उदार प्राध्यापक, दक्षिणी बेपटीस्ट धार्मिक पाठषाला में जहाँ मैंने हाजरी दी थी उन्होंने कुछ प्रकार के निर्णय किये। परंतु इन निर्णयों ने उनको परिवर्तित नहीं किया - इसलिये वे जल्दी से उदारमत के सिद्धांत में गये जब उन्होंने इसका अभ्यास किया। निर्णायकता उदारमत का सिद्धांत उत्पन्न करती है अपरिवर्तित लोगो के कारण, चाहे उन्होंने निर्णय किया हो, सरलता से बाइबल का आध्यात्मिक संदेष समझ नहीं सकते (सीएफ. 1 कुरिन्थियों 2:14)। यीषु ने एकबार मषहूर बाइबल षिक्षक से कहा, ‘‘अचम्भा न कर कि मैंने तुझसे कहा, तुझे नये सिरे से जन्म लेना आवष्यक है'' (यूहन्ना 3:7)। निर्णायकता ने कलीसियाओं को अपरिवर्तित लोगो से भर दिया। निर्णायकता के सीधे परिणामस्वरूप प्रोटेस्टन्ट जाति खोए हुए आदमी और औरतों के वष के अधीन आए। इस प्रकार आज के स्वधर्म त्याग ने कलीसियाओं को निगला।

कोई बात नहीं आप कौन हो, आपने जो कुछ भी सीखा हो, आपने कितने ‘‘निर्णय'' या ‘‘पुनःसमर्पण'' किए, या आपने मसीह को आपका परमेष्वर बनाने के कितने प्रयत्न किए, आपको अभी भी सच्चे परिवर्तन का अनुभव करना चाहिए या आप अधोलोक में जाओगे। यह हमारी प्रार्थना है कि आप पाप के अपराधी प्रमाणित होंगे और बहुत देर होने से पहले सच्चे परिवर्तन में मसीह का भरोसा करेंगे।

(संदेश का अंत)
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धार्मिक प्रवचन से पहले श्रीमान बेन्जामिन किनकेड ग्रीफिथ द्वारा गाया हुआ गीत :
‘‘मसीह लौटे'' (एच. एल. टर्नर द्वारा, 1878)